सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, मशीनों की खराबी और खुले में कचरे के निस्तारण से संक्रमण का खतरा
भागलपुर: जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मायागंज अस्पताल) के पास बरारी थाने के निकट स्थित 'सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट' कंपनी इन दिनों विवादों के घेरे में है। बायो-मेडिकल कचरे का सुरक्षित निपटारा करने वाली इस अधिकृत कंपनी के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि कंपनी की मशीनें लंबे समय से खराब हैं, जिसके कारण कचरे का सही तरीके से निस्तारण नहीं हो पा रहा है और अब यह संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकता है।
क्या है पूरा विवाद?
सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी पर आरोप है कि वह बायो-मेडिकल कचरे को निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत नष्ट करने के बजाय खुले में फेंक रही है। स्थानीय स्तर पर काम कर रहे 'ऑल इंडिया माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट एंड लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन' (एमाल्टा) ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। एमाल्टा का कहना है कि कंपनी की कचरा निष्पादन मशीन (Incinerator/Autoclave) लंबे समय से तकनीकी खराबी से जूझ रही है, जिसके कारण अस्पताल से आने वाला खतरनाक जैविक कचरा (जैसे प्रयुक्त सिरिंज, खून से सनी पट्टियां और अन्य संक्रमित सामग्री) असुरक्षित ढंग से जमा हो रहा है।
संक्रमण का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, बायो-मेडिकल कचरा यदि वैज्ञानिक तरीके से नष्ट न किया जाए, तो यह न केवल पर्यावरण को दूषित करता है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में गंभीर बीमारियों के फैलने का कारण भी बनता है। भागलपुर के रिहायशी और अस्पताल के पास के इलाकों में खुले में कचरा फेंके जाने की शिकायतें मिलने के बाद से स्थानीय लोगों में आक्रोश है। खुले में पड़े इस कचरे तक आवारा पशुओं की पहुंच भी बनी रहती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
एमाल्टा का सख्त रुख और कार्रवाई की मांग
एमाल्टा के प्रमंडलीय अध्यक्ष पंकज कुमार और सचिव प्रशांत कुमार सिंह ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वे अब चुप नहीं बैठेंगे। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने निर्णय लिया है कि वे इसकी शिकायत सीधे प्रमंडलीय आयुक्त (Commissioner), जिलाधिकारी (DM) और सिविल सर्जन (CS) से करेंगे। उन्होंने मांग की है कि कंपनी के खिलाफ तत्काल जांच हो और यदि कंपनी सुधार करने में असमर्थ है, तो उसके अनुबंध को रद्द कर दिया जाए।
क्या कहती है कंपनी की जिम्मेदारी?
नियमों के अनुसार, बायो-मेडिकल वेस्ट का निपटारा करने वाली कंपनी को अस्पताल से प्रतिदिन कचरा उठाना अनिवार्य है। साथ ही, उसे बार-कोडिंग और जीपीएस प्रणाली के माध्यम से कचरे की ट्रैकिंग करनी होती है। सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट के पास भागलपुर सहित आसपास के कई जिलों के कचरा निपटान का जिम्मा है। हालांकि, मौजूदा विवाद ने कंपनी की विश्वसनीयता और नियमों के पालन पर बड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
अस्पतालों की लापरवाही भी एक कारण
केवल कंपनी ही नहीं, जिले के 488 से अधिक निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में है। कई निजी संस्थानों पर आरोप है कि वे अपना मेडिकल कचरा नियमानुसार सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट को सौंपने के बजाय आम कूड़ेदान या नालों में फेंक देते हैं। इससे पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
फिलहाल, इस मामले में प्रशासनिक हस्तक्षेप की उम्मीद है। यदि समय रहते इन मशीनों की मरम्मत नहीं हुई और कचरे के प्रबंधन में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो यह स्थिति भागलपुर के स्वास्थ्य वातावरण के लिए बड़ी आपदा का रूप ले सकती है।