इस्माईलपुर-गोपालपुर बिंदटोली में 100 करोड़ की लागत से कटावरोधी कार्य जारी

भागलपुर/नवगछिया: गंगा के रौद्र रूप और हर साल आने वाली बाढ़ की विभीषिका से बचाव के लिए भागलपुर जिले के इस्माईलपुर-गोपालपुर बिंदटोली तटबंध पर इस बार युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि से यहाँ बाढ़ सुरक्षा और कटावरोधी कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है। पिछले वर्षों में तटबंध में आई दरारों और कटाव से मिले सबक के बाद, इस बार प्रशासन कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

सुरक्षा की नई रणनीति: 7.1 किलोमीटर का 'चैनल'

तटबंध की मजबूती को लेकर विभाग ने एक नई रणनीति अपनाई है। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और तटबंध पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए, विभाग ने 7.1 किलोमीटर लंबा एक चैनल (Channel) का निर्माण पूरा कर लिया है। इस परियोजना को महज 90 दिनों के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है। अभियंताओं का मानना है कि यह चैनल गंगा की धारा को मुख्य तटबंध से दूर मोड़ देगा, जिससे स्पर (Spur) और तटबंध पर दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।

डीएम की सख्त निगरानी: "गुणवत्ता में कोताही बर्दाश्त नहीं"

हाल ही में भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने तटबंध का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने स्पर संख्या 7 से लेकर स्पर संख्या 9 तक चल रहे कार्यों का बारीकी से जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को सख्त लहजे में हिदायत दी है कि कार्य की गुणवत्ता में यदि कोई अनियमितता पाई गई, तो संवेदक (ठेकेदार) से लेकर विभागीय अधिकारियों तक पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि पिछली बार की गलतियों को दोहराने की अनुमति किसी को नहीं है। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि मानसून के दौरान संभावित बाढ़ के दबाव को देखते हुए सभी कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप ही पूर्ण किए जाएं।

पिछली आपदा से सबक और मौजूदा स्थिति

पिछले वर्ष (2024) में बिंदटोली तटबंध का एक हिस्सा गंगा के तीव्र कटाव के कारण बह गया था, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया था और सैकड़ों लोग विस्थापित हुए थे। उस समय हुई क्षति से सबक लेते हुए, इस बार विभाग ने 'बोल्डर क्रेटिंग' और 'जियो-बैग्स' का उपयोग सुरक्षा कवच के रूप में किया है। 100 करोड़ रुपये की इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य न केवल तटबंध को बचाना है, बल्कि गोपालपुर और इस्माईलपुर प्रखंड के दर्जनों गांवों को सुरक्षित करना भी है।

मानसून और चुनौतियां

वर्तमान में गंगा का जलस्तर निगरानी में है। अभियंताओं की टीम चौबीसों घंटे तटबंध की निगरानी कर रही है। विभाग के कार्यपालक अभियंता ई. गौतम कुमार ने बताया कि कार्य की निरंतर मॉनिटरिंग हो रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए रेत की बोरियों और अन्य बाढ़-रोधी सामग्री का पर्याप्त स्टॉक तैयार रखा गया है।

स्थानीय लोगों में उम्मीद और संशय

तटबंध के किनारे रहने वाले ग्रामीण इस निर्माण कार्य को आशा की नजर से देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि "हर साल बाढ़ का डर हमें बेघर कर देता है। इस बार सरकार ने भारी बजट खर्च किया है, उम्मीद है कि यह सुरक्षा कवच हमें इस बार सुरक्षित रखेगा।" हालांकि, पिछली बार के अनुभवों के कारण लोगों में अभी भी एक अनजाना डर है, जिसे केवल तटबंध की मजबूती ही मिटा सकती है।

 इस्माईलपुर-गोपालपुर बिंदटोली तटबंध पर हो रहे ये कार्य भागलपुर की बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। 100 करोड़ की यह बड़ी परियोजना आने वाले महीनों में मानसून के दबाव को झेलने के लिए कितनी तैयार है, यह आने वाला समय ही बताएगा। प्रशासन का दावा है कि इस बार 'सुरक्षा का महाकवच' पहले से कहीं अधिक मजबूत और तकनीक-प्रधान है।