एक दिन में 14 वार्डों में गूँजी आमजन की आवाज, रिकॉर्ड 195 समस्याओं का हुआ पंजीकरण

भागलपुर: आम नागरिकों और नगर निगम प्रशासन के बीच की दूरी को मिटाने के उद्देश्य से भागलपुर नगर निगम ने इस माह के पहले मंगलवार को एक विशेष पहल की शुरुआत की। शहर के 14 अलग-अलग वार्डों में एक साथ 'सहयोग शिविर' (Help Camp) का आयोजन किया गया। इस अनूठे कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल समस्याओं का त्वरित समाधान करना था, बल्कि शासन को सीधे आम लोगों के द्वार तक पहुँचाना था। मेयर डॉ. बसुंधरा लाल के नेतृत्व में चलाए गए इस महा-अभियान में न केवल बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए, बल्कि उन्हें उसी दिन आधी रात तक ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर एक नई कार्य-संस्कृति की मिसाल भी पेश की गई।

14 वार्ड, एक लक्ष्य: समस्याओं का त्वरित निपटान

भागलपुर नगर निगम के इस शिविर का मुख्य फोकस उन क्षेत्रों पर था जहां से विकास कार्यों के प्रति लगातार शिकायतें आ रही थीं। शहर के 14 वार्डों में लगाए गए इन शिविरों में सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं। स्थानीय लोग अपनी समस्याओं, जैसे—जलापूर्ति की समस्या, स्ट्रीट लाइट का न जलना, नालियों की सफाई, और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लंबित मामलों को लेकर पहुंचे थे।

मेयर डॉ. बसुंधरा लाल ने स्वयं कई वार्डों का दौरा किया और जनता की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आवेदन प्राप्त होने के बाद उन्हें केवल फाइलों में बंद नहीं करना है, बल्कि एक निश्चित समय सीमा के भीतर उनका समाधान भी सुनिश्चित करना है।

तकनीक और पारदर्शिता: आधी रात तक चला काम

इस शिविर की सबसे बड़ी सफलता इसकी कार्यकुशलता रही। दिन भर प्राप्त आवेदनों की संख्या 195 तक पहुँच गई थी। आमतौर पर सरकारी तंत्र में आवेदनों की एंट्री में हफ्तों का समय लग जाता है, लेकिन इस बार निगम प्रशासन ने एक मिसाल कायम की। मेयर की देखरेख में, आईटी सेल की टीम ने रात भर जागकर इन सभी 195 आवेदनों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया।

इस त्वरित प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब हर आवेदक को एक 'ट्रैकिंग आईडी' (Tracking ID) मिल सकेगी, जिससे वे अपने काम की स्थिति खुद देख सकेंगे। यह कदम नगर निगम के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है।

मेयर का विजन: 'निगम आपके द्वार'

मेयर डॉ. बसुंधरा लाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "हमारा उद्देश्य केवल समस्याओं को सुनना नहीं, बल्कि उनका निस्तारण करना है। 'सहयोग शिविर' के माध्यम से हम शहर के हर नागरिक तक पहुंचना चाहते हैं। जब तक हमारे वार्ड के आखिरी व्यक्ति की समस्या का समाधान नहीं हो जाता, तब तक निगम की ये कोशिशें जारी रहेंगी।"

नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इन शिविरों का डेटा अब उनके लिए एक 'रोडमैप' की तरह है। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलेगी कि शहर के किन वार्डों में संसाधनों की सबसे अधिक आवश्यकता है और कहां बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने की जरूरत है।

समस्याओं का वर्गीकरण और समाधान की रणनीति

प्राप्त 195 आवेदनों को श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

जलापूर्ति और स्वच्छता: सबसे अधिक आवेदन इन्हीं दो श्रेणियों से प्राप्त हुए हैं। कई वार्डों में पुरानी पाइपलाइन और बोरिंग की खराबी एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई है।

स्ट्रीट लाइट और बिजली: कई गलियों में अंधेरे की समस्या को देखते हुए संबंधित विभाग को तत्काल सर्वे करने का निर्देश दिया गया है।

प्रमाण पत्र और रिकॉर्ड: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेजों में सुधार के लिए आए आवेदनों को संबंधित शाखाओं में प्राथमिकता के आधार पर भेजा गया है।

जनता में उत्साह और भविष्य की उम्मीदें

शहर के वार्डों में हुए इस आयोजन ने लोगों के बीच एक सकारात्मक विश्वास जगाया है। वार्ड नंबर 9 के एक स्थानीय निवासी ने कहा, "पहले छोटे से काम के लिए भी निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन आज अधिकारी खुद हमारे पास आए हैं। यह एक बहुत बड़ा बदलाव है।"

हालांकि, चुनौती अब इन समस्याओं को समय पर हल करने की है। नागरिक इस बात पर भी नजर बनाए हुए हैं कि जो वादे शिविर में किए गए हैं, उनका पालन कितनी सख्ती से होता है।

इस शिविर के अनुभव से नगर निगम प्रशासन ने यह सीखा है कि यदि फील्ड लेवल पर काम किया जाए, तो शिकायतों की संख्या और प्रकृति का सही आकलन किया जा सकता है। नगर निगम अब इस तरह के शिविरों को नियमित अंतराल पर आयोजित करने की योजना बना रहा है। आने वाले समय में, यह 'जन-सहयोग' का मॉडल अन्य नगर पालिकाओं के लिए भी एक मार्गदर्शक बन सकता है।

भागलपुर नगर निगम का यह 'सहयोग शिविर' केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। जिस तरह से मेयर और अधिकारियों ने जनता की समस्याओं को सुना और रात भर काम करके उन्हें सिस्टम में दर्ज किया, वह प्रशासनिक सक्रियता का प्रमाण है। यदि यह गति बरकरार रही, तो भागलपुर की तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगी।