नगर निगम कार्यालय में हंगामा, पार्षद रंजीत मंडल पर सरकारी कर्मी से बदसलूकी और जान से मारने की धमकी का आरोप

भागलपुर: नगर निगम कार्यालय में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक वार्ड पार्षद द्वारा सरकारी कर्मी के साथ बदसलूकी और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया। पीड़ित कर्मी प्रीतम कुमार ने जोगसर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें पार्षद रंजीत मंडल पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस घटना के बाद से नगर निगम के कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित प्रीतम कुमार नगर निगम कार्यालय में अपने पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि वार्ड पार्षद रंजीत मंडल किसी कार्य को लेकर कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान किसी विषय को लेकर पार्षद और प्रीतम कुमार के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस ने उग्र रूप ले लिया।

शिकायत के अनुसार, पार्षद ने न केवल अपशब्दों का प्रयोग किया, बल्कि सरकारी कर्मी के साथ धक्का-मुक्की भी की। पीड़ित ने अपनी प्राथमिकी में उल्लेख किया है कि पार्षद ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और कार्यालय के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। कर्मचारी का कहना है कि वे अपने सरकारी कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे, तभी यह अप्रत्याशित घटना घटी।

'सरकारी कार्य में बाधा' का आरोप

नगर निगम कर्मचारी संघ ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। संघ के सदस्यों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का व्यवहार कर्मचारियों के प्रति संयमित होना चाहिए। कर्मचारी ने अपनी शिकायत में 'सरकारी कार्य में बाधा डालने' और 'लोक सेवक को धमकाने' जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। प्रीतम कुमार ने सुरक्षा की दृष्टि से जिला प्रशासन से भी गुहार लगाई है ताकि वे बिना किसी भय के अपने दायित्वों का पालन कर सकें।

पुलिस की कार्रवाई

जोगसर थाने की पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली है। थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़ित द्वारा दिए गए आवेदन के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस कार्यालय में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगालेगी ताकि घटना की वास्तविकता स्पष्ट हो सके। हालांकि, आरोपी पार्षद की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

निगम में बढ़ा तनाव

इस घटना के बाद नगर निगम कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी पार्षद के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सामूहिक विरोध-प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। कार्यालय परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग भी जोर पकड़ रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

फिलहाल, इस पूरे मामले ने भागलपुर के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। एक जनप्रतिनिधि और एक सरकारी कर्मी के बीच का यह विवाद अब जांच का विषय बन चुका है और सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाती है।