बेकाबू ट्रैक्टर ने अधिवक्ता दंपति को रौंदा, पत्नी की दर्दनाक मौत, आक्रोशित वकीलों ने किया चक्काजाम
मुजफ्फरपुर जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर शनिवार (27 जून 2026) को एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। एक तेज रफ्तार और गिट्टी/बालू से ओवरलोडेड बेकाबू ट्रैक्टर ने बाइक से जा रहे स्थानीय कोर्ट के एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता और उनकी पत्नी को पीछे से जोरदार टक्कर मारते हुए कुचल दिया।
इस भयावह दुर्घटना में अधिवक्ता की पत्नी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि अधिवक्ता स्वयं गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं। वे वर्तमान में अस्पताल के आईसीयू (ICU) में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। हमेशा की तरह, हादसे को अंजाम देने के बाद आरोपी ट्रैक्टर चालक वाहन सहित मौके से भागने में सफल रहा, जिसने स्थानीय पुलिस की गश्त और मुस्तैदी पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
शनिवार दोपहर की घटना: कैसे काल बनकर आया ट्रैक्टर?
चश्मदीदों और पुलिस से मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरपुर व्यवहार न्यायालय (District Court) के वरिष्ठ अधिवक्ता शनिवार की दोपहर अदालत का काम निपटाने के बाद अपनी पत्नी को साथ लेकर बाइक से किसी निजी काम के सिलसिले में निकले थे।
दंपति जैसे ही एक व्यस्त चौराहे के पास पहुंचे, तभी पीछे से बेहद लापरवाही और तेज रफ्तार से आ रहे एक बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर ने उनकी बाइक में सीधी टक्कर मार दी।
टक्कर का प्रभाव: टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक का संतुलन बिगड़ गया और अधिवक्ता सड़क के बाईं ओर गिरे, जबकि उनकी पत्नी सीधे ट्रैक्टर के भारी-भरकम पिछले पहिए की चपेट में आ गईं।
मौके पर मौत: ट्रैक्टर का पहिया महिला के सिर और छाती को कुचलता हुआ निकल गया। अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों के कारण उन्होंने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
अधिवक्ता की स्थिति: हादसे में अधिवक्ता के दाहिने पैर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर आया है। उन्हें स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत शहर के निजी नर्सिंग होम और बाद में श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) में भर्ती कराया गया।
चालक की फरारी और 'ट्रैक्टर माफिया' पर उठते सवाल
हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के दुकानदारों और राहगीरों ने ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की, लेकिन दुस्साहसी चालक ने गाड़ी रोकने के बजाय उसकी रफ्तार और बढ़ा दी और सड़क पर मौजूद लोगों को डराते हुए वहां से तेजी से भाग निकला।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में 'ट्रैक्टर और बालू माफिया' का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि ये चालक आबादी वाले क्षेत्रों में भी 70 से 80 किमी/घंटे की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ाते हैं। अधिकांश ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट नहीं होती या जानबूझकर उन पर मिट्टी पोत दी जाती है, ताकि दुर्घटना के बाद उनकी पहचान न हो सके। शनिवार को भी इसी चालाकी के कारण पुलिस तत्काल उस ट्रैक्टर को ट्रेस नहीं कर पाई।
वकीलों का फूटा गुस्सा: कोर्ट का काम ठप, सड़क पर टायर जलाकर प्रदर्शन
जैसे ही इस वीभत्स घटना की खबर मुजफ्फरपुर बार एसोसिएशन (Bar Association) और सिविल कोर्ट के वकीलों तक पहुंची, पूरे कानूनी महकमे में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में अधिवक्ता कोर्ट परिसर से बाहर निकल आए और अस्पताल पहुंचे।
इसके बाद, नाराज वकीलों और मृतक के परिजनों ने मुजफ्फरपुर के व्यस्ततम मार्ग को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया।
चक्काजाम: वकीलों ने बीच सड़क पर टायर जलाकर यातायात को पूरी तरह ठप कर दिया। इसके कारण शहर के मुख्य बाईपास और कचहरी रोड पर गाड़ियों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं।
नारेबाजी: प्रदर्शनकारी वकील "पुलिस प्रशासन हाय-हाय" और "ट्रैक्टर माफिया पर नकेल कसो" के नारे लगा रहे थे। वकीलों का गुस्सा इस बात को लेकर भी था कि शहर के नो-एंट्री जोन में दिन के समय ऐसे भारी और अवैध ट्रैक्टर कैसे प्रवेश कर रहे हैं।
पुलिस की थ्योरी: सीसीटीवी फुटेज खंगालने का दावा
हंगामे और चक्काजाम की सूचना मिलते ही नगर डीएसपी (Town DSP) और स्थानीय थाने की पुलिस भारी दलबल और दंगा नियंत्रण वाहनों के साथ मौके पर पहुंची। आक्रोशित वकीलों को शांत करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी।
| दुर्घटना का दिन | मृतका का परिचय | घायल का परिचय | आरोपी वाहन |
|---|---|---|---|
| शनिवार (27 जून) | अधिवक्ता की पत्नी | मुजफ्फरपुर कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता | बेकाबू, ओवरलोडेड ट्रैक्टर |
पुलिस अधिकारियों ने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से वार्ता की और उन्हें आश्वस्त किया कि:
विशेष टीम का गठन: ट्रैक्टर और उसके फरार चालक की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम का गठन कर दिया गया है।
CCTV ट्रैकिंग: दुर्घटना स्थल की ओर आने-जाने वाले सभी रास्तों पर लगे सरकारी और निजी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि ट्रैक्टर के चेसिस नंबर या उसकी पहचान की जा सके।
मुआवजा प्रक्रिया: मृतका के परिजनों को आपदा कोष और सड़क दुर्घटना क्लेम के तहत त्वरित सरकारी सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रशासन के इस कड़े रुख और लिखित आश्वासन के बाद करीब तीन घंटे बाद वकीलों ने सड़क से जाम हटाया, जिसके बाद पुलिस ने शव को सुरक्षित कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
मुजफ्फरपुर की सड़कों पर बढ़ता खतरा: 'सड़क सुरक्षा' सिर्फ कागजों पर?
इस दुखद घटना ने एक बार फिर मुजफ्फरपुर जिला परिवहन विभाग (DTO) और ट्रैफिक पुलिस के दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि जब तक अनियंत्रित और अवैध रूप से चलने वाले कमर्शियल वाहनों पर ऑन-स्पॉट सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे निर्दोष लोग काल के गाल में समाते रहेंगे।
मुख्य प्रशासनिक खामियां जिन पर ध्यान देना जरूरी है:
नो-एंट्री का उल्लंघन: भारी वाहनों के लिए तय समय सीमा के बावजूद शहर के भीतर ट्रैक्टरों और ट्रकों का अवैध परिचालन धड़ल्ले से जारी है।
लाइसेंस की कमी: ग्रामीण इलाकों से ट्रैक्टर चलाने वाले अधिकांश चालकों के पास न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस होता है और न ही वे यातायात नियमों से वाकिफ होते हैं।
फर्स्ट एड की विफलता: दुर्घटना के बाद एक्सप्रेस-वे या मुख्य सड़कों पर त्वरित चिकित्सा सहायता (Trauma Care) न मिलने से भी मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है।
एक कानूनविद जो रोज अदालतों में दूसरों को न्याय दिलाते थे, आज खुद और उनका परिवार व्यवस्था की नाकामी का शिकार होकर न्याय की भीख मांग रहा है। मुजफ्फरपुर बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर हत्यारे ट्रैक्टर चालक को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात ट्रैक्टर चालक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (सड़क दुर्घटना) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है।