बिहार के स्टेट हाईवे पर नवंबर से शुरू होगा टोल संग्रह, एआई आधारित ANPR कैमरों से होगी कमर्शियल वाहनों की पहचान

पटना। बिहार में सड़क परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में पथ निर्माण विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने राज्य उच्च पथ (स्टेट हाईवे) पर टोल संग्रह की तैयारी तेज कर दी है। विभागीय योजना के अनुसार नवंबर से राज्य के चयनित स्टेट हाईवे पर टोल वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की थी कि राज्य उच्च पथों पर केवल व्यावसायिक (कमर्शियल) वाहनों से ही टोल टैक्स लिया जाएगा, जबकि निजी वाहनों को इससे छूट मिलेगी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद अब टोल प्लाजा पर अत्याधुनिक ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक से लैस कैमरे लगाए जाएंगे, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से वाहन की पहचान करेंगे।

एआई तकनीक से होगी वाहनों की पहचान

पथ निर्माण विभाग के अनुसार, नई व्यवस्था में टोल प्लाजा पर लगाए जाने वाले AI-आधारित ANPR कैमरे प्रत्येक वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे। कैमरा केवल नंबर की तस्वीर ही नहीं लेगा, बल्कि अपने डेटाबेस के माध्यम से यह भी बताएगा कि संबंधित वाहन निजी (Private) है या व्यावसायिक (Commercial)।

इस तकनीक से टोल कर्मचारियों को वाहन की श्रेणी की पहचान करने में किसी प्रकार की मैनुअल जांच की आवश्यकता नहीं होगी। पूरी प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो जाएगी, जिससे टोल प्लाजा पर वाहनों की आवाजाही भी तेज होगी।

निजी वाहनों को मिलेगी राहत

मुख्यमंत्री द्वारा पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि राज्य उच्च पथों पर टोल टैक्स केवल कमर्शियल वाहनों से लिया जाएगा। निजी कार, निजी एसयूवी और अन्य गैर-व्यावसायिक वाहन इस टोल से मुक्त रहेंगे।

सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा, जबकि सड़कों के रखरखाव और विकास के लिए आवश्यक राजस्व भी प्राप्त होगा।

नवंबर से शुरू होगी नई व्यवस्था

पथ निर्माण विभाग ने नवंबर से टोल संग्रह शुरू करने की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। इसके लिए चयनित टोल प्लाजा पर आवश्यक तकनीकी उपकरण और डिजिटल सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से पहले सभी टोल कर्मियों को ANPR तकनीक और डिजिटल संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

क्या है ANPR तकनीक?

Automatic Number Plate Recognition (ANPR) एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर वाहन की नंबर प्लेट को पढ़ा जाता है।

यह तकनीक वाहन का पंजीकरण नंबर पहचानकर उसे परिवहन विभाग के रिकॉर्ड से मिलाती है और वाहन की श्रेणी, पंजीकरण विवरण तथा अन्य आवश्यक जानकारी तुरंत उपलब्ध करा देती है।

आज दुनिया के कई देशों और भारत के अनेक शहरों में यह तकनीक ट्रैफिक प्रबंधन, सुरक्षा निगरानी और टोल संग्रह के लिए सफलतापूर्वक उपयोग की जा रही है।

फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक

वर्तमान व्यवस्था में आमतौर पर पीले नंबर प्लेट वाले वाहनों को व्यावसायिक वाहन माना जाता है, जबकि सफेद नंबर प्लेट निजी वाहनों की पहचान होती है।

हालांकि कई मामलों में कमर्शियल वाहन संचालक कथित रूप से नियमों से बचने के लिए अपनी गाड़ियों पर सफेद नंबर प्लेट लगाकर निजी वाहन का रूप दे देते हैं। इससे टोल वसूली और नियमों के पालन में कठिनाई आती है।

नई ANPR तकनीक लागू होने के बाद केवल नंबर प्लेट के रंग पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी। कैमरा सीधे परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर वाहन की वास्तविक श्रेणी की पुष्टि करेगा। इससे इस प्रकार की गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

टोल संग्रह होगा अधिक पारदर्शी

विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित प्रणाली लागू होने से टोल संग्रह अधिक पारदर्शी और सटीक बनेगा। मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी और सभी वाहनों की पहचान एक समान तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से होगी।

डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में डेटा उपलब्ध रहेगा और जांच करना भी आसान होगा।

सड़क विकास को मिलेगा नया आधार

पथ निर्माण विभाग का कहना है कि टोल से प्राप्त राजस्व का उपयोग राज्य उच्च पथों के रखरखाव, मरम्मत, चौड़ीकरण और नई परियोजनाओं के विकास में किया जाएगा।

बेहतर सड़कों से न केवल यात्रा सुरक्षित और सुविधाजनक होगी, बल्कि राज्य में व्यापार, उद्योग और परिवहन क्षेत्र को भी गति मिलेगी।

डिजिटल और स्मार्ट परिवहन व्यवस्था की ओर कदम

राज्य सरकार परिवहन और सड़क प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दे रही है। ANPR कैमरों की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

भविष्य में इस तकनीक को ट्रैफिक मॉनिटरिंग, ई-चालान, सुरक्षा निगरानी और अन्य स्मार्ट परिवहन सेवाओं के साथ भी जोड़ा जा सकता है।

लोगों को मिलेगी तेज और सुविधाजनक सेवा

नई प्रणाली लागू होने के बाद टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें कम होने की उम्मीद है। वाहन की पहचान स्वतः होने से टोल प्रक्रिया तेज होगी और यात्रियों का समय बचेगा।

कमर्शियल वाहन चालकों के लिए भी डिजिटल प्रणाली अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक होगी।

बिहार सरकार द्वारा नवंबर से राज्य उच्च पथों पर केवल व्यावसायिक वाहनों से टोल संग्रह शुरू करने की तैयारी राज्य की परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। AI आधारित ANPR कैमरों के जरिए वाहन की वास्तविक श्रेणी की पहचान कर टोल वसूली की जाएगी, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

सरकार का उद्देश्य निजी वाहन मालिकों को राहत देते हुए व्यावसायिक वाहनों से प्राप्त राजस्व के माध्यम से सड़क अवसंरचना को और मजबूत बनाना है। यदि यह व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू होती है, तो बिहार के स्टेट हाईवे पर टोल प्रबंधन अधिक आधुनिक, तेज और तकनीक आधारित हो जाएगा।