मुजफ्फरपुर के अखाड़ाघाट पंप हाउस में बड़ी तकनीकी खराबी: मोटर खराब होने से 20 हजार की आबादी पिछले तीन दिनों से पानी के लिए तरस रही, जल कार्य शाखा की टीम मरम्मत में जुटी; सोमवार दोपहर तक जलापूर्ति बहाल होने की उम्मीद
बिहार के मुजफ्फरपुर शहर के अखाड़ाघाट इलाके में पेयजल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। अखाड़ाघाट पंप हाउस के मुख्य मोटर में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण पिछले तीन दिनों से करीब 20,000 की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। भीषण गर्मी और उमस के बीच जलापूर्ति पूरी तरह ठप रहने से स्थानीय लोगों में नगर निगम प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है। हालांकि, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम की जल कार्य शाखा (Water Works Branch) की तकनीकी टीमें दिन-रात युद्धस्तर पर मोटर की मरम्मत में जुटी हुई हैं। विभाग के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि सोमवार दोपहर तक हर हाल में जलापूर्ति सामान्य कर दी जाएगी। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट के माध्यम से जानते हैं इस जल संकट के कारणों, स्थानीय लोगों की परेशानियों और निगम द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में।
अखाड़ाघाट पंप हाउस का मोटर खराब होने से गहराया जल संकट
मुजफ्फरपुर नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अखाड़ाघाट क्षेत्र में पानी की आपूर्ति करने वाला मुख्य पंप हाउस अचानक तकनीकी खराबी की चपेट में आ गया।
तीन दिनों से जलापूर्ति ठप: पंप हाउस के मुख्य मोटर में आई अंदरूनी गड़बड़ी और जलने या तकनीकी फॉल्ट के कारण पिछले 72 घंटों से पानी का एक बूंद भी घरों तक नहीं पहुंच पाया है।
20 हजार की आबादी प्रभावित: इस पंप हाउस से जुड़े दर्जनों मोहल्लों और कॉलोनियों के करीब 20,000 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। सुबह और शाम के वक्त पानी के लिए नल खोलने पर जब एक भी बूंद पानी नहीं टपका, तब लोगों को संकट की इस विकट स्थिति का अहसास हुआ।
भीषण गर्मी और पानी के लिए त्राहिमाम करती जनता
वर्तमान मौसम में जब तापमान और उमस अपने चरम पर है, ऐसे में लगातार तीन दिनों तक पानी की सप्लाई बंद रहने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
दैनिक कार्य हुए प्रभावित: पीने के पानी से लेकर खाना बनाने, कपड़े धोने और दैनिकचर्या के अन्य जरूरी कामों के लिए लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। स्थानीय निवासियों को दूर-दराज के निजी चापाकलों या सबमर्सिबल पंपों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
महिलाओं और बच्चों की परेशानी: सबसे ज्यादा मुसीबत महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था (जैसे टैंकर के जरिए पानी भेजना) नहीं की जाती, तो स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है।
जल कार्य शाखा की टीमें युद्धस्तर पर मरम्मत में जुटीं
स्थानीय नागरिकों के भारी विरोध और हंगामे की सूचना मिलने के बाद नगर निगम के अधिकारी हरकत में आए।
विशेष तकनीकी टीम का गठन: मुजफ्फरपुर नगर निगम की जल कार्य शाखा के प्रभारी और वरिष्ठ अभियंताओं ने तुरंत मैकेनिकों की एक विशेष टीम को अखाड़ाघाट पंप हाउस रवाना किया।
रात-दिन चल रहा काम: मोटर को ठीक करने या उसके जले हुए पार्ट्स को बदलने का काम युद्धस्तर पर जारी है। इंजीनियरों का कहना है कि खराबी काफी अंदरूनी थी, जिसके कारण उसे ठीक करने में समय लग रहा है, लेकिन कर्मचारियों की फौज लगातार काम में जुटी हुई है।
सोमवार दोपहर तक जलापूर्ति बहाल होने का आश्वासन
निगम अधिकारियों ने पीड़ित क्षेत्र के लोगों को ढांढस बंधाते हुए जल्द से जल्द राहत मिलने की बात कही है।
अधिकारियों का बयान: जल कार्य शाखा के अधिकारियों ने बताया कि मरम्मत का अधिकांश कार्य पूरा किया जा चुका है और मोटर के ट्रायल की प्रक्रिया चल रही है।
सोमवार दोपहर का अल्टीमेटम: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सब कुछ ठीक रहा, तो सोमवार दोपहर तक मोटर को पूरी क्षमता के साथ चालू कर दिया जाएगा और प्रभावित इलाकों में सामान्य रूप से पानी की आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
मुजफ्फरपुर के अखाड़ाघाट पंप हाउस की खराबी और तीन दिनों से पानी के लिए तरसती 20,000 की आबादी की यह घटना नगरीय व्यवस्था की पोल खोलती है। हालांकि, जल कार्य शाखा द्वारा युद्धस्तर पर की जा रही मरम्मत और सोमवार दोपहर तक जलापूर्ति बहाल होने के आश्वासन से लोगों को राहत की उम्मीद बंधी है, लेकिन भविष्य में इस तरह की तकनीकी गड़बड़ी से बचने के लिए मेंटेनेंस व्यवस्था को और दुरुस्त करने की सख्त जरूरत है।