स्मार्ट सिटी' का सपना अधूरा; योजना बंद होने के छह महीने बाद भी भैरवा तालाब का सौंदर्यीकरण अधर में
भागलपुर: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'स्मार्ट सिटी मिशन' परियोजना, जो कभी भागलपुर की सूरत बदलने का बड़ा दावा करती थी, अब शहर के लिए केवल फाइलों में सिमट कर रह गई है। दिसंबर 2025 में इस योजना के आधिकारिक रूप से बंद होने के छह महीने बीत जाने के बाद भी शहर की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। इनमें से सबसे प्रमुख है—भैरवा तालाब का सौंदर्यीकरण, जो आज भी प्रशासनिक उपेक्षा की कहानी बयां कर रहा है।
क्या है वर्तमान स्थिति?
भैरवा तालाब के कायाकल्प के लिए करोड़ों रुपये आवंटित किए गए थे। योजना का उद्देश्य तालाब के चारों ओर पक्का घाट, वॉकिंग ट्रैक, बैठने के लिए बेंच, लाइटिंग और सौंदर्यीकरण करना था। लेकिन, दिसंबर 2025 में स्मार्ट सिटी मिशन की समय-सीमा समाप्त होने के बाद से ही यहां काम पूरी तरह ठप पड़ा है। वर्तमान में स्थिति यह है कि आधा-अधूरा निर्माण कार्य अब धीरे-धीरे बर्बाद हो रहा है। निर्माण सामग्री का मलबा तालाब के किनारे ही पड़ा है, जिससे न केवल स्थानीय निवासियों को आवागमन में परेशानी हो रही है, बल्कि यह तालाब की सुंदरता को भी धूमिल कर रहा है।
अधूरे कार्यों की लंबी सूची
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदारों ने आधा काम छोड़कर किनारा कर लिया है। तालाब के चारों ओर जो बाउंड्री या ट्रैक बनाने का काम शुरू हुआ था, वह आज भी अधूरा है। बारिश का मौसम आने वाला है, और ऐसे में अधूरा निर्माण कार्य जल-जमाव का कारण बन सकता है, जिससे आस-पास की बस्तियों में जलभराव की समस्या उत्पन्न होने का डर है।
प्रशासन की चुप्पी और जवाबदेही पर सवाल
योजना बंद होने के बाद अब यह स्पष्ट नहीं है कि बची हुई परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी किसकी है। स्मार्ट सिटी के अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले को लेकर उच्च स्तरीय समन्वय कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई हलचल दिखाई नहीं दे रही है। नगर निगम और स्मार्ट सिटी सेल के बीच 'जिम्मेदारी किसकी?' का खेल चल रहा है, जिसका खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों में आक्रोश
इलाके के निवासी बेहद आक्रोशित हैं। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, "हमने सोचा था कि भैरवा तालाब शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनेगा, लेकिन अब यह केवल कचरा डंपिंग या असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन नतीजा शून्य है।"
लोगों की मांग है कि या तो बची हुई राशि से इस काम को तुरंत पूरा किया जाए या इसे किसी अन्य सरकारी योजना के तहत जल्द से जल्द पूर्ण किया जाए, ताकि जनता का पैसा पूरी तरह से बर्बाद न हो।
अगला कदम क्या?
स्मार्ट सिटी मिशन के बंद होने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि राज्य सरकार या जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करे। जानकारों का कहना है कि यदि इन अधूरी परियोजनाओं को समय रहते पूरा नहीं किया गया, तो सरकार द्वारा लगाए गए करोड़ों रुपये पूरी तरह डूब जाएंगे और तालाब की स्थिति पहले से भी बदतर हो जाएगी।
फिलहाल, भागलपुर के नागरिक इस सवाल के जवाब का इंतजार कर रहे हैं कि आखिर कब तक भैरवा तालाब का सौंदर्यीकरण का काम पूरा होगा और कब शहर को एक व्यवस्थित और स्वच्छ सार्वजनिक स्थान मिल पाएगा।