भरत तिवारी एनकाउंटर केस: मां ने उठाए सवाल, गिरफ्तारी न होने पर जंतर-मंतर कूच की चेतावनी

 बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित 'भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर' मामले ने अब एक बड़ा मोड़ ले लिया है। भरत की तेरहवीं (तेरवहीं) के समापन के बाद, उनके परिवार और समर्थकों ने न्याय की मांग को और तेज कर दिया है। पीड़ित मां आशा देवी ने सीधे तौर पर प्रशासन को चुनौती दी है और सवाल उठाया है कि इतने सबूतों के बावजूद अभी तक उन पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई, जिन्होंने इस पूरी घटना को अंजाम दिया।

न्याय के लिए आर-पार की लड़ाई

तेरहवीं के बाद आयोजित सभा में भरत की मां ने भारी मन से प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि निचले स्तर के पुलिसकर्मियों को निलंबित करना केवल 'आई वॉश' है, जबकि असली दोषी अधिकारी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। परिवार का साफ कहना है कि जब तक एनकाउंटर का आदेश देने वाले और उसे संचालित करने वाले मुख्य अधिकारियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे।

"मेरा बेटा कोई अपराधी नहीं था, उसकी सुनियोजित तरीके से हत्या की गई है। आखिर वे अधिकारी गिरफ्तार क्यों नहीं हो रहे जिन्होंने मेरे बेटे को मारने का आदेश दिया था?" — आशा देवी, मृतक की मां।

क्या था मामला: फेसबुक लाइव और पुलिस का दावा

17 जून 2026 को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के पास भरत भूषण तिवारी (28) की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। पुलिस का दावा था कि यह 'आत्मरक्षा' में की गई कार्रवाई थी, लेकिन एक फेसबुक लाइव वीडियो ने पूरे मामले की हवा निकाल दी। वीडियो में साफ दिख रहा था कि भरत ने हथियार छोड़ दिए थे और वह आत्मसमर्पण करने की मुद्रा में थे, फिर भी उन पर गोलियां चलाई गईं। इस वीडियो ने एनकाउंटर को एक 'फेक एनकाउंटर' के दायरे में खड़ा कर दिया है।

कानूनी स्थिति: सुप्रीम कोर्ट से पटना हाईकोर्ट तक

इस मामले में कानूनी लड़ाई भी जारी है:

सुप्रीम कोर्ट का रुख: 30 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका (अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसे पटना हाईकोर्ट में उठाने का निर्देश दिया। कोर्ट का मानना है कि राज्य स्तर पर इस मामले की प्रभावी निगरानी की जा सकती है।

न्यायिक आयोग का गठन: जन आक्रोश को देखते हुए बिहार सरकार ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का गठन किया है, जो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगा।

अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर होगा प्रदर्शन

स्थानीय स्तर पर न्याय मिलने में देरी और अधिकारियों की गिरफ्तारी न होने से आहत परिवार ने अब आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का फैसला किया है।

दिल्ली कूच: परिवार ने घोषणा की है कि यदि जल्द ही दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे न्याय की गुहार लगाने दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेंगे।

जनसमर्थन: इस मुहिम में मानवाधिकार कार्यकर्ता, स्थानीय समाजसेवियों और कई अन्य संगठनों ने परिवार का साथ देने का संकल्प लिया है।

परिवार की तीन प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने अपनी तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं:

अधिकारियों की गिरफ्तारी: एनकाउंटर ऑपरेशन को कमांड करने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की तुरंत गिरफ्तारी हो।

सीबीआई जांच: स्थानीय पुलिस या राज्य आयोग के बजाय इस पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) से कराई जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।

हत्या का मुकदमा: शामिल पुलिसकर्मियों पर केवल प्रशासनिक निलंबन नहीं, बल्कि हत्या की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई हो।

बिहार पुलिस के लिए अग्निपरीक्षा

भरत तिवारी का यह मामला अब बिहार पुलिस की साख और उसकी जवाबदेही की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है। जिस तरह से जनता का विश्वास पुलिस से डगमगाया है, उसे देखते हुए न्यायिक आयोग की रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति के न्याय का नहीं, बल्कि 'कानून के शासन' को बचाने का है।

भरत तिवारी के परिवार का दर्द अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। जैसे-जैसे यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहा है, प्रशासन पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है। अब सबकी निगाहें पटना हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर हैं कि क्या अदालत इस मामले में प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए बाध्य करेगी।