मौत का 'डेथ ट्रैप' बना सिमरी तेलिया पोखर चौक: दरभंगा-मुजफ्फरपुर NH-27 पर थम नहीं रहा हादसों का सिलसिला
दरभंगा: दरभंगा-मुजफ्फरपुर को जोड़ने वाली जीवन रेखा कही जाने वाली राष्ट्रीय उच्च पथ (NH-27) पर स्थित 'सिमरी तेलिया पोखर चौक' अब यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए एक 'डेथ ट्रैप' (मौत का जाल) बन चुका है। यह चौक पिछले कुछ समय से जिस तरह से सड़क हादसों का केंद्र बनता जा रहा है, उसने प्रशासन और आम जनता की नींद उड़ा दी है। आंकड़ों के अनुसार, इस स्थान पर अब तक एक दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और दो दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल होकर दिव्यांगता या आजीवन कष्ट झेलने को मजबूर हैं।
हादसों का काला अध्याय: क्यों असुरक्षित है यह चौक?
सिमरी तेलिया पोखर चौक पर होने वाली दुर्घटनाओं के पीछे कई तकनीकी और मानवीय कारण हैं, जिन्हें अब तक अनदेखा किया जा रहा है।
अंधा मोड़ और कम दृश्यता: इस चौक की बनावट ऐसी है कि मुख्य सड़क से आने वाले तेज रफ्तार वाहनों को अचानक मुड़ने वाली गाड़ियों का पता नहीं चल पाता।
अतिक्रमण: चौक के आसपास अवैध दुकानों और सड़क किनारे अतिक्रमण के कारण वाहनों के गुजरने के लिए जगह बहुत कम बचती है।
यातायात संकेतों का अभाव: यहां न तो कोई 'स्पीड ब्रेकर' है और न ही पर्याप्त चेतावनी बोर्ड। रात के समय रोशनी (स्ट्रीट लाइट) की कमी हादसों को और खतरनाक बना देती है।
वाहनों की अनियंत्रित गति: राष्ट्रीय राजमार्ग होने के कारण भारी वाहन यहाँ बहुत तेज गति से गुजरते हैं, जिससे स्थानीय आबादी और छोटे वाहनों को पार करने में जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
एक दर्दनाक इतिहास
स्थानीय निवासियों का कहना है कि शायद ही कोई ऐसा महीना गुजरता हो जब सिमरी तेलिया पोखर चौक पर खून न बहता हो। यहाँ हुई दुर्घटनाओं में न केवल युवा, बल्कि स्कूली बच्चे और बुजुर्ग भी अपनी जान गंवा चुके हैं। एक स्थानीय ग्रामीण ने रुंधे गले से बताया, "पिछले साल एक ही परिवार के तीन लोगों ने इस चौक पर जान गंवाई थी। आज भी जब हम इस चौक से गुजरते हैं, तो दिल में दहशत होती है।"
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
लगातार होती मौतों के बावजूद, जिला प्रशासन और एनएचएआई (NHAI) की चुप्पी ने लोगों के आक्रोश को जन्म दिया है।
स्थानीय मांग: पिछले कई महीनों से ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधि 'स्पीड ब्रेकर', 'सिग्नल लाइट' और 'जेब्रा क्रॉसिंग' की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार फाइलें सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटती रहती हैं।
प्रोटेस्ट: ग्रामीणों ने कई बार सड़क जाम कर प्रदर्शन किया है। हर बार पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुँचकर जांच का आश्वासन देते हैं, लेकिन नतीजा शून्य ही रहता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे 'ब्लैक स्पॉट' (Black Spots) को चिह्नित कर वहाँ तत्काल सुधार की आवश्यकता होती है। सिमरी तेलिया पोखर चौक को एक क्लासिक 'ब्लैक स्पॉट' बताते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि:
राउंड-अबाउट (Round-about) का निर्माण: चौक पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए एक गोलंबर का निर्माण अनिवार्य है।
हाई-मास्ट लाइट: पर्याप्त रोशनी के लिए हाई-मास्ट लाइटें लगाई जानी चाहिए।
साइन बोर्ड: सड़क से कम से कम 500 मीटर पहले चेतावनी बोर्ड लगाए जाने चाहिए।
जन-प्रतिनिधियों की भूमिका और जिम्मेदारी
सिंहवाड़ा प्रखंड के इस क्षेत्र में सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय हर नेता इसे अपना चुनावी मुद्दा बनाता है, लेकिन जीत के बाद इस चौराहे को भूल जाता है। समाज के प्रबुद्ध वर्गों ने अब एक 'सड़क सुरक्षा समिति' बनाकर सरकार पर दबाव बनाने का निर्णय लिया है।
सिमरी तेलिया पोखर चौक पर बहता खून यह चीख-चीख कर कह रहा है कि प्रशासन को और अधिक मौतों का इंतजार नहीं करना चाहिए। सड़क सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन करना किसी की जान की कीमत पर नहीं होना चाहिए। यदि समय रहते इस चौक के डिजाइन में बदलाव और सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो यह स्थान और भी अधिक जानलेवा साबित होगा।