तैयारियों के अंतिम पड़ाव पर सुल्तानगंज, व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन मुस्तैद

सुल्तानगंज (भागलपुर): विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 के भव्य आयोजन के लिए धर्मनगरी सुल्तानगंज पूरी तरह तैयार हो रही है। इस वर्ष यह पवित्र मेला 30 जुलाई 2026 से 28 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा। उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर स्थित अजगैवीनाथ धाम से जल भरकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ को अर्पित करने के लिए लाखों शिवभक्तों के आगमन की तैयारी प्रशासन ने युद्धस्तर पर शुरू कर दी है।

तैयारियों का महाकुंभ: लक्ष्य 24 जुलाई

मेला शुरू होने में अब बहुत कम समय शेष है, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को 24 जुलाई 2026 तक सभी निर्माण और व्यवस्थाओं को पूर्ण करने का सख्त निर्देश दिया है। सुल्तानगंज से लेकर देवघर तक के लगभग 105-110 किलोमीटर लंबे कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।

प्रमुख व्यवस्थाएं और आधुनिक सुविधाएं

इस वर्ष प्रशासन का मुख्य जोर कांवरियों को एक सुरक्षित, आधुनिक और सुविधायुक्त यात्रा अनुभव प्रदान करने पर है:

टेंट सिटी और ठहरने की व्यवस्था: भागलपुर, बांका और मुंगेर में कुल 2650 बेड की क्षमता वाली टेंट सिटी का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा, श्रद्धालुओं को मौसम की मार से बचाने के लिए जर्मन हैंगर और स्विस कॉटेज की भी व्यवस्था की गई है।

तकनीकी हस्तक्षेप: सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए पहली बार एआई (AI) आधारित सीसीटीवी निगरानी और ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, बाबा अजगैवीनाथ मंदिर में जलार्पण को सुगम बनाने के लिए 'आधुनिक अरघा सिस्टम' स्थापित किया जा रहा है।

बुनियादी सुविधाएं: 24 घंटे बिजली आपूर्ति, आरओ प्लांट के जरिए स्वच्छ पेयजल, और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए राउंड-द-क्लॉक चिकित्सा केंद्रों की स्थापना की गई है। 'दीदी की रसोई' के माध्यम से कांवरियों को शुद्ध और सात्विक भोजन उपलब्ध कराने की योजना है।

यातायात प्रबंधन: विक्रमशिला सेतु के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने के कारण, प्रशासन ने बेली ब्रिज और वैकल्पिक मार्गों के माध्यम से भीड़ को नियंत्रित करने की पूरी कार्ययोजना तैयार की है।

चुनौतियां और धरातलीय स्थिति

हालांकि प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में बारिश के कारण काम की गति थोड़ी प्रभावित हुई है। कांवरिया पथ पर कुछ स्थानों पर जलजमाव और कीचड़ जैसी समस्याएं सामने आई हैं, जिन्हें दूर करने के लिए मशीनों के जरिए युद्धस्तर पर सुधार कार्य जारी है। प्रशासन का कहना है कि 24 जुलाई की समय-सीमा से पहले सभी बाधाओं को दूर कर लिया जाएगा।

एक सुरक्षित और आध्यात्मिक यात्रा का संकल्प

बिहार और झारखंड सरकारें इस वर्ष के श्रावणी मेले को यादगार बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। मेले के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों, गंगा महाआरती और विशेष लेजर शो का भी आयोजन किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ-साथ एक सुखद अनुभव भी मिले।

सुल्तानगंज प्रशासन का दावा है कि इस बार कांवरियों को मिलने वाली सुविधाएं पहले के वर्षों की तुलना में कहीं अधिक बेहतर और आधुनिक होंगी। शिवभक्तों की अटूट आस्था के साथ, प्रशासन की यह तैयारी एक सुरक्षित और सुगम 'बोल बम' यात्रा सुनिश्चित करने के लिए तत्पर है।