टीएमबीयू परीक्षा विभाग में सोशलिस्ट स्टूडेंट एसोसिएशन का प्रदर्शन, अनियमितताओं के खिलाफ भरी हुंकार
भागलपुर: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के परीक्षा विभाग में मंगलवार का दिन हंगामेदार रहा। सोशलिस्ट स्टूडेंट एसोसिएशन (SSA) के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र नेता और कार्यकर्ता विश्वविद्यालय परिसर में जमा हुए और परीक्षा विभाग के कामकाज में हो रही कथित अनियमितताओं के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा परिणामों में देरी, डिग्री मिलने में विलंब और मार्कशीट में त्रुटियों के कारण हजारों छात्र अपना भविष्य दांव पर लगा रहे हैं।
परीक्षा विभाग बना 'अड्डों' का केंद्र
प्रदर्शन के दौरान सोशलिस्ट स्टूडेंट एसोसिएशन के कार्यकर्ताओं ने परीक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। छात्र नेताओं का कहना था कि विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग केवल छात्रों को टालमटोल करने का केंद्र बनकर रह गया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा, "छात्र महीनों से अपनी डिग्री और मार्कशीट के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन यहां के अधिकारियों को उनकी पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है। हर बार एक ही बहाना—'काम चल रहा है' या 'सॉफ्टवेयर की दिक्कत है'—सुनकर छात्र थक चुके हैं।" प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगों पर जोर दिया:
समयबद्ध परिणाम: विभिन्न स्नातक और स्नातकोत्तर कोर्सों के लंबित परिणामों को एक सप्ताह के भीतर घोषित किया जाए।
त्रुटि सुधार में तेजी: मार्कशीट में नाम, पिता का नाम या विषय में गलतियों को सुधारने के लिए एक विशेष 'फास्ट ट्रैक' सेल का गठन हो।
डिग्री वितरण: दीक्षांत समारोह के बाद भी जिन छात्रों को डिग्री नहीं मिल पाई है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर डिग्री उपलब्ध कराई जाए।
अधिकारियों से तीखी नोक-झोंक
मंगलवार दोपहर जब छात्र नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल परीक्षा नियंत्रक से मिलने उनके कार्यालय पहुंचा, तो वहां बहस काफी बढ़ गई। छात्रों का आरोप था कि परीक्षा विभाग के अधिकारी अपने कार्यालय में मौजूद नहीं रहते और जब होते भी हैं, तो छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुनते।
इस दौरान मौके पर मौजूद विश्वविद्यालय सुरक्षा कर्मियों और छात्रों के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को समय सीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया, तो वे विश्वविद्यालय में तालाबंदी करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
शैक्षणिक भविष्य पर संकट
भागलपुर और आसपास के जिलों के कॉलेज जो टीएमबीयू से संबद्ध हैं, वहां के हजारों छात्र इन समस्याओं से सीधे प्रभावित हैं। डिग्री में देरी के कारण कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में फॉर्म भरने से वंचित रह जा रहे हैं। एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "मेरा पीजी में एडमिशन रुक गया है क्योंकि टीएमबीयू ने समय पर स्नातक का अंकपत्र नहीं दिया है। मेरे करियर के लिए कौन जिम्मेदार है?"
क्या कहता है विश्वविद्यालय प्रशासन?
प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एक संक्षिप्त प्रतिक्रिया आई है। विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि परीक्षाओं को पटरी पर लाने के लिए तकनीकी कमियों को दूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "परीक्षा विभाग में मैनपावर की कमी है, लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं कि जल्द ही लंबित परिणामों को जारी कर दिया जाए।" हालांकि, छात्रों के लिए यह आश्वासन पुराना हो चुका है, जिसे वे अब मानने को तैयार नहीं हैं।
सोशलिस्ट स्टूडेंट एसोसिएशन का रुख
एसोसिएशन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक दिवसीय प्रदर्शन नहीं है। उन्होंने कहा, “हम आने वाले दिनों में सभी संबद्ध कॉलेजों में 'छात्र संवाद' आयोजित करेंगे और विश्वविद्यालय की विफलताओं को उजागर करेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो हम राजभवन तक अपनी बात पहुंचाएंगे।”
टीएमबीयू परीक्षा विभाग में जारी यह गतिरोध इस बात का संकेत है कि विश्वविद्यालय में प्रशासनिक सुधार की सख्त आवश्यकता है। जब तक परीक्षा प्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी नहीं बनाया जाएगा, तब तक छात्र इसी तरह सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर रहेंगे। परीक्षा विभाग की यह जिम्मेदारी है कि वह छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील बने।
यह प्रदर्शन न केवल सोशलिस्ट स्टूडेंट एसोसिएशन की ताकत का प्रदर्शन था, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है कि वे छात्रों के धैर्य की परीक्षा न लें।