उप नगर आयुक्त और नगर प्रबंधकों को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी, प्रतिदिन की सफाई की होगी कड़ी निगरानी
भागलपुर: शहर को 'क्लीन और ग्रीन' बनाने के संकल्प के साथ भागलपुर नगर निगम ने अपनी प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया है। शहर की लचर होती सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से नगर आयुक्त ने अब उप नगर आयुक्त और सभी नगर प्रबंधकों (City Managers) की जवाबदेही तय कर दी है। इस नए आदेश के तहत, अब शहर के हर वार्ड और गली-मोहल्ले की प्रतिदिन सफाई सुनिश्चित करना इन अधिकारियों की 'प्राथमिक जिम्मेदारी' होगी।
स्वच्छता के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति
हाल ही में नगर निगम की एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया कि शहर के सफाई कार्य में अब किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पिछले कुछ महीनों से शहर के कई इलाकों से कचरा उठाव न होने और नालियों के जाम होने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए, प्रशासन ने 'मॉनिटरिंग' का एक नया ढांचा तैयार किया है।
अब शहर को विभिन्न जोन में विभाजित कर उप नगर आयुक्त को इसका नोडल अधिकारी बनाया गया है। उनके साथ-साथ प्रत्येक वार्ड के लिए नियुक्त नगर प्रबंधकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके क्षेत्र में सफाई कर्मचारी सुबह के निर्धारित समय पर काम पर पहुंचें और कूड़े का उठाव करें।
अधिकारियों की नई भूमिका और कार्यक्षेत्र
इस नई जिम्मेदारी के तहत अधिकारियों को केवल कार्यालय में बैठकर रिपोर्ट नहीं लेनी है, बल्कि उन्हें 'फील्ड' में उतरना होगा।
दैनिक निरीक्षण (Daily Inspection): नगर प्रबंधकों को रोजाना अपने संबंधित जोन का दौरा करना होगा। वे सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति, गलियों की सफाई की स्थिति और कचरा ढोने वाले वाहनों की कार्यप्रणाली की जांच करेंगे।
समयबद्ध कचरा उठाव: यह जिम्मेदारी दी गई है कि शहर के मुख्य मार्ग हों या तंग गलियां, कहीं भी कूड़े का अंबार न दिखे। कचरा संग्रहण वाहनों के रूट चार्ट को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
फोटो-सत्यापन: सफाई के बाद की स्थिति का सत्यापन करने के लिए अधिकारियों को 'बीफोर' और 'आफ्टर' (Before and After) तस्वीरें अपने व्हाट्सएप ग्रुप में साझा करनी होंगी, ताकि वरिष्ठ अधिकारी सीधे मॉनिटरिंग कर सकें।
स्वच्छता कर्मियों के लिए नई कार्य-संस्कृति
नगर निगम का यह कदम न केवल अधिकारियों के लिए है, बल्कि इसने सफाई कर्मियों के बीच भी अनुशासन को प्राथमिकता दी है। अब किसी भी सफाई कर्मी का वेतन उनकी 'कार्य रिपोर्ट' के आधार पर जारी होगा। यदि किसी इलाके में गंदगी पाई जाती है, तो उस वार्ड के प्रभारी नगर प्रबंधक के साथ-साथ संबंधित वार्ड के सफाई निरीक्षक (Sanitary Inspector) से भी जवाब तलब किया जाएगा।
तकनीक और जनता की भागीदारी
इस अभियान को सफल बनाने के लिए नगर निगम एक मोबाइल ऐप और हेल्पलाइन नंबर को भी अधिक सक्रिय कर रहा है। यदि किसी नागरिक को अपने क्षेत्र में गंदगी दिखती है, तो वे सीधे उसकी शिकायत कर सकेंगे। इस शिकायत पर अधिकारी को 24 घंटे के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट देनी होगी।
शहरवासियों की उम्मीदें
भागलपुर के आम नागरिकों ने इस पहल का स्वागत किया है। स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि शहर की सफाई व्यवस्था तभी सुधर सकती है जब शीर्ष अधिकारियों पर जिम्मेदारी हो। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “पहले शिकायतें सिर्फ फाइलों में दब जाती थीं, लेकिन अगर अधिकारी खुद सड़क पर उतरेंगे और प्रतिदिन सफाई की निगरानी करेंगे, तो निश्चित रूप से शहर का स्वरूप बदलेगा।”
हालांकि, संसाधन की कमी और बढ़ती आबादी के कारण सफाई प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। निगम के पास कचरा उठाने वाले वाहनों की संख्या कम है और कर्मचारियों की कमी भी एक बड़ा मुद्दा है। इसे देखते हुए नगर आयुक्त ने अतिरिक्त वाहनों को किराये पर लेने और नई कार्य-योजना के तहत कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने की बात कही है।
नगर निगम की यह नई पहल एक सकारात्मक दिशा की ओर बढ़ता कदम है। उप नगर आयुक्त और नगर प्रबंधकों को मिली यह जिम्मेदारी साबित करती है कि शहर अब स्वच्छता के प्रति कोई समझौता करने को तैयार नहीं है। अब देखना यह है कि यह 'फील्ड मॉनिटरिंग' का मॉडल भागलपुर की गलियों को कितना स्वच्छ और सुंदर बना पाता है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो यह न केवल शहरवासियों को एक स्वस्थ वातावरण देगा, बल्कि देश के स्वच्छ शहरों की सूची में भागलपुर की स्थिति को भी बेहतर करेगा।