3 वर्षीय वृद्ध ने शिक्षिका पर लगाया गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप, थाने में लगाई न्याय की गुहार
बिहपुर (भागलपुर): भागलपुर जिले के बिहपुर प्रखंड अंतर्गत बभनगामा पंचायत से एक हैरान कर देने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहाँ के निवासी 73 वर्षीय बुजुर्ग नरेंद्र प्रसाद चौधरी ने स्थानीय एक सरकारी विद्यालय की शिक्षिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित वृद्ध का आरोप है कि शिक्षिका ने न केवल उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी है। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और मामले को लेकर ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
पीड़ित नरेंद्र प्रसाद चौधरी, जो कि बभनगामा गांव के एक सम्मानित वरिष्ठ नागरिक माने जाते हैं, ने बिहपुर थाना में एक लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। आवेदन के अनुसार, विवाद की जड़ एक निजी भूमि और विद्यालय के आसपास के अतिक्रमण या आपसी विवाद से जुड़ी बताई जा रही है।
वृद्ध का आरोप है कि बीते दिनों जब वे अपने कार्य से कहीं जा रहे थे, तभी संबंधित शिक्षिका ने उन्हें रास्ते में रोककर न केवल अपमानित किया, बल्कि सार्वजनिक रूप से गाली-गलौज भी की। आरोप है कि शिक्षिका का व्यवहार इतना आक्रामक था कि उन्होंने वृद्ध को जान से मारने की धमकी तक दे डाली। 73 वर्ष की अवस्था में इस प्रकार के दुर्व्यवहार से नरेंद्र प्रसाद चौधरी मानसिक रूप से काफी आहत हैं।
वृद्ध की थाने से गुहार
थाने में दिए गए आवेदन में नरेंद्र प्रसाद चौधरी ने कहा है, "मैं अपनी वृद्धावस्था में सम्मान के साथ जीना चाहता हूँ, लेकिन एक शिक्षिका द्वारा किया गया यह कृत्य मेरे लिए असहनीय है। उन्होंने मुझे धमकी दी है, जिससे मेरी और मेरे परिवार की सुरक्षा को खतरा महसूस हो रहा है।" उन्होंने बिहपुर पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में त्वरित प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए और संबंधित शिक्षिका पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
गांव में चर्चा का विषय बनी घटना
इस घटना ने बभनगामा गांव के लोगों को दो खेमों में बांट दिया है। एक ओर जहाँ ग्रामीण वरिष्ठ नागरिक के साथ हुए इस दुर्व्यवहार की निंदा कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग मामले की सच्चाई की जांच की बात भी कह रहे हैं। सामाजिक दृष्टिकोण से, एक शिक्षिका और एक वरिष्ठ नागरिक के बीच का यह विवाद इलाके के लिए काफी दुर्भाग्यपूर्ण माना जा रहा है।
पुलिस प्रशासन का रुख
बिहपुर थानाध्यक्ष ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें वृद्ध का आवेदन प्राप्त हुआ है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। उन्होंने कहा, "किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं है, चाहे वह कोई भी हो। आवेदन की जांच के बाद मामले में उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।"
फिलहाल, पुलिस इस बात का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर विवाद की असल वजह क्या थी, जिसके कारण बात इतनी बिगड़ गई कि एक शिक्षिका को इस प्रकार के आरोप का सामना करना पड़ रहा है।
सामाजिक मर्यादा पर बड़ा सवाल
यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत विवाद है, बल्कि यह हमारे समाज में 'गुरु' और 'बुजुर्गों' के प्रति सम्मान के गिरते स्तर पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। एक शिक्षिका से समाज को संस्कार और नैतिकता की उम्मीद होती है, जबकि एक वरिष्ठ नागरिक के प्रति इस प्रकार का व्यवहार सामाजिक मर्यादा के खिलाफ माना जाता है।
मामला फिलहाल पुलिस के संज्ञान में है। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि इस मामले को समय रहते बातचीत के माध्यम से सुलझाया नहीं गया, तो यह बढ़कर गंभीर कानूनी विवाद का रूप ले सकता है। अब सभी की निगाहें बिहपुर पुलिस की जांच और उस पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।