रानीबाग रेलवे ढाला पर जाम बना बड़ी समस्या, अतिक्रमण और भारी वाहनों से बढ़ी परेशानी; महिला यात्री की तबीयत बिगड़ने के बाद व्यवस्था पर उठे सवाल

सहरसा। नगर परिषद सिमरी बख्तियारपुर के रानीबाग रेलवे ढाला पर लगातार लगने वाला जाम अब आम लोगों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। हर दिन घंटों तक लगने वाले जाम के कारण यात्रियों, छात्रों, कर्मचारियों, व्यापारियों और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेलवे ढाला के आसपास बढ़ते अतिक्रमण, अनियंत्रित भारी वाहनों की आवाजाही और प्रभावी यातायात प्रबंधन की कमी के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। हाल ही में जाम में फंसने के दौरान एक महिला यात्री की तबीयत बिगड़ने की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार रानीबाग रेलवे ढाला नगर परिषद क्षेत्र का सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है। इस रास्ते से प्रतिदिन हजारों लोग अपने दैनिक कार्यों के लिए गुजरते हैं। रेलवे फाटक बंद होने के दौरान दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। फाटक खुलने के बाद भी अतिक्रमण और अव्यवस्थित यातायात के कारण जाम जल्दी समाप्त नहीं हो पाता, जिससे लोगों को लंबे समय तक सड़क पर फंसे रहना पड़ता है।

लोगों का कहना है कि रेलवे ढाला के दोनों ओर सड़क किनारे अस्थायी दुकानें, ठेले और अन्य प्रकार के अतिक्रमण लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इससे सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है। जब एक साथ ट्रक, बस, ऑटो, ई-रिक्शा, बाइक और अन्य वाहन गुजरने का प्रयास करते हैं, तब कुछ ही मिनटों में लंबा जाम लग जाता है। कई बार भारी वाहन सड़क के बीच में फंस जाते हैं, जिससे पूरी यातायात व्यवस्था ठप हो जाती है।

हाल ही में सामने आई घटना ने इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जाम में लंबे समय तक फंसे रहने के दौरान एक महिला यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ गई। भीड़ और वाहनों की लंबी कतार के कारण समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में कठिनाई हुई। स्थानीय लोगों ने किसी तरह महिला को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया, जिसके बाद उनका प्राथमिक उपचार कराया गया। इस घटना के बाद नागरिकों ने जाम की समस्या के स्थायी समाधान की मांग तेज कर दी है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि लगातार लगने वाले जाम का असर उनके व्यवसाय पर भी पड़ रहा है। ग्राहक जाम के डर से बाजार आने से बचते हैं, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है। वहीं स्कूली बच्चों और कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों को भी समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाई होती है। कई बार एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन भी जाम में फंस जाते हैं, जिससे मरीजों की जान पर खतरा पैदा हो सकता है।

यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे फाटक के आसपास अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग जाम की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। यदि सड़क किनारे हुए अतिक्रमण को हटाया जाए, भारी वाहनों की आवाजाही के लिए समय निर्धारित किया जाए और यातायात पुलिस की नियमित तैनाती हो, तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इस समस्या की शिकायत कई बार नगर परिषद, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से की जा चुकी है। समय-समय पर अभियान भी चलाए गए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के कुछ समय बाद फिर से सड़क किनारे दुकानें और अस्थायी ढांचे खड़े हो जाते हैं, जिससे समस्या पहले जैसी हो जाती है।

नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है और भविष्य में भी नियमित कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं पुलिस प्रशासन ने भी आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त यातायात कर्मियों की तैनाती और भीड़भाड़ वाले समय में विशेष निगरानी की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि रेलवे प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।

शहर के सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि केवल अतिक्रमण हटाना ही पर्याप्त नहीं होगा। रेलवे ढाला के आसपास यातायात सुधार के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करनी होगी। यदि आवश्यक हो तो वैकल्पिक मार्गों का विकास, पार्किंग व्यवस्था, सड़क चौड़ीकरण और आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली पर भी विचार किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए नगर परिषद क्षेत्रों में यातायात प्रबंधन की नई रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में जाम की समस्या और गंभीर हो सकती है।

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रानीबाग रेलवे ढाला को जाम मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाए, ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती की जाए तथा रेलवे फाटक के आसपास पर्याप्त बैरिकेडिंग और संकेतक लगाए जाएं ताकि वाहन व्यवस्थित ढंग से गुजर सकें।

नागरिकों ने यह भी सुझाव दिया है कि भविष्य में रेलवे ओवरब्रिज या अंडरपास जैसी स्थायी परियोजनाओं पर विचार किया जाए, जिससे रेलवे फाटक पर निर्भरता कम हो और यातायात सुचारु रूप से चलता रहे। उनका कहना है कि इससे न केवल जाम की समस्या दूर होगी, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।

फिलहाल रानीबाग रेलवे ढाला पर लगने वाला जाम स्थानीय लोगों के लिए रोजमर्रा की बड़ी चुनौती बना हुआ है। हाल ही में महिला यात्री की तबीयत बिगड़ने की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि जनसुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी है। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन, नगर परिषद और पुलिस प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय पर प्रभावी और स्थायी समाधान लागू किया जाता है, तो हजारों लोगों को प्रतिदिन होने वाली इस परेशानी से राहत मिल सकती है।