बिहार में स्मार्ट मीटर बना बिजली कंपनी की ‘खुफिया तकनीक’, 10 अरब डेटा प्वाइंट्स से होगी बिजली चोरी की निगरानी; संदिग्ध पैटर्न पर पहुंचेगी टीम

पटना। बिहार में स्मार्ट मीटर अब सिर्फ बिजली खपत दर्ज करने और उपभोक्ताओं को बिल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रह गया है। बिजली कंपनी के लिए यह एक तरह की डेटा आधारित खुफिया तकनीक के रूप में काम कर रहा है। स्मार्ट मीटर से मिलने वाले आंकड़ों के तकनीकी विश्लेषण के जरिए बिजली कंपनी उपभोक्ताओं की खपत का पैटर्न समझने, असामान्य बिजली इस्तेमाल की पहचान करने और संभावित बिजली चोरी या कनेक्शन के गलत इस्तेमाल वाले मामलों को चिन्हित करने की दिशा में काम कर रही है।

बिजली कंपनी के अनुसार अब तक स्मार्ट मीटर से करीब 10 अरब डेटा प्वाइंट्स जमा हो चुके हैं। इतने बड़े स्तर पर उपलब्ध डेटा बिजली कंपनी को उपभोक्ताओं के बिजली इस्तेमाल से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा रहा है। इस डेटा के आधार पर वर्तमान व्यवस्था की निगरानी के साथ-साथ भविष्य के लिए बिजली आपूर्ति और राजस्व सुधार की रणनीति भी तैयार की जा रही है।

स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली कंपनी को यह समझने में मदद मिल रही है कि किसी कनेक्शन पर किस समय कितनी बिजली खर्च हो रही है और खपत का सामान्य पैटर्न क्या है। यदि किसी कनेक्शन के इस्तेमाल में अचानक बड़ा बदलाव आता है तो उसे आगे की जांच के लिए चिन्हित किया जा सकता है।

रात 9 बजे के बाद खपत में बदलाव पर भी नजर

बिजली कंपनी के संबंधित अधिकारियों के अनुसार स्मार्ट मीटर से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर कुछ विशेष प्रकार के उपभोक्ता व्यवहार की पहचान की जा सकती है।

अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में ऐसा सामने आता है कि व्यावसायिक प्रतिष्ठान घरेलू उपभोक्ता के नाम पर बिजली कनेक्शन ले लेते हैं। इसके बाद उस कनेक्शन का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाता है। नियमों के अनुसार घरेलू कनेक्शन का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता।

ऐसे मामलों की पहचान के लिए स्मार्ट मीटर से मिलने वाला डेटा उपयोगी साबित हो रहा है। यदि किसी घरेलू कनेक्शन की बिजली खपत सामान्य घरेलू उपयोग से अलग दिखाई देती है या उसमें व्यावसायिक गतिविधि के अनुरूप पैटर्न नजर आता है तो कंपनी उस कनेक्शन को जांच के लिए चिन्हित कर सकती है।

रात 9 बजे के बाद बिजली की खपत में होने वाले बदलाव को भी कुछ मामलों में डेटा विश्लेषण के दौरान देखा जा सकता है। यदि किसी कनेक्शन के खपत पैटर्न में असामान्य बदलाव दिखाई देता है तो संबंधित टीम मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच कर सकती है।

हालांकि केवल रात में बिजली की खपत कम होना किसी उपभोक्ता के खिलाफ कार्रवाई का प्रमाण नहीं है। खपत में बदलाव के कई सामान्य कारण हो सकते हैं। इसलिए डेटा के आधार पर संदिग्ध कनेक्शन की पहचान के बाद आवश्यक होने पर भौतिक सत्यापन किया जाना जरूरी है।

घरेलू कनेक्शन पर व्यावसायिक गतिविधि की पहचान

बिजली कंपनियों के सामने घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन के गलत इस्तेमाल की समस्या लंबे समय से रही है।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित कनेक्शन का इस्तेमाल यदि किसी दुकान, कार्यालय, वर्कशॉप या अन्य व्यावसायिक गतिविधि में किया जाता है तो यह नियमों का उल्लंघन हो सकता है।

पहले ऐसे मामलों की पहचान मुख्य रूप से निरीक्षण और शिकायतों के आधार पर होती थी। स्मार्ट मीटर के आने के बाद बिजली खपत से जुड़े विस्तृत आंकड़े उपलब्ध होने लगे हैं।

यदि किसी घरेलू कनेक्शन की खपत लंबे समय तक सामान्य रहती है और अचानक उसमें असामान्य वृद्धि दिखाई देती है, तो कंपनी के सिस्टम में यह कनेक्शन जांच के लिए चिन्हित हो सकता है।

10 अरब डेटा प्वाइंट्स का बड़ा आधार

बिजली कंपनी के अनुसार स्मार्ट मीटर के जरिए अब तक लगभग 10 अरब डेटा प्वाइंट्स एकत्र किए जा चुके हैं।

यह डेटा अलग-अलग समय पर बिजली की खपत और उससे जुड़े पैटर्न की जानकारी उपलब्ध कराता है। इतने बड़े डेटा सेट के विश्लेषण से कंपनी को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किस क्षेत्र में बिजली की मांग कब बढ़ती है और किस तरह के उपभोक्ताओं की खपत में क्या बदलाव आ रहा है।

यह जानकारी बिजली चोरी की पहचान के साथ-साथ बिजली वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी उपयोगी हो सकती है।

बिजली चोरी रोकने में मददगार तकनीक

बिजली चोरी बिजली वितरण कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती रही है। इससे कंपनी को राजस्व का नुकसान होता है और ईमानदारी से बिजली बिल का भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।

स्मार्ट मीटर और डेटा एनालिटिक्स की मदद से अब संभावित अनियमितता वाले कनेक्शनों को पहले ही चिन्हित करने की कोशिश की जा रही है।

इसका फायदा यह हो सकता है कि बिजली जांच टीमों को हर कनेक्शन की जांच करने के बजाय उन कनेक्शनों पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिले जहां डेटा के आधार पर असामान्य पैटर्न दिखाई दे रहा है।

उपभोक्ता व्यवहार का तैयार हो रहा डेटा प्रोफाइल

स्मार्ट मीटर से केवल कुल बिजली खपत का पता नहीं चलता, बल्कि समय के अनुसार खपत का पैटर्न भी सामने आ सकता है।

किस समय बिजली की खपत अधिक होती है, कब कम होती है, किस दिन या अवधि में बदलाव आता है और लंबे समय में खपत किस दिशा में जा रही है—इन सभी पहलुओं का तकनीकी विश्लेषण किया जा सकता है।

इससे बिजली कंपनी को उपभोक्ताओं के बिजली इस्तेमाल के व्यवहार को समझने में मदद मिल सकती है।

हालांकि इस तरह के डेटा का इस्तेमाल नियमों और उपभोक्ता अधिकारों का ध्यान रखते हुए किया जाना महत्वपूर्ण होगा।

भविष्य की बिजली योजना बनाने में मदद

स्मार्ट मीटर से प्राप्त डेटा केवल वर्तमान निगरानी तक सीमित नहीं है। बिजली कंपनी इसका इस्तेमाल भविष्य की रणनीति तैयार करने में भी कर रही है।

किस क्षेत्र में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, किस समय अधिक लोड आता है और किन इलाकों में अतिरिक्त क्षमता की जरूरत हो सकती है—इन सवालों का जवाब डेटा विश्लेषण से प्राप्त किया जा सकता है।

इसके आधार पर भविष्य में बिजली आपूर्ति, ट्रांसफॉर्मर क्षमता, फीडर प्रबंधन और वितरण व्यवस्था से जुड़े फैसले लेने में मदद मिल सकती है।

अचानक बढ़ी या घटी खपत भी होगी विश्लेषण का हिस्सा

किसी उपभोक्ता की बिजली खपत में अचानक बदलाव आने पर भी सिस्टम के स्तर पर उसका विश्लेषण किया जा सकता है।

लेकिन खपत में बदलाव को सीधे बिजली चोरी से जोड़ना सही नहीं होगा। गर्मी के मौसम में एसी और कूलर का इस्तेमाल बढ़ने से खपत बढ़ सकती है। इसी तरह किसी घर के खाली रहने पर खपत अचानक कम हो सकती है।

इसलिए डेटा केवल एक संकेत के रूप में काम करेगा। किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित परिस्थितियों की जांच करना आवश्यक होगा।

जांच टीम की भूमिका होगी महत्वपूर्ण

स्मार्ट मीटर से संभावित संदिग्ध कनेक्शनों की पहचान होने के बाद मौके पर जाकर स्थिति की पुष्टि करना महत्वपूर्ण होगा।

जांच टीम यह देख सकती है कि कनेक्शन किस उद्देश्य से लिया गया है और वास्तव में उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।

यदि घरेलू कनेक्शन पर व्यावसायिक गतिविधि पाई जाती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

इस प्रक्रिया में डेटा और जमीनी जांच के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।

उपभोक्ताओं को भी सावधान रहने की जरूरत

स्मार्ट मीटर के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उपभोक्ताओं को भी अपने बिजली कनेक्शन की श्रेणी को लेकर सावधान रहना होगा।

यदि किसी उपभोक्ता ने घरेलू कनेक्शन लिया है लेकिन बाद में वहां व्यावसायिक गतिविधि शुरू कर दी है तो उसे नियमानुसार कनेक्शन की श्रेणी बदलवानी चाहिए।

गलत श्रेणी के कनेक्शन का इस्तेमाल भविष्य में जांच के दायरे में आ सकता है।

डेटा से बढ़ेगी बिजली व्यवस्था की दक्षता

स्मार्ट मीटर का एक बड़ा फायदा यह भी है कि बिजली कंपनी को वास्तविक समय के करीब खपत संबंधी जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है।

इससे बिजली वितरण में समस्या आने पर उसकी पहचान और समाधान की प्रक्रिया तेज की जा सकती है।

आने वाले समय में डेटा आधारित व्यवस्था से बिजली की मांग का बेहतर अनुमान लगाने और संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।

तकनीक के साथ पारदर्शिता भी जरूरी

स्मार्ट मीटर और डेटा विश्लेषण बिजली चोरी की रोकथाम और बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए उपयोगी तकनीक है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता भी जरूरी है।

किसी उपभोक्ता की खपत में बदलाव को अपने आप अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अंतिम कार्रवाई से पहले उचित सत्यापन और नियमानुसार प्रक्रिया का पालन आवश्यक होगा।

इससे तकनीक का इस्तेमाल प्रभावी होने के साथ-साथ निष्पक्ष भी रह सकेगा।

बिहार में स्मार्ट मीटर अब बिजली बिलिंग की सुविधा से आगे बढ़कर बिजली कंपनी के लिए डेटा आधारित निगरानी और रणनीति तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। कंपनी के अनुसार अब तक करीब 10 अरब डेटा प्वाइंट्स जमा हो चुके हैं।

इन आंकड़ों के विश्लेषण से बिजली चोरी, गलत श्रेणी के कनेक्शन और उपभोक्ताओं की बिजली खपत के पैटर्न को समझने में मदद मिल रही है।

खास तौर पर ऐसे मामलों की पहचान की जा रही है जहां व्यावसायिक प्रतिष्ठान घरेलू उपभोक्ता के नाम पर बिजली कनेक्शन लेकर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं। रात 9 बजे के बाद खपत में बदलाव जैसे पैटर्न भी कुछ मामलों में जांच का संकेत बन सकते हैं, हालांकि केवल खपत में कमी किसी उपभोक्ता के खिलाफ कार्रवाई का आधार नहीं होगी।

आने वाले समय में स्मार्ट मीटर से प्राप्त डेटा का इस्तेमाल बिजली चोरी रोकने, राजस्व बढ़ाने, बिजली की मांग का अनुमान लगाने और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।

इस तरह स्मार्ट मीटर बिहार की बिजली व्यवस्था को अधिक तकनीकी, डेटा आधारित और लक्षित निगरानी वाली प्रणाली में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।