कोसी दियारा क्षेत्र के कठडूमर पंचायत में सड़क या कीचड़ का दलदल? प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजनाओं की खुली पोल; गड्ढों में तब्दील सड़कों से ग्रामीण परेशान, जीवन बना दुश्वार

बिहार के कोसी और दियारांचल क्षेत्रों में विकास के दावों और धरातल की सच्चाई के बीच का अंतर अक्सर प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल देता है। पूर्णिया जिले के अंतर्गत आने वाले कोसी दियारा क्षेत्र के कठडूमर पंचायत से सड़क बदहाली की एक ऐसी ही दयनीय और झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बड़े तामझाम के साथ बनाई गई सड़कें आज बारिश के मौसम में पूरी तरह नेस्तनाबूद हो चुकी हैं।

क्षेत्र के लोगों का जीवन इन दिनों नरकीय बन गया है क्योंकि पक्की कही जाने वाली ये सड़कें बारिश के पानी और कीचड़ के कारण गहरे गड्ढों और दलदल में तब्दील हो चुकी हैं। आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है, जिससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और आम ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय उदासीनता और निर्माण कार्य में बरती गई भारी अनियमितता के कारण ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है।

क्या है पूरा मामला? (कठडूमर पंचायत की जमीनी हकीकत)

कोसी दियारा का इलाका वैसे ही भौगोलिक दृष्टि से काफी दुर्गम माना जाता है, ऐसे में सड़कों की बदहाली ने स्थानीय लोगों की समस्याओं को कई गुना बढ़ा दिया है।

योजनाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति: कठडूमर पंचायत में ग्रामीणों को सुगम यातायात की सुविधा मुहैया कराने के लिए कुछ समय पूर्व प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजनाओं के तहत ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया गया था। उस वक्त लोगों को लगा था कि अब उनकी बरसों पुरानी मुश्किलें खत्म हो जाएंगी।

पहली ही बारिश में उखड़ी सड़कें: लेकिन गुणवत्ताविहीन निर्माण (Substandard Construction) का नतीजा यह हुआ कि जैसे ही मानसून की बारिश शुरू हुई, सड़कें पानी में बहने लगीं।ामार डामर और गिट्टी उखड़कर बिखर गए और पूरी सड़क कीचड़ से सन गई।

दलदल में फंसे वाहन और राहगीर: वर्तमान स्थिति यह है कि इन सड़कों पर पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है। दोपहिया वाहन तो दूर, चार पहिया वाहन और ट्रैक्टर तक इन कीचड़ भरे गड्ढों में फंसकर आए दिन दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं।

ग्रामीणों का दर्द और दुश्वारियाँ

कठडूमर पंचायत के आम नागरिकों का जीवन इन दिनों पूरी तरह से थम सा गया है। आवागमन के साधन ठप होने से हर वर्ग के लोगों को भारी मुसीबतों से जूझना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच नामुमकिन: यदि पंचायत में कोई व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाए या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना पड़े, तो एम्बुलेंस का इन रास्तों से गुजरना असंभव हो जाता है। समय पर इलाज न मिल पाने के कारण मरीजों की जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है।

बच्चों की शिक्षा पर ग्रहण: कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण छोटे-छोटे बच्चों का स्कूल जाना बंद हो गया है। अभिभावक अपने बच्चों को इस जानलेवा कीचड़ भरे रास्तों पर भेजने से डरते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है।

किसानों की आर्थिक कमर टूटी: दियारा क्षेत्र कृषि प्रधान है और यहाँ के किसान अपनी फसल को बेचने के लिए बाजारों तक ले जाते हैं। लेकिन सड़क खराब होने के कारण किसान न तो अपनी उपज समय पर बाजार पहुँचा पा रहे हैं और न ही उन्हें उचित मूल्य मिल पा रहा है।

भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोप

ग्रामीणों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने इस बदहाली के लिए सीधे तौर पर ठेकेदारों, इंजीनियरों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया है।

मानक की अनदेखी: ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान नियमों और मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। बेस मजबूत किए बिना ही ऊपरी सतह पर डामर बिछा दिया गया, ताकि उद्घाटन के समय सब कुछ ठीक-ठाक दिखे।

शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं: स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों को इस बदतर स्थिति से अवगत कराया, लेकिन हर बार सिर्फ झूठे आश्वासन ही मिले। धरातल पर सुधार के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।

आंदोलन की चेतावनी: अब ग्रामीणों का सब्र जवाब दे चुका है। कठडूमर पंचायत के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द इन सड़कों की मरम्मत और उच्चस्तरीय जाँच कराकर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे प्रखंड मुख्यालय का घेराव करने को बाध्य होंगे।

कोसी दियारा क्षेत्र के कठडूमर पंचायत में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजनाओं की यह बदहाल तस्वीर यह साबित करने के लिए काफी है कि कागजों पर विकास योजनाओं के आंकड़े भले ही कितने भी शानदार दिखाए जाएं, लेकिन धरातल पर हकीकत कितनी भयावह है। ग्रामीण भारत की रीढ़ कहे जाने वाले संपर्क मार्ग यदि इस तरह कीचड़ और गड्ढों में तब्दील रहेंगे, तो विकास की हर परिकल्पना अधूरी रह जाएगी। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर कब तक इन सड़कों की सुध लेता है और ग्रामीणों को इस नरकीय जीवन से मुक्ति दिलाता है।