बाबूपुर गंगा घाट पर अवैध खनन और परिचालन से ग्रामीण दहशत में, डीएम को लगाई गुहार

भागलपुर: जिले के बाबूपुर गंगा घाट पर चल रहे अवैध मिट्टी खनन और अनियंत्रित जहाज संचालन ने स्थानीय ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। इस समस्या के स्थायी समाधान और अपनी जान-माल की सुरक्षा की मांग को लेकर लगभग 100 ग्रामीणों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी (DM) को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि इन अवैध गतिविधियों पर अविलंब रोक नहीं लगाई गई, तो गंगा का कटाव उनके गांव को पूरी तरह लील सकता है।

महज 100 मीटर की दूरी पर मौत का साया

ग्रामीणों द्वारा डीएम को दिए गए आवेदन में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि बाबूपुर गांव की आबादी और गंगा घाट के बीच की दूरी अब घटकर मात्र 100 मीटर रह गई है। हर साल बरसात के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ने पर स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से घाट पर अवैध रूप से मिट्टी का खनन किया जा रहा है, जिससे नदी का बहाव सीधे गांव की ओर मुड़ रहा है।

मुख्य चिंताएं और समस्याएं

ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने कई गंभीर बिंदु रखे हैं:

अवैध खनन का खतरा: भारी मशीनों और अवैध तरीके से मिट्टी निकालने के कारण नदी का तट पूरी तरह कमजोर हो चुका है। इससे तटबंध के ढहने और गांव के भीतर पानी घुसने का खतरा मंडरा रहा है।

अनियंत्रित जहाज संचालन: घाट पर मालवाहक जहाजों के अवैध परिचालन से नदी की धारा प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जहाज आने से नदी में तेज लहरें उठती हैं, जो पहले से कमजोर हो चुके तटबंध को और अधिक क्षतिग्रस्त कर रही हैं।

विस्थापन का डर: ग्रामीणों ने प्रशासन को याद दिलाया कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले मानसून में दर्जनों घर गंगा में समा सकते हैं। कई परिवार पहले ही विस्थापन के दंश को झेलने के डर से सहमे हुए हैं।

"प्रशासन की चुप्पी भारी पड़ सकती है"

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन माफियाओं और जहाज संचालकों की मिलीभगत के कारण उनकी शिकायतों को दरकिनार किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने कहा, "हमारी खेती योग्य जमीन पहले ही नदी में समा चुकी है, अब हमारे घर भी खतरे में हैं। प्रशासन अगर इस बार भी मूकदर्शक बना रहा, तो हम सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।"

प्रशासन का रुख

इस मामले पर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने आवेदन मिलने की पुष्टि की है। संबंधित विभाग को स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से मिट्टी खनन पर प्रतिबंध लगे और अवैध रूप से चल रहे जहाजों के परिचालन को बंद किया जाए। साथ ही, तटबंध को मजबूत करने के लिए कटाव-रोधी कार्य (anti-erosion work) भी शुरू करने की अपील की गई है।