खरीक में राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध टूटा, करोड़ों की संपत्ति पर संकट तटबंध टूटने से खेतों और आबादी में घुसा बाढ़ का पानी, ग्रामीणों में दहशत
खरीक : गंगा के बढ़ते जलस्तर और लगातार तेज हो रही धारा के बीच खरीक प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध के टूट जाने से आसपास के इलाकों में पानी तेजी से फैल गया है। तटबंध टूटने के बाद खेतों, ग्रामीण रास्तों और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार तटबंध के क्षतिग्रस्त होने से सरकारी संसाधनों और क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों में अफरातफरी की स्थिति पैदा हो गई। ग्रामीण अपने परिवार और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए। कई लोगों ने घरों में रखे जरूरी सामान और अनाज को ऊंचे स्थानों पर रखना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि पानी का बहाव तेज होने के कारण कुछ ही समय में कई इलाकों में जलजमाव बढ़ गया।
तेज धारा से टूटा तटबंध
स्थानीय लोगों के अनुसार नदी के जलस्तर में वृद्धि के साथ तटबंध पर लगातार दबाव बढ़ रहा था। पानी की तेज धारा तटबंध के कमजोर हिस्से से टकराती रही, जिसके बाद वहां कटाव शुरू हो गया। देखते ही देखते मिट्टी का बड़ा हिस्सा बह गया और तटबंध का हिस्सा टूट गया।
तटबंध टूटने के बाद बाढ़ का पानी तेजी से आसपास के क्षेत्रों की ओर बढ़ा। खेतों में पानी भरने से खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका है। कई ग्रामीण मार्ग भी जलमग्न हो गए हैं, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है।
करोड़ों रुपये की संपत्ति पर खतरा
तटबंध का उद्देश्य नदी के पानी को आबादी और कृषि क्षेत्रों में फैलने से रोकना था। इसके टूटने से बड़े क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों के अनुसार यदि पानी का बहाव नियंत्रित नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में घर और खेत प्रभावित हो सकते हैं।
कृषि क्षेत्र में पानी फैलने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है। खेतों में लगी फसलों के डूबने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। इसके अलावा पशुपालकों के सामने चारा और मवेशियों को सुरक्षित रखने की समस्या भी पैदा हो गई है।
ग्रामीणों में दहशत
तटबंध टूटने के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोग लगातार पानी के स्तर और बहाव पर नजर रख रहे हैं। कई परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करने की मांग की है। प्रभावित क्षेत्रों में नावों की व्यवस्था करने, खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की मांग भी उठी है।
प्रशासन और विभागीय टीम सक्रिय
तटबंध टूटने की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमों ने स्थिति का जायजा लेना शुरू कर दिया है। टूटे हिस्से को बंद करने और पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं।
अधिकारियों की ओर से तटबंध के अन्य संवेदनशील हिस्सों की भी निगरानी की जा रही है, ताकि कहीं और कटाव या टूटने की स्थिति उत्पन्न न हो। जलस्तर और नदी की धारा पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
राहत-बचाव की तैयारी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में जरूरत के अनुसार नावों को तैयार रखने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन ने ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
लोगों को तेज बहाव वाले पानी में जाने से बचने और बच्चों को नदी या बाढ़ के पानी के पास नहीं जाने देने की सलाह दी गई है।