गंगा का जलस्तर बढ़ने से रेलवे अलर्ट, 24 घंटे ट्रैक पेट्रोलिंग के निर्देश सितंबर में बाढ़ के बढ़ते खतरे के बीच कटाव और ट्रैक धंसने की आशंका पर विशेष निगरानी

भागलपुर : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के बाद भागलपुर रेल मंडल के अधिकारी अलर्ट मोड में आ गए हैं। सितंबर में संभावित बाढ़ और बढ़ते जलस्तर से रेलवे ट्रैक की सुरक्षा पर पड़ने वाले असर को देखते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को 24 घंटे पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से नदी किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों से गुजरने वाली रेलवे पटरियों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि कटाव, ट्रैक धंसने या किसी अन्य तकनीकी खतरे की स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जा सके।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार बाढ़ के दौरान सबसे बड़ा खतरा रेलवे ट्रैक के आसपास मिट्टी के कटाव और जलभराव से उत्पन्न होता है। लगातार बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने से पटरियों के नीचे की मिट्टी कमजोर हो सकती है। ऐसी स्थिति में रेलवे लाइन की स्थिरता प्रभावित होने और ट्रैक धंसने की आशंका बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए संवेदनशील रेलखंडों की पहचान कर वहां निगरानी और पेट्रोलिंग बढ़ाने की तैयारी की गई है।

संवेदनशील रेलखंडों पर विशेष नजर

गंगा और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए रेलवे ने उन रेलखंडों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है, जहां बाढ़ या जलभराव का असर पड़ने की संभावना अधिक रहती है। पेट्रोलिंग टीमों को निर्देश दिया गया है कि वे दिन और रात दोनों समय ट्रैक की स्थिति की जांच करें।

कर्मचारियों को ट्रैक के आसपास मिट्टी के कटाव, पटरियों के नीचे धंसाव, पानी जमा होने, स्लीपरों की स्थिति और अन्य तकनीकी बदलावों पर नजर रखने को कहा गया है। किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत संबंधित नियंत्रण कक्ष और अधिकारियों को देने के निर्देश दिए गए हैं।

24 घंटे पेट्रोलिंग की व्यवस्था

रेलवे ने कर्मचारियों को शिफ्ट के आधार पर लगातार पेट्रोलिंग करने का निर्देश दिया है। दिन के साथ रात में भी रेलवे पटरियों का निरीक्षण किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया जा सकता है।

पेट्रोलिंग के दौरान रेलवे कर्मचारी केवल ट्रैक की सतह ही नहीं, बल्कि आसपास की जमीन और जल निकासी की स्थिति की भी निगरानी करेंगे। बारिश या जलस्तर बढ़ने के बाद विशेष निरीक्षण करने की व्यवस्था की जा रही है।

कटाव रोकने के लिए होगी त्वरित कार्रवाई

रेलवे के सामने बाढ़ के दौरान कटाव को रोकना भी एक बड़ी चुनौती है। ट्रैक के नजदीक मिट्टी का कटाव होने पर रेलवे लाइन की नींव कमजोर हो सकती है। ऐसे में समय पर बचाव कार्य नहीं होने पर रेल परिचालन प्रभावित होने का खतरा रहता है।

कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि कटाव या धंसाव का कोई भी संकेत मिलते ही इसकी सूचना तत्काल दी जाए। इसके बाद आवश्यकतानुसार मिट्टी भराई, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और तकनीकी टीम को मौके पर भेजने जैसे कदम उठाए जाएंगे।

यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिकता

रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ट्रैक की स्थिति पर लगातार नजर रखने के साथ रेल परिचालन को भी मौसम और बाढ़ की परिस्थितियों के अनुसार नियंत्रित किया जाएगा।

जरूरत पड़ने पर संवेदनशील स्थानों पर ट्रेनों की गति कम की जा सकती है। यदि किसी स्थान पर ट्रैक की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा दिखाई देता है तो पहले सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी और उसके बाद ही ट्रेन परिचालन को सामान्य किया जाएगा।

सितंबर में बढ़ सकती है चुनौती

सितंबर के दौरान गंगा और सहायक नदियों के जलस्तर में और वृद्धि की संभावना को देखते हुए रेलवे प्रशासन पहले से सतर्क हो गया है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों से भी समन्वय बनाए रखा जा रहा है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ का असर बढ़ने पर पेट्रोलिंग और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।