प्राचार्य डॉ. संजय कुमार झा ने 16 नई समितियों का किया गठन
सबौर (भागलपुर): भागलपुर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार सबौर कॉलेज में प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय कुमार झा ने संस्थान के सर्वांगीण विकास के लिए 16 नई समितियों का गठन किया है। इस ऐतिहासिक निर्णय का मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना, प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना और कॉलेज को नवाचार (Innovation) के नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए प्रेरित करना है।
नई समितियों का उद्देश्य: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विकास
प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय कुमार झा ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि इन समितियों का गठन पूरी तरह से छात्र-हितों को केंद्र में रखकर किया गया है। बदलते समय और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों की आवश्यकताओं को देखते हुए यह आवश्यक था कि कॉलेज के हर विभाग में एक जवाबदेह तंत्र विकसित किया जाए। ये समितियाँ विशेष रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन के स्तर को ऊंचा उठाने, शोध कार्यों को बढ़ावा देने और छात्रों के कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करेंगी।
प्रमुख समितियां और उनके कार्यक्षेत्र
गठित की गई 16 समितियों में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें से कुछ प्रमुख समितियां निम्नलिखित हैं:
अनुशासन एवं सुरक्षा समिति: परिसर में छात्रों के बीच अनुशासन बनाए रखने और बाहरी हस्तक्षेपों को रोकने के लिए।
शोध एवं नवाचार समिति: शिक्षकों और विद्यार्थियों को शोध कार्यों के लिए प्रोत्साहित करने और नई परियोजनाओं पर कार्य करने के लिए।
छात्र कल्याण एवं परामर्श समिति: विद्यार्थियों की समस्याओं का निराकरण करने और उन्हें करियर संबंधी मार्गदर्शन देने के लिए।
प्रशासनिक पारदर्शिता एवं मॉनिटरिंग समिति: कॉलेज के प्रशासनिक कार्यों में जवाबदेही और पारदर्शिता लाने के लिए।
सांस्कृतिक एवं खेल-कूद समिति: छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए विभिन्न गतिविधियों के आयोजन हेतु।
"संस्थागत विकास के लिए जरूरी है विकेंद्रीकरण"
प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय कुमार झा ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की सफलता उसके सुव्यवस्थित प्रशासन पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा, "प्रशासन के विकेंद्रीकरण (Decentralization) के माध्यम से हम न केवल कार्यक्षमता बढ़ाना चाहते हैं, बल्कि कॉलेज के हर विभाग में एक नवाचारी वातावरण भी बनाना चाहते हैं। इन समितियों के माध्यम से शिक्षकों को भी अपनी रचनात्मकता दिखाने का मौका मिलेगा, जिससे सीधा लाभ हमारे विद्यार्थियों को होगा।"
कॉलेज प्रशासन में एक नई ऊर्जा का संचार
कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों ने प्राचार्य के इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इन समितियों के गठन से न केवल प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी, बल्कि कॉलेज के शैक्षणिक माहौल में भी एक नई ऊर्जा का संचार होगा। इन समितियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे समय-समय पर अपनी प्रगति रिपोर्ट प्राचार्य कार्यालय को सौंपें, ताकि कार्यों की निरंतर निगरानी की जा सके।
विद्यार्थियों के लिए क्या हैं उम्मीदें?
इस पहल से सबौर कॉलेज के छात्रों में खुशी है। छात्रों का कहना है कि समितियों के गठन से उनकी शिकायतें अब सीधे संबंधित विभाग तक पहुंचेंगी और उनका समाधान भी तेज गति से होगा। साथ ही, शोध और खेल-कूद जैसी गतिविधियों में नई समितियों के सक्रिय होने से उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने के अधिक अवसर मिलेंगे।
यह निर्णय सबौर कॉलेज के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। प्राचार्य डॉ. झा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे कॉलेज को केवल एक डिग्री बांटने वाले संस्थान से बदलकर एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करना चाहते हैं। आने वाले समय में इन समितियों का प्रदर्शन ही कॉलेज की भविष्य की दिशा तय करेगा।