5 से 8 जुलाई के बीच आंधी-बारिश का पूर्वानुमान, खरीफ फसलों के लिए राहत की उम्मीद
पटना: बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, 5 से 8 जुलाई के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों में आंधी के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। मानसून के फिर से सक्रिय होने के संकेत से उन किसानों में उम्मीद की किरण जगी है, जो भीषण गर्मी और कम बारिश के कारण खरीफ की बुवाई, विशेषकर धान की रोपनी को लेकर लंबे समय से चिंतित थे।
मानसून में तेजी, किसानों के लिए राहत
जून महीने में राज्य में सामान्य से करीब 48% कम बारिश दर्ज की गई थी, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। अब मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम और उत्तर-मध्य बिहार के जिलों में मेघ गर्जन और वज्रपात के साथ तेज हवाएं (30-50 किमी प्रति घंटे) और बारिश का अलर्ट जारी किया है। 6 और 7 जुलाई को दरभंगा, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और पश्चिमी चंपारण जैसे जिलों में भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है।
खरीफ फसलों पर प्रभाव: क्या है कृषि वैज्ञानिकों की सलाह?
लंबे सूखे के बाद बारिश का यह दौर धान की खेती के लिए संजीवनी का काम कर सकता है। हालांकि, कृषि वैज्ञानिकों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और सही प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है:
धान की सीधी बुवाई (DSR): जहां अभी भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, वहां किसान धान की पारंपरिक रोपनी के बजाय 'डायरेक्ट सीडेड राइस' (सीधी बुवाई) तकनीक को अपना सकते हैं, जिसमें कम पानी की आवश्यकता होती है।
नर्सरी का प्रबंधन: वैज्ञानिकों ने मैट-टाइप (Mat-type) या डेपोग नर्सरी तैयार करने पर जोर दिया है ताकि कम समय में बेहतर पौधे तैयार किए जा सकें।
कम अवधि वाली फसलें: सूखे के जोखिम को देखते हुए, जिन क्षेत्रों में मानसून कमजोर है, वहां किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों (जैसे- मूंग, उड़द, तिल) की ओर रुख करने की सलाह दी गई है।
जल संरक्षण: खेतों की मेड़ों की मरम्मत करने और उनकी ऊंचाई बढ़ाने का सुझाव दिया गया है ताकि बारिश के पानी का अधिकतम संचयन हो सके और लंबे समय तक नमी बनी रहे।
हालांकि बारिश की संभावना ने किसानों को कुछ राहत दी है, लेकिन जानकारों का कहना है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। अल-नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण मानसून के व्यवहार में अनिश्चितता बनी हुई है। यदि इन चार दिनों में संतोषजनक बारिश नहीं होती है, तो आने वाले हफ्तों में राज्य को 'सुखाड़' जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन की तैयारी
राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन और कृषि विभाग की टीमें भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय स्तर पर बीज और सिंचाई के वैकल्पिक इंतजामों को तैयार रखें।
यह बारिश का दौर न केवल खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक जीवनरेखा की तरह है। अब देखना यह है कि अगले कुछ दिनों में आसमान से बरसने वाली यह बूंदें किसानों के खेतों में कितनी हरियाली ला पाती हैं।