दरभंगा के कृषि परिदृश्य में नई क्रांति: सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर की अध्यक्षता में मखाना और बागवानी विकास पर मंथन

दरभंगा: मिथिलांचल की पहचान बन चुके मखाना और बागवानी क्षेत्र को आधुनिक बनाने और इसे वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से दरभंगा में एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की गई। सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कृषि वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु मखाना उत्पादन को संगठित करना और बागवानी को 'हाईटेक' तकनीक से जोड़ना रहा।

कृषि विकास: बैठक के प्रमुख एजेंडे

सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि दरभंगा के पास प्राकृतिक संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन तकनीक के अभाव में किसान अभी भी पारंपरिक खेती तक ही सीमित हैं। बैठक में निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई:

हाईटेक नर्सरी का जाल: पूरे जिले में वैज्ञानिक विधियों से लैस 'हाईटेक नर्सरी' स्थापित करने पर बल दिया गया, ताकि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले फल और सब्जी के पौधे आसानी से उपलब्ध हो सकें।

ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) का विस्तार: पानी की बर्बादी को रोकने और उत्पादन बढ़ाने के लिए 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (Per Drop More Crop) के तहत ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अनिवार्य करने की रणनीति बनाई गई।

मखाना प्रसंस्करण इकाई (Processing Units): मखाना के कच्चे माल के निर्यात के बजाय स्थानीय स्तर पर ही उसके मूल्यवर्धन (Value Addition) के लिए प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्राथमिकता दी गई।

नवाचार प्रशिक्षण कार्यक्रम: किसानों को आधुनिक खेती और डिजिटल मार्केटिंग के गुर सिखाने के लिए नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

मखाना: 'मिथिला का गोल्ड' और उसकी चुनौतियां

बैठक में मखाना उद्योग पर विशेष चर्चा हुई। डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि मखाना केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि मिथिला की अर्थव्यवस्था का 'गोल्ड' है। इसके विकास के लिए:

वैज्ञानिक खेती: पारंपरिक पोखर आधारित खेती से हटकर अब टैंक और तालाबों में 'सुपरफूड' के रूप में मखाना उगाने की तकनीकों को किसानों तक पहुँचाना होगा।

ब्रांडिंग और मार्केटिंग: 'मिथिला मखाना' को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए पैकेजिंग और गुणवत्ता मानक तय किए जाएंगे।

जीआई टैग का लाभ: जीआई टैग मिलने के बाद अब इसकी मांग पूरी दुनिया में बढ़ रही है, इसलिए उत्पादन क्षमता को दोगुना करना हमारी प्राथमिकता है।

बागवानी मिशन और किसानों की समृद्धि

बैठक में बागवानी क्षेत्र के विस्तार के लिए 'एकीकृत बागवानी विकास मिशन' (MIDH) के तहत योजनाओं को धरातल पर उतारने की बात कही गई। सांसद ने कहा कि आम, लीची और केला जैसे फलों के उत्पादन के लिए दरभंगा की मिट्टी अत्यंत उपजाऊ है।

क्लस्टर आधारित खेती: अलग-अलग क्षेत्रों को विशिष्ट फलों के क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि निर्यात में आसानी हो।

शीत भंडारण (Cold Storage) की व्यवस्था: बागवानी फसलों के खराब होने से बचाने के लिए प्रखंड स्तर पर छोटे और मध्यम कोल्ड स्टोरेज बनाने पर जोर दिया गया।

डॉ. गोपाल जी ठाकुर का विजन: आत्मनिर्भर किसान

बैठक को संबोधित करते हुए सांसद ने कहा, "मेरी परिकल्पना है कि दरभंगा का किसान केवल उत्पादक न बने, बल्कि वह उद्यमी भी बने। जब हमारे मखाना उत्पादक खुद अपनी पैकेजिंग और मार्केटिंग करेंगे, तब असली आर्थिक क्रांति आएगी।"

उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही कृषि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे किसान तक पहुँचने में कोई बाधा न आए।

विशेषज्ञों की राय: तकनीक और परंपरा का मेल

कृषि वैज्ञानिकों ने बैठक में जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हमें 'स्मार्ट खेती' अपनानी होगी। ड्रिप सिंचाई न केवल पानी बचाती है, बल्कि खाद की खपत को भी 30% तक कम कर देती है, जिससे लागत कम और मुनाफा बढ़ता है।

सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर की अध्यक्षता में हुई यह बैठक किसानों के लिए एक मार्गदर्शिका की तरह है। यदि इन योजनाओं को ईमानदारी से लागू किया गया, तो आने वाले समय में दरभंगा न केवल मखाना का हब बनेगा, बल्कि बागवानी के क्षेत्र में भी एक मॉडल के रूप में उभरेगा।