दरभंगा में ई-रिक्शा चालकों की नई मुसीबत: 'मोबाइल एप' से ठप की जा रही है गाड़ियों की रफ्तार, मचा हड़कंप
दरभंगा: मिथिलांचल की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले दरभंगा में ई-रिक्शा चालकों के सामने एक नई और तकनीकी आफत आ खड़ी हुई है। शहर की सड़कों पर दौड़ते ई-रिक्शा अचानक बीच सड़क पर बंद हो रहे हैं। यह कोई सामान्य तकनीकी खराबी नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश और साइबर अपराध की बू आ रही है। ड्राइवरों का आरोप है कि शरारती तत्व मोबाइल एप के जरिए रिमोटली उनकी गाड़ियों को 'लॉक' कर रहे हैं, जिससे उनकी जीविका पर संकट गहरा गया है।
क्या है पूरा मामला?
दरभंगा के विभिन्न इलाकों में पिछले कुछ दिनों से ई-रिक्शा चालकों को एक अजीब समस्या का सामना करना पड़ रहा है। चालकों का कहना है कि जब वे सवारियों को लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे होते हैं, तो अचानक उनकी गाड़ी का सिस्टम जाम हो जाता है और वह आगे नहीं बढ़ती।
कई अनुभवी चालकों ने बताया, "हमने इसे बैटरी की समस्या समझा, लेकिन जब बार-बार ऐसा होने लगा, तो पता चला कि किसी अनजान व्यक्ति के पास हमारी गाड़ी का 'एक्सेस' (Control) है, जिसे वे मोबाइल एप के जरिए नियंत्रित कर रहे हैं।"
कैसे हो रहा है डिजिटल 'लॉक'?
ई-रिक्शा संचालकों और जानकारों के अनुसार, आधुनिक ई-रिक्शा में अब स्मार्ट फीचर्स और जीपीएस (GPS) आधारित ट्रैकिंग सिस्टम आने लगे हैं। शरारती तत्वों द्वारा इस तकनीक का दुरुपयोग किया जा रहा है।
अनधिकृत एक्सेस: संभव है कि किसी तरह से इन रिक्शाओं के सॉफ्टवेयर का 'पिन' या 'सिक्योरिटी कोड' हैक किया गया है।
मोबाइल एप का दुरुपयोग: अपराधी किसी ऐसे मोबाइल एप का उपयोग कर रहे हैं जो ई-रिक्शा के चार्जिंग और कंट्रोल सिस्टम को सीधे नियंत्रित करने की क्षमता रखता है।
ब्लैकमेलिंग की आशंका: चालकों का आरोप है कि गाड़ी बंद होने के बाद, उन्हें अज्ञात नंबरों से फोन या मैसेज आते हैं, जिसमें इसे ठीक करने के लिए या फिर 'फिरौती' के तौर पर पैसे मांगे जा रहे हैं।
एजेंसी पहुंची चालकों की भीड़
यह समस्या इतनी विकराल हो गई है कि दर्जनों की संख्या में ड्राइवर लहेरियासराय और शहर के अन्य हिस्सों में स्थित ई-रिक्शा शोरूम और सर्विस सेंटर्स पर पहुंच रहे हैं। ड्राइवरों की शिकायत है कि उनकी गाड़ियों की बैटरी और चार्जिंग सिस्टम पूरी तरह लॉक हो गए हैं।
शोरूम के मैकेनिक भी इस स्थिति को देखकर हैरान हैं। एक शोरूम प्रतिनिधि ने बताया, "गाड़ियों में ऐसी खराबी आ रही है जिसे हम सामान्य हार्डवेयर रिपेयरिंग से ठीक नहीं कर पा रहे हैं। ऐसा लगता है कि गाड़ी का मुख्य 'ईसीयू' (ECU - Electronic Control Unit) सॉफ्टवेयर स्तर पर लॉक कर दिया गया है।"
सुरक्षा पर गंभीर सवाल
दरभंगा के यातायात और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना भविष्य में आने वाली बड़ी साइबर-आपदा की ओर इशारा है।
जीपीएस की सुरक्षा: ई-रिक्शा में लगे जीपीएस सिस्टम को सुरक्षित बनाने की आवश्यकता है।
सॉफ्टवेयर अपडेट: कंपनियों को अपने स्मार्ट ई-रिक्शा के सुरक्षा फीचर्स को अपडेट करने की जरूरत है।
पुलिस में शिकायत: ड्राइवरों को सलाह दी गई है कि वे इस मामले को लेकर तुरंत साइबर सेल में प्राथमिकी दर्ज कराएं, ताकि आईपी एड्रेस और फोन नंबर के आधार पर दोषियों को पकड़ा जा सके।
ड्राइवरों की आपबीती
एक ई-रिक्शा चालक ने रोते हुए कहा, "मैंने कर्ज लेकर यह रिक्शा खरीदा था। दिन भर में 500-600 रुपये कमाता हूं, जिसमें से बैटरी चार्जिंग और ईएमआई (EMI) निकल जाती है। यदि गाड़ी ऐसे ही बंद होती रही, तो मैं अपने परिवार का पेट कैसे पालूँगा? हम तो पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे।"
प्रशासन की भूमिका और जांच की दिशा
इस मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस महकमा भी सतर्क हो गया है। साइबर सेल की टीम इस मामले की जांच में जुटी है कि आखिर वे कौन-से एप हैं जिनका इस्तेमाल गाड़ियों को लॉक करने के लिए किया जा रहा है।
पुलिस ने ई-रिक्शा कंपनियों से भी पत्राचार किया है कि वे इस सुरक्षा खामी (Security Loophole) की तत्काल जांच करें।
सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी अनजान व्यक्ति को गाड़ी का क्यूआर कोड (QR Code) या कंट्रोल सिस्टम छूने न देने की सलाह दी गई है।
ई-रिक्शा ने शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाया है, लेकिन तकनीक के साथ जुड़े ये खतरे अब चालकों के लिए अभिशाप बन गए हैं। यदि समय रहते इस डिजिटल सेंधमारी को नहीं रोका गया, तो यह न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बनेगा, बल्कि शहर में कानून-व्यवस्था के लिए भी एक चुनौती पेश करेगा।