अब 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' को जिएंगे पीएमश्री (PM SHRI) स्कूलों के बच्चे! दूसरे राज्यों की कला, संस्कृति और परंपरा को जानने के लिए केंद्र सरकार का मेगा एक्सचेंज प्रोग्राम लॉन्च

 देश की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत भारतीय संस्कृति, भाषाओं और विविधताओं को स्कूली पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी और अनूठी योजना तैयार की है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित और अपग्रेड किए जा रहे पीएमश्री (PM SHRI - PM Schools for Rising India) स्कूलों के बच्चे अब सिर्फ किताबों में दूसरे राज्यों के बारे में नहीं पढ़ेंगे, बल्कि वे खुद उन राज्यों में जाकर वहां की कला-संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान और ऐतिहासिक परंपराओं को लाइव महसूस करेंगे।

केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) द्वारा इस 'इंटर-स्टेट कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम' (Inter-State Cultural Exchange Program) को हरी झंडी दे दी गई है। इसके तहत देश के विभिन्न राज्यों के पीएमश्री स्कूलों के बच्चों को एक-दूसरे के राज्यों का दौरा कराया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' (Ek Bharat Shreshtha Bharat) को स्कूली स्तर पर जमीनी रूप से लागू करना है।

इस बड़े फैसले की रूपरेखा, इसके पीछे के मुख्य उद्देश्य और स्कूली छात्रों को इससे होने वाले फायदों की पूरी विस्तृत और इनसाइड रिपोर्ट नीचे दी गई है।

 क्या है पीएमश्री स्कूल योजना और इस नए फैसले का आधार?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यह योजना किन बच्चों के लिए है। केंद्र सरकार ने देश भर में हजारों सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने के लिए PM SHRI योजना की शुरुआत की है। इन स्कूलों में आधुनिक तकनीक, स्मार्ट क्लासरूम और नई शिक्षा नीति के मानकों के आधार पर पढ़ाई होती है।

अब, केंद्र सरकार इन स्कूलों के बच्चों के मानसिक और सांस्कृतिक क्षितिज (Cultural Horizon) को व्यापक बनाना चाहती है। सरकार का मानना है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में है। जब तक उत्तर भारत का बच्चा दक्षिण भारत की संस्कृति को और पूर्वोत्तर (North-East) का बच्चा पश्चिम भारत की परंपराओं को करीब से नहीं जानेगा, तब तक राष्ट्रीय एकता की नींव मजबूत नहीं हो सकती।

 कैसे काम करेगा यह 'सांस्कृतिक एक्सचेंज प्रोग्राम'?

शिक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए ब्लूप्रिंट के अनुसार, इस पूरे कार्यक्रम को बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा:

राज्यों के 'जोड़े' (Pairing of States) बनाना: इस योजना के तहत दो या दो से अधिक राज्यों को आपस में लिंक या पेयर किया जाएगा। उदाहरण के लिए, बिहार के पीएमश्री स्कूल के बच्चों के ग्रुप को तमिलनाडु या केरल भेजा जा सकता है, जबकि वहां के बच्चे बिहार के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों (जैसे बोधगया, नालंदा) का दौरा करने आएंगे।

स्टूडेंट एक्सचेंज टूर: प्रत्येक चयनित पीएमश्री स्कूल से मेधावी और सक्रिय छात्रों का एक दल (जिसमें लड़कियां और लड़के दोनों शामिल होंगे) तैयार किया जाएगा। यह दल गाइड और शिक्षकों की देखरेख में दूसरे राज्य के 5 से 7 दिनों के दौरे पर जाएगा।

स्थानीय परिवारों के साथ जुड़ाव: इस दौरे की सबसे खास बात यह होगी कि बच्चे न सिर्फ होटलों या गेस्ट हाउस में रुकेंगे, बल्कि उन्हें स्थानीय लोगों के घरों, वहां के त्योहारों और स्थानीय स्कूलों की गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिलेगा ताकि वे वहां के रहन-सहन को गहराई से समझ सकें।

 इन 4 मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित रहेगा बच्चों का 'लर्निंग विजन'

इस दौरे के दौरान बच्चों को मुख्य रूप से चार क्षेत्रों की गहरी समझ विकसित करने का टास्क दिया जाएगा:

कला और शिल्प (Arts and Crafts) : छात्र दूसरे राज्यों की पारंपरिक चित्रकला (जैसे बिहार की मिथिला पेंटिंग, महाराष्ट्र की वारली, या ओडिशा की पट्टचित्र), हस्तशिल्प और पारंपरिक बुनाई कला को लाइव देखेंगे और सीखेंगे।

भाषा और साहित्य (Language and Literature) : बच्चे दूसरे राज्यों की स्थानीय भाषाओं के कुछ बुनियादी शब्द, लोकगीत और लोककथाओं से परिचित होंगे। इससे उनके भीतर भाषाई सद्भाव (Linguistic Harmony) पैदा होगा।

पारंपरिक वेशभूषा और खान-पान (Attire & Cuisine) : भारत के विभिन्न राज्यों के खान-पान की विविधता और उनकी पारंपरिक पोशाकों के पीछे के वैज्ञानिक और सांस्कृतिक कारणों को समझने का यह एक बेहतरीन अवसर होगा।

ऐतिहासिक एवं धरोहर स्थल (Heritage Sites) : संबंधित राज्यों के ऐतिहासिक किलों, प्राचीन मंदिरों, संग्रहालयों और प्राकृतिक धरोहरों का भ्रमण कराकर बच्चों को भारत के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराया जाएगा।

 शिक्षा मंत्रालय का सख्त निर्देश: "दौरे के बाद सौंपनी होगी प्रोजेक्ट रिपोर्ट"

केंद्र सरकार इस योजना को केवल एक पिकनिक या मनोरंजन टूर के रूप में नहीं देखना चाहती। इसके लिए बकायदा 'लर्निंग आउटकम' (Learning Outcome) तय किए गए हैं।

मंत्रालय की गाइडलाइन: “दौरे से लौटने के बाद, भाग लेने वाले प्रत्येक छात्र को एक विस्तृत सांस्कृतिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट (Cultural Project Report) या प्रेजेंटेशन तैयार करना होगा। वे अपने स्कूल के अन्य बच्चों के साथ अपना अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा, स्कूलों में 'सांस्कृतिक प्रदर्शनी' या 'इंटर-स्टेट कार्निवल' का आयोजन किया जाएगा, ताकि जो बच्चे नहीं जा सके, वे भी इस ज्ञान का लाभ उठा सकें।” इस राष्ट्रीय कार्यक्रम से छात्रों को क्या होगा फायदा?

क्र.सं.मुख्य लाभ (Key Benefits)छात्रों के विकास पर असर
1.व्यावहारिक ज्ञान (Practical Learning)किताबी ज्ञान से इतर, चीजों को देखकर सीखना बच्चों के दिमाग पर लंबे समय तक असर छोड़ता है।
2.राष्ट्रीय एकता की भावनाजाति, धर्म और क्षेत्रीयता की दीवारों को तोड़कर बच्चे 'अनेकता में एकता' के मंत्र को आत्मसात करेंगे।
3.व्यक्तित्व विकास (Personality Development)नए माहौल में ढलने, नए लोगों से संवाद करने से छात्रों का आत्मविश्वास और लीडरशिप क्वालिटी बढ़ती है।
4.करियर के नए रास्तेविभिन्न राज्यों की कला और पर्यटन के क्षेत्रों को समझने से भविष्य में सांस्कृतिक कूटनीति, पर्यटन और इतिहास जैसे क्षेत्रों में करियर के विकल्प खुलेंगे।

केंद्र सरकार द्वारा पीएमश्री स्कूलों के लिए शुरू की गई यह सांस्कृतिक विनिमय (Cultural Exchange) योजना भारत के स्कूली शिक्षा इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम है। यह कदम बच्चों को ग्लोबल विजन (Global Vision) देने के साथ-साथ उनकी भारतीय जड़ों (Indian Roots) को और मजबूत करेगा। जब पीएमश्री स्कूलों के ये बच्चे दूसरे राज्यों की धरती पर कदम रखेंगे, तो वे सिर्फ एक छात्र के रूप में नहीं, बल्कि 'सांस्कृतिक राजदूत' के रूप में भारत को जोड़ने का काम करेंगे। निश्चित रूप से, यह योजना आने वाले दिनों में देश के स्कूली बच्चों को मानसिक और वैचारिक रूप से अधिक समृद्ध और 'श्रेष्ठ' बनाएगी!