बीसैप-9 जमालपुर में 38 लाख के बहुचर्चित राशन गबन मामले में बड़ी कार्रवाई: आरोपी मनोज कुमार गिरफ्तार, चार अन्य की सरगर्मी से तलाश जारी; पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
जमालपुर/मुंगेर (बिहार): बिहार के मुंगेर जिले के जमालपुर स्थित बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीसैप)-9 वाहिनी से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील और वित्तीय भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। इस बहुचर्चित प्रकरण ने सुरक्षा बलों और प्रशासनिक महकमे में भूचाल ला दिया है। बीसैप-9 जमालपुर में महिला पुलिस प्रशिक्षुओं (Women Police Trainees) के भोजन और राशन मद की 38 लाख रुपये से अधिक की भारी-भरकम सरकारी राशि के गबन के मामले में पुलिस ने एक मुख्य आरोपी मनोज कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि इस सनसनीखेज घोटाले में लिप्त चार अन्य आरोपी अभी भी फरार चल रहे हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
'हिन्दुस्तान' संवाददाता से प्राप्त विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, महिला प्रशिक्षुओं के पौष्टिक आहार और दैनिक खानपान के लिए आवंटित की जाने वाली सरकारी निधि में इस प्रकार की बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमिता और डकार जाने का यह मामला तब उजागर हुआ जब आंतरिक ऑडिट और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर इसकी गोपनीय जांच कराई गई। आइए जानते हैं इस 38 लाख के गबन कांड की पूरी पृष्ठभूमि, आरोपी मनोज कुमार की गिरफ्तारी, फरार चल रहे अन्य आरोपियों की संलिप्तता और पुलिस की आगे की कार्रवाई का विस्तृत विवरण।
घटना की पृष्ठभूमि: कैसे खुला 38 लाख रुपये के गबन का राज?
बीसैप-9 जमालपुर वाहिनी में विभिन्न जिलों से आई महिला आरक्षी (Women Constables) प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। इन महिला प्रशिक्षुओं के भरण-पोषण, खानपान और मेस संचालन के लिए सरकार द्वारा हर महीने नियमित रूप से लाखों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है।
मेस फंड में वित्तीय गड़बड़ी: पिछले कुछ महीनों से महिला प्रशिक्षुओं को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता में गिरावट और मेस के रख-रखाव में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें अंदरखाने तैर रही थीं। जब इस पूरे मामले की परतें उघड़ीं, तो पता चला कि कागजों पर फर्जी वाउचर और बिल दिखाकर भारी रकम का गबन किया गया है।
ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा: उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जब मेस के खातों (Mess Accounts) की गहन जांच और आंतरिक ऑडिट (Internal Audit) कराया गया, तो 38 लाख रुपये से अधिक की राशि के गबन (Embezzlement) का काला सच सामने आया। यह राशि सीधे तौर पर महिला प्रशिक्षुओं के हक और उनके भोजन के बजट से जुड़ी हुई थी, जिसे सुनियोजित तरीके से हड़प लिया गया था।
पुलिस की दबिश और आरोपी मनोज कुमार की गिरफ्तारी
घोटाले की पुष्टि होने के बाद जमालपुर थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई और पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष अनुसंधान टीम का गठन किया।
मुख्य आरोपी की धरपकड़: पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर चल रही सुरागकशी के बीच गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने इस मामले में नामजद आरोपी मनोज कुमार को दबोचने में सफलता हासिल की है। गिरफ्तारी के बाद उससे लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
गबन की गई रकम की रिकवरी की कोशिश: पुलिस अब इस बात का भी पता लगा रही है कि 38 लाख रुपये की इस भारी राशि का इस्तेमाल कहाँ-कहाँ किया गया और क्या इसे बैंक खातों में डंप किया गया या किसी अन्य संपत्ति में निवेश किया गया। आरोपी से पूछताछ के आधार पर पुलिस जप्तियों और रिकवरी की दिशा में आगे बढ़ रही है।
चार अन्य आरोपी अभी भी फरार, पुलिस की विशेष टीमें गठित
इस वित्तीय घोटाले में केवल एक व्यक्ति संलिप्त नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था, जिसमें कई अन्य कर्मी या अधिकारी भी हो सकते हैं।
फरार आरोपियों की तलाश तेज: पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में नामजद चार अन्य आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं और फरार चल रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए मुंगेर पुलिस की विशेष टीमें विभिन्न ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।
कानूनी शिकंजा: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार चल रहे चारों आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। यदि उन्होंने जल्द ही आत्मसमर्पण नहीं किया, तो उनके खिलाफ कुर्की-जपती (Attachment of Property) और इश्तेहार जारी करने की प्रक्रिया अदालत के माध्यम से शुरू की जाएगी।
महिला प्रशिक्षुओं के अधिकारों पर डाका और महकमे की किरकिरी
वर्दीधारी बल के भीतर महिला प्रशिक्षुओं के भोजन जैसे बुनियादी और संवेदनशील अधिकार के फंड में सेंध लगाना अपने आप में एक गंभीर और निंदनीय कृत्य है।
प्रशिक्षुओं का आक्रोश और आंतरिक अनुशासन: इस घटना के सामने आने के बाद बीसैप-9 वाहिनी के भीतर भी रोष का माहौल है। प्रशिक्षुओं को मिलने वाली सुविधाओं के साथ इस तरह का खिलवाड़ अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
विभाग की सख्त कार्रवाई के संकेत: पुलिस मुख्यालय और बीसैप के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले को बेहद सख्ती से लिया है। विभाग का स्पष्ट संदेश है कि भ्रष्टाचार में लिप्त चाहे कोई भी खाकीधारी या कर्मी क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा और कानून के दायरे में कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
बीसैप-9 जमालपुर में महिला प्रशिक्षुओं के भोजन मद की 38 लाख रुपये से अधिक की राशि का गबन यह साबित करता है कि सरकारी योजनाओं और फंडों में किस हद तक सेंधमारी की जा सकती है। आरोपी मनोज कुमार की गिरफ्तारी इस मामले में एक बड़ी सफलता है, लेकिन जब तक इसके अन्य चार फरार साथी कानून के शिकंजे में नहीं आते, तब तक इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश अधूरा रहेगा। मुंगेर पुलिस को चाहिए कि वह इस मामले की तह तक जाकर सभी दोषियों को बेनकाब करे और गबन की गई पाई-पाई सरकारी राशि की रिकवरी सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में इस तरह की हिम्मत करने की कोई दोबारा जुर्रत न कर सके।