सहरसा में साहस की मिसाल: करंट लगने से महिला की मौत के दौरान चचेरी सास की सूझबूझ ने बचाई कई जानें; धबौली पूर्वी पंचायत में शोक की लहर
सहरसा (बिहार): सहरसा जिले के सौर बाजार प्रखंड के अंतर्गत धबौली पूर्वी पंचायत से एक बेहद दुखद और हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। खेत में घास काटने गई महिलाओं की टोली पर अचानक आफत टूट पड़ी, जब 11,000 वोल्ट के हाई-टेंशन तार की चपेट में आने से एक महिला की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि, इस भयावह मंजर के बीच एक ऐसी महिला भी थी, जिसकी तत्परता और सूझबूझ ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया और कई अन्य महिलाओं की जान बचा ली।
'हिन्दुस्तान' संवाददाता से प्राप्त विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, गीता देवी (मृतका) समेत कुल 10 महिलाएं घास काटने के लिए खेत में गई थीं। इस घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों ने जो आंखों देखा हाल बयां किया है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। आइए जानते हैं इस दर्दनाक हादसे की विस्तृत रिपोर्ट, चचेरी सास चंद्रकला देवी की जांबाजी और प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की गई।
घटना का विवरण: घास काटने गई थीं 10 महिलाएं
धबौली पूर्वी पंचायत के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं अक्सर समूह बनाकर खेतों में पशुओं के लिए चारा (घास) काटने जाती हैं। शुक्रवार की सुबह भी गीता देवी अपनी सहेलियों और चचेरी सास चंद्रकला देवी के साथ खेत की ओर निकली थीं।
हादसे का समय और कारण: खेत के ऊपर से गुजर रहे 11,000 वोल्ट के हाई-टेंशन तार में अचानक तकनीकी खराबी आई और वह टूटकर नीचे गिर गया। जिस स्थान पर तार गिरा, वहां घास काट रहीं गीता देवी सबसे पहले उसकी चपेट में आ गईं।
तत्काल असर: करंट इतना जबरदस्त था कि गीता देवी को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे वहीं गिर पड़ीं। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। उनकी चीख सुनकर आसपास मौजूद अन्य महिलाएं सहम गईं और अफरा-तफरी मच गई।
संकट में सूझबूझ: चंद्रकला देवी बनीं 'देवदूत'
घटनास्थल पर मौजूद महिलाओं के अनुसार, तार टूटने के बाद पूरा खेत करंट की चपेट में आ गया था। यदि थोड़ी भी देर होती या महिलाएं घबराकर इधर-उधर भागतीं, तो यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता था।
चंद्रकला देवी की त्वरित कार्रवाई: गीता देवी को करंट की चपेट में देख बाकी महिलाएं घबराकर शोर मचाने लगीं। उसी समय गीता की चचेरी सास चंद्रकला देवी ने घबराने के बजाय स्थिति को भांप लिया। उन्होंने तुरंत सभी महिलाओं को चिल्लाकर आगाह किया कि कोई भी खेत की तरफ कदम न बढ़ाए और न ही गिरे हुए तार को छूने की कोशिश करे।
बड़ी घटना को टाला: चंद्रकला देवी ने अपनी जान जोखिम में डालकर सभी को सुरक्षित दूरी पर खड़ा किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अन्य महिलाओं को दिशा-निर्देश दिए कि तुरंत बिजली विभाग को सूचित किया जाए और आसपास के पुरुषों को मदद के लिए बुलाया जाए। उनकी इसी तत्परता ने उस समय खेत में मौजूद अन्य 9 महिलाओं को सुरक्षित बचा लिया, जो करंट की जद में आने से बाल-बाल बचीं।
ग्रामीण आक्रोश और प्रशासन की भूमिका
हादसे की खबर मिलते ही धबौली पूर्वी पंचायत में कोहराम मच गया। मृतका गीता देवी के परिवार में मातम छा गया है। उनके छोटे-छोटे बच्चों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
ग्रामीणों का प्रदर्शन: आक्रोशित ग्रामीणों ने धबौली-सहरसा मार्ग को जाम कर दिया और बिजली विभाग की घोर लापरवाही का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि खेत के ऊपर से गुजर रहे हाई-टेंशन तार काफी नीचे लटक रहे थे, जिसकी शिकायत कई बार विभाग से की गई थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
अधिकारियों का आश्वासन: सूचना पाकर स्थानीय पुलिस और बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। बीडीओ और सीओ ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। पंचायती राज जनप्रतिनिधियों ने भी सरकार से मृतक के परिवार को अविलंब आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
सुरक्षा के प्रति लापरवाही: एक गंभीर मुद्दा
यह घटना न केवल गीता देवी के परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि पूरे बिजली वितरण तंत्र की पोल खोलने वाली है।
क्यों गिरते हैं तार?: जर्जर तारों का रखरखाव न होना और तारों की ऊँचाई का मानकों के अनुरूप न होना बिहार के ग्रामीण इलाकों में बिजली विभाग की एक बड़ी समस्या है। आए दिन ऐसे हादसे होते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर शायद ही कोई कड़ी कार्रवाई होती है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमी: खेत-खलिहानों में बिजली विभाग को नियमित सर्वे करना चाहिए ताकि जर्जर तारों को समय रहते बदला जा सके।
गीता देवी की मौत ने धबौली पूर्वी पंचायत में एक परिवार को उजाड़ दिया, लेकिन चचेरी सास चंद्रकला देवी का साहस और उनकी सूझबूझ वाकई काबिले-तारीफ है। उन्होंने जिस तरह से संकट के क्षण में अपने आप पर नियंत्रण रखा और अन्य महिलाओं को सही निर्देश दिए, उसी की बदौलत आज 9 और घर उजड़ने से बच गए। इस घटना से यह सबक लेने की आवश्यकता है कि बिजली विभाग अपनी जवाबदेही तय करे, ताकि भविष्य में किसी और 'गीता' को इस तरह से असमय अपनी जान न गंवानी पड़े। प्रशासन को चाहिए कि वह मृतका के परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान करे और दोषी अधिकारियों की पहचान कर उन पर कठोर कार्रवाई करे।