बिहार में सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर सरकार का बड़ा ऐलान, जमीन बेचने वाले किसानों को एक माह में मिलेगा भुगतान; जबरन अधिग्रहण नहीं होगा
पटना: बिहार सरकार ने राज्य में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना को लेकर किसानों और जमीन मालिकों की चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण घोषणा की है। बुधवार को बिहार विधान परिषद के मानसून सत्र के दौरान नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने स्पष्ट किया कि टाउनशिप के लिए चिन्हित जमीन बेचने वाले किसानों और भूमि मालिकों को एक महीने के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने जमीन की जांच से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने का निर्णय लिया है ताकि किसानों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार विकास और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहती है। उन्होंने दोहराया कि सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना के लिए किसी भी किसान की जमीन जबरन अधिग्रहित नहीं की जाएगी और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तथा स्वैच्छिक होगी।
एक माह में पूरी होगी भुगतान प्रक्रिया
विधान परिषद में प्रश्नों का उत्तर देते हुए नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि सरकार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जमीन से संबंधित सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाएं।
उन्होंने कहा कि जमीन के दस्तावेजों की जांच, स्वामित्व का सत्यापन, आवश्यक औपचारिकताओं और भुगतान की प्रक्रिया को अधिकतम 30 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इससे किसानों और जमीन मालिकों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि भूमि से जुड़े सभी मामलों का त्वरित और पारदर्शी समाधान हो, जिससे विकास परियोजनाओं में भी तेजी आए और किसानों का विश्वास भी बना रहे।
इमरजेंसी स्थिति में मिलेगी जमीन बेचने की अनुमति
नीतीश मिश्रा ने बताया कि जिन किसानों या जमीन मालिकों को किसी आपातकालीन आर्थिक आवश्यकता के कारण अपनी जमीन बेचनी है, उन्हें विशेष अनुमति दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में संबंधित व्यक्ति को बिहार आवास बोर्ड में आवेदन करना होगा। आवेदन की जांच के बाद नियमानुसार अनुमति प्रदान की जाएगी, जिससे आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों को राहत मिल सके।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य विकास योजनाओं के कारण किसी भी व्यक्ति को आर्थिक कठिनाई में नहीं डालना है।
अब तक आए लगभग 750 आवेदन
मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि अब तक टाउनशिप से संबंधित जमीन बिक्री के लिए करीब 750 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इन सभी आवेदनों की जांच नियमानुसार की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आवेदन प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रही है। इस ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किसान और जमीन मालिक घर बैठे आवेदन कर सकेंगे तथा अपने आवेदन की स्थिति भी देख सकेंगे।
सरकार का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक देरी कम होगी।
किसी किसान की जमीन जबरदस्ती नहीं ली जाएगी
विधान परिषद में सबसे महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए मंत्री नीतीश मिश्रा ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी किसान की जमीन उसकी इच्छा के विरुद्ध नहीं लेगी।
उन्होंने कहा कि सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना पूरी तरह सहमति आधारित होगी। किसानों और जमीन मालिकों को प्रत्येक चरण की जानकारी दी जाएगी तथा सभी प्रक्रियाएं कानूनी प्रावधानों के अनुसार पूरी की जाएंगी।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों के अधिकारों की रक्षा करते हुए आधुनिक शहरी विकास को बढ़ावा देना है।
मास्टर प्लान अभी अंतिम चरण में
सदन में विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि सैटेलाइट टाउनशिप का मास्टर प्लान अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों द्वारा परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर काम किया जा रहा है और मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।
मंत्री के अनुसार, अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही परियोजना के विभिन्न चरणों को लागू किया जाएगा। इससे पहले सभी तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की जा रही है।
नए कार्यालय भी खोले जाएंगे
नगर विकास एवं आवास मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि जिन क्षेत्रों में आवास विभाग के कार्यालय उपलब्ध नहीं हैं, वहां नए कार्यालय खोले जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में संकल्प जारी किया जा चुका है। नए कार्यालय खुलने से आम लोगों को योजनाओं और भूमि संबंधी कार्यों के लिए दूर-दराज के जिलों में नहीं जाना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि जिन क्षेत्रों को प्लानिंग एरिया घोषित किया जा रहा है, उन्हें मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिल चुकी है। हालांकि अभी उन्हें अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
विपक्ष ने उठाए कई सवाल
सदन में विपक्षी सदस्यों ने सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने किसानों के हितों, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया, मुआवजे और पारदर्शिता को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
विपक्ष का कहना था कि विकास परियोजनाओं के साथ-साथ किसानों के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। कई सदस्यों ने यह भी मांग की कि सरकार सभी प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के साथ नियमित संवाद बनाए रखे और हर निर्णय की जानकारी सार्वजनिक करे।
सरकार ने दिया भरोसा
सरकार की ओर से कहा गया कि सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना का उद्देश्य बिहार में आधुनिक और योजनाबद्ध शहरी विकास को बढ़ावा देना है। इससे बेहतर सड़कें, आवासीय सुविधाएं, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा संस्थान, जलापूर्ति, सीवरेज और रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।
मंत्री ने कहा कि सरकार विकास कार्यों को आगे बढ़ाते हुए किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा करेगी और किसी भी स्तर पर पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जाएगा।
किसानों में बढ़ी उम्मीद
सरकार की घोषणा के बाद किसानों और जमीन मालिकों के बीच यह उम्मीद जगी है कि यदि सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से लागू होती हैं, तो उन्हें अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार एक माह के भीतर भुगतान, डिजिटल आवेदन प्रणाली और पारदर्शी प्रक्रिया जैसे वादों को प्रभावी ढंग से लागू करती है, तो सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना को लेकर लोगों का विश्वास और मजबूत हो सकता है।
आगे की राह
फिलहाल सैटेलाइट टाउनशिप का मास्टर प्लान अंतिम चरण में है और सरकार इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां कर रही है। आने वाले समय में परियोजना से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस योजना पर लगातार नजर बनी हुई है। सरकार का दावा है कि विकास और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं किसान और जमीन मालिक अब सरकार की घोषणाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन का इंतजार कर रहे हैं।