मध्य विद्यालय रामजानीपुर में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर हुआ मंथन

कहलगांव: शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कहलगांव स्थित मध्य विद्यालय, रामजानीपुर में शनिवार को एक भव्य अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (PTM) का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, स्कूल में उनकी नियमित उपस्थिति और परिसर में अनुशासन का पालन करना था।

संवाद का सेतु: शिक्षक और अभिभावक

विद्यालय परिसर में आयोजित इस संगोष्ठी की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। प्रधानाध्यापक ने सभी अभिभावकों का स्वागत करते हुए कहा कि एक बच्चे की सफलता में शिक्षक और अभिभावक, दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा, "विद्यालय केवल चारदीवारी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी प्रयोगशाला है जहाँ हम बच्चों के भविष्य का निर्माण करते हैं। इसमें अभिभावकों का सक्रिय सहयोग अनिवार्य है।"

शैक्षणिक प्रगति और उपस्थिति पर विशेष चर्चा

बैठक के दौरान प्रधानाध्यापक ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति रिपोर्ट पर चर्चा की। उन्होंने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को अभिभावकों के सामने रखा:

नियमित उपस्थिति: यह चिंताजनक है कि कई छात्र-छात्राएं विद्यालय नियमित रूप से नहीं आ रहे हैं। प्रधानाध्यापक ने अभिभावकों से अपील की कि वे सुनिश्चित करें कि उनका बच्चा हर दिन स्कूल आए, क्योंकि निरंतरता ही सीखने की नींव है।

घर पर पढ़ाई का वातावरण: उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे घर पर भी बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें और कम से कम एक घंटा पढ़ाई के लिए अलग समय निर्धारित करें।

अनुशासन का महत्व: विद्यालय में अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षकों ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को शिष्टाचार और समयबद्धता का पाठ घर से ही सिखाकर भेजें।

अभिभावकों का बहुमूल्य सुझाव और फीडबैक

अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह था जब अभिभावकों को बोलने का अवसर दिया गया। कई अभिभावकों ने विद्यालय के शैक्षणिक माहौल पर संतोष व्यक्त किया। एक अभिभावक ने सुझाव दिया कि स्कूल में खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को और अधिक बढ़ावा मिलना चाहिए। वहीं, अन्य अभिभावकों ने अध्यापकों के पढ़ाने के तरीके की सराहना की। प्रधानाध्यापक ने सभी सुझावों को गंभीरता से नोट किया और उन्हें क्रियान्वित करने का आश्वासन दिया।

'मानव सेवा ही माधव सेवा' का मंत्र

शिक्षक प्रतिनिधियों ने भी अपने संबोधन में कहा कि "बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना ही शिक्षा नहीं है, बल्कि नैतिक मूल्यों का समावेश भी अत्यंत आवश्यक है। विद्यालय परिवार ने संकल्प लिया कि वे 'मिशन मोड' में रहकर बच्चों को न केवल पाठ्यक्रम पढ़ाएंगे, बल्कि उन्हें एक बेहतर नागरिक बनाने के लिए भी प्रेरित करेंगे।

कार्यक्रम का समापन

संगोष्ठी के अंत में विद्यालय के शिक्षकों ने व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक छात्र के प्रदर्शन की जानकारी अभिभावकों के साथ साझा की। जिन विद्यार्थियों ने पिछले सत्र में बेहतर प्रदर्शन किया था, उन्हें शिक्षकों ने प्रोत्साहित किया। अभिभावकों ने विद्यालय प्रशासन को धन्यवाद देते हुए वादा किया कि वे अपने बच्चों की शिक्षा के प्रति और अधिक सतर्क रहेंगे।

यह संगोष्ठी इस बात का प्रमाण थी कि यदि विद्यालय और परिवार एक साथ मिलकर चलें, तो रामजानीपुर जैसे ग्रामीण परिवेश के विद्यालय भी शैक्षणिक उत्कृष्टता के नए कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं।