नई कॉपियों को रखने की जगह नहीं, तीन साल से नहीं हुई रद्दी की बिक्री
भागलपुर: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) इन दिनों एक अजीबोगरीब समस्या से जूझ रहा है। विश्वविद्यालय परिसर स्थित गोपनीय शाखा और विभिन्न परीक्षा केंद्रों के भंडार गृह (स्टोर रूम) पुरानी उत्तर पुस्तिकाओं से पूरी तरह भर चुके हैं। स्थिति यह है कि पिछले तीन वर्षों से पुरानी उत्तर पुस्तिकाओं की बिक्री या निपटान नहीं होने के कारण कैंपस के कमरों में कागजों का पहाड़ खड़ा हो गया है। जगह की कमी के कारण अब नई उत्तर पुस्तिकाओं को रखने के लिए भी विश्वविद्यालय प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
तीन साल का 'बदलाव' अटका
नियमों के अनुसार, परीक्षा संपन्न होने और परिणाम घोषित किए जाने के बाद एक निश्चित अवधि बीतने पर पुरानी उत्तर पुस्तिकाओं को नियमानुसार 'रद्दी' (Waste Paper) घोषित कर टेंडर के माध्यम से नीलाम किया जाता है। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और टेंडर प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण पिछले तीन वर्षों से यह बिक्री रुकी हुई है। इसके परिणामस्वरूप, विश्वविद्यालय के गोदामों में लाखों की संख्या में कॉपियां जमा हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जिन कमरों को शैक्षणिक कार्यों या गोपनीय फाइलों के भंडारण के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए था, वे अब पूरी तरह उत्तर पुस्तिकाओं से लदे हुए हैं। कई कमरों में कॉपियों के बंडल छत तक पहुंच गए हैं, जिससे कमरों की दीवारों और छत पर भी दबाव बढ़ रहा है।
नई कॉपियों के भंडारण की चुनौती
विश्वविद्यालय में नए सत्र की परीक्षाएं लगातार चल रही हैं, जिसके लिए नई उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद और भंडारण जरूरी है। लेकिन, जगह की कमी के चलते विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गोपनीय विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि नई कॉपियां आने पर उन्हें रखने के लिए अब कोई खाली जगह नहीं बची है। यदि जल्द ही पुरानी कॉपियों का निपटान नहीं किया गया, तो आने वाली परीक्षाओं के संचालन में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
सुरक्षा पर भी मंडरा रहा खतरा
केवल जगह की कमी ही नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी बड़ा मुद्दा है। उत्तर पुस्तिकाओं का अंबार लगने से विश्वविद्यालय परिसर में आग लगने का खतरा (Fire Hazard) भी बढ़ गया है। सूखी कागजों की भारी मात्रा के कारण थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। इसके अलावा, पुरानी कॉपियों में छात्रों का डेटा होता है, जिनका लंबे समय तक यूं ही खुले में पड़े रहना गोपनीयता के नियमों के भी विरुद्ध माना जाता है।
इस मामले पर विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि पुरानी उत्तर पुस्तिकाओं की बिक्री के लिए प्रक्रिया शुरू की जा रही है। टेंडर निकालने की फाइल आगे बढ़ाई गई है, और जल्द ही निविदा (Tender) आमंत्रित कर पुरानी कॉपियों को नीलाम कर दिया जाएगा। हालांकि, यह सवाल अभी भी कायम है कि पिछले तीन वर्षों तक इसे लेकर इतनी देरी क्यों हुई और इसके लिए जवाबदेह कौन है।
छात्र संगठनों ने भी इस स्थिति पर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की इस लापरवाही से न केवल कैंपस का स्थान व्यर्थ हो रहा है, बल्कि विश्वविद्यालय के संसाधनों का भी नुकसान हो रहा है।
विश्वविद्यालय के लिए अब यह चुनौती है कि वह जल्द से जल्द इन कागजों के ढेर को हटाकर कैंपस को व्यवस्थित करे ताकि नई शैक्षणिक गतिविधियों में कोई रुकावट न आए।