नीट परीक्षा में दिखी बढ़ी कठिनाई, विद्यार्थियों ने कहा- 2025 से भी ज्यादा कठिन रहा पेपर

मुजफ्फरपुर। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में शामिल हुए विद्यार्थियों ने इस वर्ष के प्रश्नपत्र को पिछले वर्ष की तुलना में अधिक कठिन बताया है। परीक्षा समाप्त होने के बाद केंद्रों से बाहर निकले अधिकांश अभ्यर्थियों का कहना था कि वर्ष 2026 का पेपर 2025 के मुकाबले अधिक चुनौतीपूर्ण रहा। खासकर फिजिक्स और केमेस्ट्री के प्रश्नों ने छात्रों को काफी परेशान किया, जबकि बायोलॉजी का सेक्शन अपेक्षाकृत आसान और संतुलित माना गया।

मुजफ्फरपुर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देकर निकले छात्रों के चेहरे पर मिश्रित भाव देखने को मिले। कुछ छात्र प्रश्नपत्र को संतुलित बता रहे थे, जबकि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का मानना था कि इस बार प्रश्नों का स्तर अपेक्षा से अधिक कठिन था। छात्रों के अनुसार कई ऐसे टॉपिक से प्रश्न पूछे गए, जिन पर पिछले कई वर्षों से फोकस नहीं किया गया था। इससे कई परीक्षार्थियों को समय प्रबंधन में कठिनाई का सामना करना पड़ा।

बायोलॉजी रही राहत का विषय

अधिकांश छात्रों ने बताया कि बायोलॉजी सेक्शन अपेक्षाकृत आसान था। एनसीईआरटी आधारित प्रश्नों की संख्या अधिक रही और अवधारणात्मक प्रश्नों का स्तर भी सामान्य था। जिन विद्यार्थियों ने नियमित रूप से एनसीईआरटी का अध्ययन किया था, उन्हें इस खंड में ज्यादा परेशानी नहीं हुई।

छात्रों का कहना था कि बायोलॉजी के अधिकांश प्रश्न सीधे पाठ्यक्रम से जुड़े हुए थे। हालांकि कुछ प्रश्नों में अवधारणात्मक समझ की आवश्यकता थी, लेकिन कुल मिलाकर यह सेक्शन स्कोरिंग साबित हो सकता है।

एक छात्रा ने बताया, “बायोलॉजी का पेपर उम्मीद के मुताबिक था। अगर किसी ने एनसीईआरटी अच्छी तरह पढ़ी है तो इस सेक्शन में अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।”

फिजिक्स ने बढ़ाई मुश्किलें

परीक्षार्थियों के अनुसार सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण विषय फिजिक्स रहा। इस खंड में कई प्रश्न अवधारणात्मक और गणनात्मक थे, जिन्हें हल करने में अधिक समय लगा। कई छात्रों ने कहा कि प्रश्नों का स्तर मेडिकल प्रवेश परीक्षा के अनुरूप तो था, लेकिन कठिनाई का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में अधिक महसूस हुआ।

फिजिक्स के कुछ प्रश्न ऐसे अध्यायों से पूछे गए जिन पर आमतौर पर कम ध्यान दिया जाता है। इसके कारण कई विद्यार्थियों को उत्तर देने में परेशानी हुई। समय की कमी के चलते कुछ छात्रों को कई प्रश्न छोड़ने भी पड़े।

एक अभ्यर्थी ने कहा, “फिजिक्स का पेपर काफी लंबा और कठिन था। कई प्रश्नों को हल करने में अपेक्षा से अधिक समय लगा। इससे बाकी सेक्शन के लिए समय कम बचा।”

केमेस्ट्री में भी रहे कठिन प्रश्न

केमेस्ट्री सेक्शन को भी छात्रों ने आसान नहीं माना। ऑर्गेनिक, इनऑर्गेनिक और फिजिकल केमेस्ट्री तीनों भागों से प्रश्न पूछे गए थे। कई विद्यार्थियों ने कहा कि कुछ प्रश्न सीधे नहीं थे और उन्हें हल करने के लिए गहरी समझ की आवश्यकता थी।

विशेष रूप से ऑर्गेनिक केमेस्ट्री के कुछ प्रश्नों ने छात्रों को उलझन में डाला। वहीं फिजिकल केमेस्ट्री में गणनात्मक प्रश्नों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही। विद्यार्थियों का मानना है कि इस बार केवल रटकर पढ़ाई करने वाले छात्रों को कठिनाई का सामना करना पड़ा होगा।

पुराने और कम चर्चित टॉपिक से आए सवाल

इस वर्ष के प्रश्नपत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि कई प्रश्न ऐसे विषयों से पूछे गए जिन पर पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा प्रश्न नहीं आए थे। इससे अभ्यर्थियों को आश्चर्य हुआ।

शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा का उद्देश्य छात्रों की व्यापक तैयारी और विषय की गहराई को परखना था। इसलिए प्रश्नपत्र तैयार करने वालों ने पाठ्यक्रम के विभिन्न हिस्सों को शामिल किया। इससे केवल महत्वपूर्ण अध्यायों पर निर्भर रहने वाले छात्रों को नुकसान हो सकता है।

कोचिंग संस्थानों के विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस बार प्रश्नपत्र में विविधता देखने को मिली। इससे परीक्षा अधिक प्रतिस्पर्धी बन गई और वास्तविक तैयारी करने वाले छात्रों को लाभ मिल सकता है।

कट-ऑफ पर पड़ सकता है असर

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देशभर में छात्रों की प्रतिक्रिया समान रही तो इस वर्ष नीट की कट-ऑफ पर असर पड़ सकता है। कठिन प्रश्नपत्र के कारण औसत अंक कम रहने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा हमेशा की तरह कड़ी रहेगी, लेकिन यदि पेपर वास्तव में पिछले वर्ष की तुलना में कठिन रहा है तो कट-ऑफ में कुछ गिरावट देखने को मिल सकती है।

हालांकि अंतिम स्थिति का आकलन आधिकारिक उत्तर कुंजी और परिणाम जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

अभिभावकों की भी बढ़ी चिंता

परीक्षा केंद्रों के बाहर अभिभावकों में भी उत्सुकता और चिंता देखने को मिली। परीक्षा समाप्त होने के बाद जब छात्रों ने पेपर को कठिन बताया तो कई अभिभावक परिणाम को लेकर चिंतित दिखाई दिए।

एक अभिभावक ने कहा कि बच्चों ने पूरे वर्ष मेहनत की है और अब सबकी निगाहें परिणाम पर टिकी हैं। उनका मानना है कि यदि प्रश्नपत्र वास्तव में कठिन था तो मूल्यांकन और कट-ऑफ तय करते समय इस पहलू को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

विशेषज्ञों की राय

विषय विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा का उद्देश्य केवल तथ्यों की जानकारी नहीं बल्कि अवधारणात्मक समझ, विश्लेषण क्षमता और समय प्रबंधन का परीक्षण करना होता है। इस दृष्टि से देखा जाए तो इस बार का प्रश्नपत्र छात्रों की गहन तैयारी को परखने वाला रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जिन छात्रों ने पूरे पाठ्यक्रम का व्यवस्थित अध्ययन किया होगा और नियमित अभ्यास किया होगा, उन्हें बेहतर प्रदर्शन का लाभ मिल सकता है। वहीं सीमित टॉपिक पर निर्भर रहने वाले अभ्यर्थियों को कठिनाई हुई होगी।

परिणाम का इंतजार

फिलहाल परीक्षा समाप्त होने के बाद विद्यार्थी और अभिभावक उत्तर कुंजी तथा परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में विभिन्न कोचिंग संस्थान संभावित कट-ऑफ और प्रश्नपत्र विश्लेषण जारी करेंगे, जिससे छात्रों को अपनी संभावित रैंक का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी।

मुजफ्फरपुर सहित पूरे देश से मिल रही प्रतिक्रियाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि इस वर्ष की नीट परीक्षा ने विद्यार्थियों की तैयारी को गहराई से परखा। बायोलॉजी ने जहां कुछ राहत दी, वहीं फिजिक्स और केमेस्ट्री ने अभ्यर्थियों की वास्तविक परीक्षा ली। अब सभी की निगाहें परिणाम और कट-ऑफ पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि कठिन माने जा रहे इस प्रश्नपत्र का अंतिम प्रभाव छात्रों के प्रदर्शन पर कितना पड़ता है।