बिहार सहित देशभर में अलर्ट, सुरक्षा के लिए 8-सूत्रीय कार्ययोजना लागू

पटना/नई दिल्ली: मानसून के आगमन के साथ ही देशभर में डेंगू के बढ़ते खतरों को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक विशेष राष्ट्रीय रणनीति लागू की है, जिसे 'नेशनल डेंगू स्ट्रेटेजी ऑक्टालॉग' (National Dengue Strategy Octalog) नाम दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह 8-सूत्रीय कार्ययोजना विशेष रूप से उन राज्यों और जिलों के लिए बनाई गई है, जहां हर साल डेंगू का प्रकोप अधिक देखा जाता है। बिहार के भागलपुर सहित कई जिलों में प्रशासन ने इस रणनीति के क्रियान्वयन को लेकर तैयारी शुरू कर दी है।

क्या है 'ऑक्टालॉग' रणनीति?

'ऑक्टालॉग' का सीधा अर्थ आठ स्तंभों (pillars) वाली एक व्यापक कार्ययोजना है। इसका मुख्य उद्देश्य डेंगू के प्रसार को रोकने, संक्रमण की निगरानी करने और रोगियों के इलाज की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।

इस रणनीति के मुख्य 8 बिंदु इस प्रकार हैं:

सघन निगरानी (Surveillance): रोग की स्थिति की निरंतर निगरानी करना ताकि संभावित हॉटस्पॉट्स और मामलों की जल्द पहचान हो सके।

प्रभावी केस प्रबंधन (Case Management): अस्पतालों में प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज की व्यवस्था करना ताकि जटिल मामलों को समय पर संभाला जा सके और मृत्यु दर को न्यूनतम रखा जा सके।

वेक्टर (मच्छर) प्रबंधन: एडीज मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाना।

प्रकोप पर त्वरित प्रतिक्रिया (Outbreak Response): किसी भी क्षेत्र में मामले बढ़ते ही वहां तत्काल फागिंग और स्वच्छता अभियान चलाकर संक्रमण को फैलने से रोकना।

क्षमता निर्माण (Capacity Building): स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन वर्करों को आधुनिक जांच तकनीकों और उपचार के तरीकों में प्रशिक्षित करना।

जन-जागरूकता (Behavior Change Communication): लोगों की आदतों में बदलाव लाने के लिए व्यापक प्रचार करना, ताकि वे घरों और आसपास पानी जमा न होने दें।

अंतर-विभागीय समन्वय (Inter-sectoral Coordination): स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर निगम, शिक्षा विभाग और अन्य सामुदायिक संगठनों के बीच तालमेल बिठाकर काम करना।

निगरानी एवं पर्यवेक्षण (Monitoring and Supervision): लागू की गई रणनीतियों की समय-समय पर समीक्षा करना और कमियों को तुरंत दुरुस्त करना।

बिहार में तैयारियों पर विशेष जोर

बिहार के कई शहरी क्षेत्रों में पिछले वर्षों में डेंगू के मामलों में काफी वृद्धि देखी गई है। जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल विभाग के अनुसार, इस साल इस राष्ट्रीय रणनीति के तहत विशेष रूप से 'ड्राई डे' (Dry Day) मनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक सप्ताह कूलर, गमले, फ्रिज की ट्रे और पुराने बर्तनों की सफाई करना अनिवार्य बनाया गया है। प्रशासन की ओर से अपील की गई है कि लोग स्वयं दवा लेने के बजाय बुखार आने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में जांच करवाएं।

प्रशासन की हिदायत और जनता की जिम्मेदारी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि डेंगू का एडीज मच्छर मुख्य रूप से साफ और स्थिर पानी में पनपता है। सरकार ने सभी राज्यों को यह निर्देश दिया है कि वे सरकारी अस्पतालों में डेंगू जांच और प्लेटलेट्स के इलाज की सुविधा नि:शुल्क सुनिश्चित करें।

इसके साथ ही, आम नागरिकों के लिए 'स्वच्छता ही सुरक्षा' का मूल मंत्र दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन केवल संसाधनों की व्यवस्था कर सकता है, लेकिन मच्छरों के खात्मे के लिए जन-सहयोग अनिवार्य है। मानसून के दौरान पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना, मच्छरदानी का उपयोग करना और जलजमाव को रोकना ही इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी हथियार है।