लहेरियासराय में पेट्रोल पंप पर करोड़ों का गबन: प्रबंधक कंचन कुमार चौधरी पर 90 लाख से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप, प्राथमिकी दर्ज
लहेरियासराय: दरभंगा जिले के लहेरियासराय थाना क्षेत्र अंतर्गत बेंता स्थित एक प्रतिष्ठित पेट्रोल पंप पर 90 लाख रुपये से अधिक के गबन का मामला सामने आया है। इस घटना ने व्यापारिक जगत में हड़कंप मचा दिया है। पेट्रोल पंप के संचालक द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रबंधक के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पेट्रोल पंप के संचालक पंकज कुमार पराशर ने लहेरियासराय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने अपने ही पेट्रोल पंप के प्रबंधक कंचन कुमार चौधरी पर विश्वासघात और वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
संचालक के अनुसार, बीते कुछ महीनों से पेट्रोल पंप के हिसाब-किताब में विसंगतियां (discrepancies) सामने आ रही थीं। जब उन्होंने खातों का गहन मिलान (Audit) करवाया, तो यह जानकर उनके होश उड़ गए कि कुल 90 लाख रुपये से अधिक की राशि का हिसाब गायब है। यह राशि पेट्रोल और डीजल की दैनिक बिक्री से प्राप्त हुई थी, जिसे बैंक में जमा करने के बजाय खुर्द-बुर्द कर दिया गया।
प्रारंभिक जांच: कैसे हुआ खुलासा?
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि प्रबंधक कंचन कुमार चौधरी पिछले एक लंबे समय से इस खेल को अंजाम दे रहे थे। कार्यप्रणाली कुछ इस प्रकार थी:
दैनिक बिक्री में हेराफेरी: पंप पर होने वाली दैनिक बिक्री की राशि को बैंक में जमा करने के बजाय प्रबंधक द्वारा अपने व्यक्तिगत या अन्य खातों में डायवर्ट किया जा रहा था।
दस्तावेजों में जालसाजी: प्रबंधक द्वारा बैंक के जाली रसीदें और फर्जी एंट्री बनाकर संचालक को गुमराह किया जा रहा था।
लेखा-जोखा का मिलान न होना: जब संचालक ने पेट्रोल कंपनी के स्टॉक और वास्तविक नकद जमा (Cash Deposit) के बीच के अंतर की जांच की, तो 90 लाख रुपये से अधिक का बड़ा अंतर पाया गया।
संचालक की शिकायत और पुलिस की कार्रवाई
पंकज कुमार पराशर ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा है कि प्रबंधक ने न केवल पैसों का गबन किया है, बल्कि उन्हें और उनके प्रतिष्ठान की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने पुलिस से प्रबंधक की संपत्ति की जांच करने और गबन की गई राशि की वसूली सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
लहेरियासराय थाना अध्यक्ष ने बताया:
"संचालक के आवेदन पर मामला दर्ज कर लिया गया है। प्रारंभिक जांच में गबन की बात स्पष्ट हो रही है। फिलहाल आरोपी प्रबंधक फरार है। पुलिस की एक टीम उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है और बैंक खातों की भी गहन जांच की जा रही है।"
क्षेत्र में चर्चा का विषय
बेंता जैसे व्यस्त इलाके में स्थित इस पेट्रोल पंप पर हुई इस बड़ी चोरी ने लोगों को हैरान कर दिया है। शहर के व्यापारियों में इस बात को लेकर चिंता है कि एक विश्वासपात्र व्यक्ति किस तरह इतने लंबे समय तक बिना पकड़े गए धोखाधड़ी कर सकता था।
कानून और आगे की राह
पुलिस इस मामले में आईपीसी (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गबन की गई राशि का पता समय पर नहीं चलता, तो यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गबन में प्रबंधक के अलावा अन्य कर्मचारी या बाहरी लोग भी शामिल थे।
यह मामला इस बात का एक कड़ा उदाहरण है कि व्यापार में 'विश्वास' (Trust) का स्थान सर्वोपरि है, लेकिन उसी विश्वास का गलत लाभ उठाकर कैसे एक व्यक्ति पूरे संस्थान को आर्थिक संकट में डाल सकता है। पेट्रोल पंप प्रबंधन ने अब सभी कर्मचारियों के लिए नई 'सिक्योरिटी ऑडिट' और 'डिजिटल ट्रांजैक्शन' पॉलिसी को अनिवार्य कर दिया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।