'रेड रन' के जरिए सहरसा में एड्स के खिलाफ महा-जागरूकता: राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय के छात्रों ने दौड़कर दिया स्वस्थ समाज का संदेश
सहरसा: स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकार की दिशा में एक अनुकरणीय पहल करते हुए सहरसा के प्रतिष्ठित राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की इकाई ने एक विशाल 'रेड रन' (Red Run) दौड़ का आयोजन किया। यह कार्यक्रम बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के सहयोग से 'रेड रिबन क्लब' के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। इस दौड़ का मुख्य उद्देश्य युवाओं के बीच एड्स (AIDS) जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना, भ्रांतियों को दूर करना और समाज को एक स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य के लिए प्रेरित करना था।
'रेड रन': जागरूकता की दौड़
सुबह के समय महाविद्यालय परिसर से शुरू हुई इस 'रेड रन' में छात्रों और छात्राओं ने अत्यंत उत्साह के साथ हिस्सा लिया। दौड़ का झंडा दिखाकर शुभारंभ करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य और NSS कार्यक्रम पदाधिकारियों ने कहा कि एड्स आज भी एक वैश्विक चुनौती बनी हुई है, और इस चुनौती से लड़ने का सबसे प्रभावी हथियार 'जागरूकता' है।
दौड़ में भाग लेने वाले युवाओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर ले रखे थे, जिन पर एड्स से जुड़े स्लोगन लिखे थे, जैसे—"एड्स को नहीं, लोगों को गले लगाएं", "सावधानी ही बचाव है", और "जागरूक बनिए, सुरक्षित रहिए"। यह दौड़ शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी, जिसने आम नागरिकों का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य: भ्रांतियों को मिटाना
बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम के पीछे एक गहरा सामाजिक उद्देश्य था। आयोजकों ने बताया कि आज भी समाज के एक बड़े वर्ग में एड्स को लेकर गलत धारणाएं हैं। लोग संक्रमित व्यक्ति के साथ बैठने या छूने से कतराते हैं। इस दौड़ के माध्यम से छात्रों ने यह संदेश दिया कि:
एड्स छूने या साथ बैठने से नहीं फैलता।
एड्स से संक्रमित व्यक्ति के प्रति सहानुभूति और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है।
नियमित जांच और सही जानकारी के माध्यम से ही इस बीमारी की श्रृंखला को तोड़ा जा सकता है।
छात्र शक्ति: बदलाव की अग्रदूत
दौड़ के बाद महाविद्यालय के प्रांगण में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान NSS स्वयंसेवकों ने नुक्कड़ नाटक और भाषण के माध्यम से एड्स के संक्रमण के कारणों (जैसे असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुइयों का उपयोग, और रक्त के आदान-प्रदान में सावधानी) पर प्रकाश डाला।
राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी सक्रिय भागीदारी से यह सिद्ध कर दिया कि कोसी क्षेत्र की युवा पीढ़ी अब केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सामाजिक कुरीतियों और बीमारियों के विरुद्ध जंग लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विशेषज्ञों की राय: "जानकारी ही सुरक्षा है"
कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा ही इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है। कॉलेज स्तर पर रेड रिबन क्लब के माध्यम से छात्रों को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे अपने-अपने गांव और टोले में जाकर लोगों को एड्स के प्रति सचेत कर सकें। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि एड्स का इलाज नहीं, बल्कि इसके प्रति 'सावधानी' ही एकमात्र बचाव है।
पुरस्कार और सम्मान
दौड़ में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले छात्र और छात्राओं को महाविद्यालय की ओर से पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान कॉलेज के शिक्षकों ने कहा कि यह दौड़ केवल एक खेल नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का प्रदर्शन है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को 'एड्स योद्धा' (AIDS Warrior) के रूप में कार्य करने की शपथ दिलाई।
राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय में आयोजित यह 'रेड रन' कार्यक्रम मात्र एक दौड़ नहीं थी, बल्कि यह सामाजिक चेतना की एक मशाल थी। सहरसा जैसे जिले में, जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता के स्तर को निरंतर सुधारने की आवश्यकता है, वहां युवाओं का ऐसा कदम सराहनीय है।
इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि युवा संकल्प ले लें, तो समाज से किसी भी प्रकार के अंधविश्वास और बीमारी को जड़ से मिटाया जा सकता है। एड्स के विरुद्ध इस महा-दौड़ ने न केवल छात्रों को स्वस्थ रहने का संदेश दिया, बल्कि सहरसा के नागरिकों को भी यह याद दिलाया कि समाज की सुरक्षा और सेहत के प्रति हमारी सामूहिक जवाबदेही है।