समाज कल्याण विभाग का बड़ा कदम; प्रदेश में संचालित 40 बाल व आश्रय गृहों के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से मिलेगी चौबीस घंटे वाहन सुविधा, अस्पताल और न्यायालय आने-जाने में होगी आसानी

पटना, विशेष संवाददाता: बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग (Social Welfare Department) ने राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित होने वाले बाल गृहों, आश्रय गृहों और सुरक्षा संस्थानों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुगम आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लिया है। विभाग के निर्देशानुसार, प्रदेश भर में संचालित 40 विशेष गृहों के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए चौबीस घंटे चार पहिया वाहन उपलब्ध कराने की मंजूरी दे दी गई है। इस निर्णय से न केवल संस्थाओं में रहने वाले बच्चों को समय पर चिकित्सीय और न्यायिक सहायता मिल सकेगी, बल्कि भागलपुर समेत तमाम जिलों में प्रशासनिक सुगमता भी बढ़ेगी। इसके लिए राज्य सरकार ने कुल 3.60 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।

क्यों पड़ी इस व्यवस्था की आवश्यकता?

राज्य के विभिन्न आवासीय संस्थानों में अनाथ, बेसहारा, विधि विवादित या देखरेख के अभाव वाले बच्चे निवास करते हैं। इन बच्चों के कल्याण और सुरक्षा की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाले संस्थानों पर होती है।

अस्पताल और न्यायालय की अनिवार्यता: अक्सर इन बच्चों को रूटीन स्वास्थ्य जांच, गंभीर बीमारी की स्थिति में आपातकालीन इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा, विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उन्हें तय तिथियों पर किशोर न्याय बोर्ड (JJB) या न्यायालयों में भी उपस्थापित करना होता है।

परिवहन की थी बड़ी समस्या: अब तक इन संस्थानों के पास नियमित और समर्पित वाहन न होने के कारण आपात स्थिति में बच्चों को अस्पताल पहुंचाने या कोर्ट ले जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बार प्रशासनिक वाहनों के अभाव में विलंब भी हो जाता था। बच्चों की इन व्यावहारिक और गंभीर समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ही विभाग ने इस नई व्यवस्था का मार्ग प्रशस्त किया है।

विभिन्न श्रेणियों के 40 गृहों को मिलेगा सीधा लाभ

समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाली मूलभूत सुविधाओं का कार्य देखने वाली राज्य बाल संरक्षण समिति (State Child Protection Society) ने महालेखाकार (एजी) को इस पूरी योजना और वित्तीय स्वीकृति की आधिकारिक जानकारी दे दी है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में राज्य के अंदर विभिन्न श्रेणियों के कुल 40 गृह संचालित हो रहे हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:

बृहद आश्रय गृह: राज्य में ऐसे 12 बृहद आश्रय गृह संचालित हैं, जहां बच्चों के रहने, खाने और उनके पुनर्वास की व्यापक व्यवस्था होती है।

पर्यवेक्षण गृह (Observation Homes): किशोर न्याय अधिनियम के तहत विधि विवादित किशोरों के लिए सूबे में कुल 23 पर्यवेक्षण गृह संचालित किए जा रहे हैं।

सुरक्षित स्थान (Places of Safety): गंभीर मामलों से जुड़े किशोरों के लिए प्रदेश में 5 सुरक्षित स्थान बनाए गए हैं।

इन सभी वर्तमान और निकट भविष्य में पूरी तरह क्रियाशील होने वाले गृहों को इस नई परिवहन योजना के दायरे में रखा गया है, जिससे किसी भी संस्थान का बच्चा वाहन की कमी के कारण बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे।

आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से होगी गाड़ियों की व्यवस्था, तय हुआ बजट

इस पूरी योजना को पारदर्शी और सुचारू रूप से चलाने के लिए वाहनों का अधिग्रहण निजी क्षेत्र की पंजीकृत एजेंसियों के जरिए किया जाएगा:

प्रति वाहन मासिक खर्च: विभाग द्वारा तय किए गए प्रावधान के मुताबिक, प्रत्येक गृह के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से चौबीस घंटे (24x7) एक-एक चार पहिया वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए 75 हजार रुपये प्रति माह प्रति वाहन की दर निर्धारित की गई है।

मानदेय और भाड़ा शामिल: इस निर्धारित राशि के अंतर्गत ही गाड़ी का किराया (Vehicle Rent) और चालक (Driver) का मानदेय दोनों चीजें शामिल होंगी, ताकि एजेंसी को भुगतान करने और व्यवस्था बनाए रखने में किसी प्रकार की प्रशासनिक अड़चन न आए।

आपातकालीन उपयोग: यह वाहन पूरी तरह से संबंधित गृह के अधीक्षक (Superintendent) के अधीन रहेगा, ताकि रात-विरात या किसी भी आकस्मिक परिस्थिति (Medical Emergency) में तुरंत गाड़ी का उपयोग किया जा सके।

भागलपुर समेत सभी जिलों के संस्थानों में बढ़ेगी कार्यकुशलता

समाज कल्याण विभाग के इस निर्णय से भागलपुर समेत राज्य के सभी जिलों में स्थित बाल व सुरक्षा गृहों के प्रबंधकों ने राहत की सांस ली है। भागलपुर में संचालित होने वाले गृहों को भी इस वित्तीय आवंटन और आउटसोर्सिंग सुविधा का सीधा लाभ मिलेगा। स्थानीय स्तर पर बाल संरक्षण अधिकारियों और गृह अधीक्षकों का कहना है कि अब बच्चों को अस्पताल या कोर्ट ले जाने के लिए निजी वाहनों के इंतजाम या किराए पर गाड़ी खोजने की माथापच्ची से मुक्ति मिल जाएगी। एक कॉल पर गाड़ी उपलब्ध होने से बच्चों के कानूनी अधिकारों और स्वास्थ्य रक्षा की गारंटियां और अधिक पुख्ता होंगी। 

समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश के 40 गृहों के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से वाहन सुविधा उपलब्ध कराने का यह निर्णय बाल अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी और बेहद संवेदनशील कदम है। 3.60 करोड़ रुपये के इस वित्तीय प्रावधान से न केवल संस्थागत बच्चों का जीवन सुगम होगा, बल्कि प्रशासनिक कामकाज में भी अभूतपूर्व पारदर्शिता और गति आएगी। यह पहल साबित करती है कि सरकार समाज के सबसे उपेक्षित और संवेदनशील तबके के बच्चों की देखरेख और उनके मानवीय अधिकारों के प्रति पूरी तरह गंभीर है।