दरभंगा में मां श्यामा न्याय मंच का फूटा आक्रोश: मंदिर परिसर के बाहरी गेट पर दिया गया जोरदार धरना; अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच की मांग के साथ सौंपी गई 14 सूत्री मांगें
दरभंगा: बिहार के विश्वविख्यात और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रख्यात मां श्यामा मंदिर परिसर इन दिनों अपनी धार्मिक गरिमा के साथ-साथ गंभीर प्रशासनिक अव्यवस्थाओं और कुप्रबंधन को लेकर सुर्खियों में आ गया है। दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) परिसर में स्थित प्रसिद्ध मां श्यामा मंदिर (Maa Shyama Temple) में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, लूट-खसोट और मनमाने रवैये के खिलाफ स्थानीय युवाओं, भक्तों और छात्र नेताओं का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। भ्रष्टाचार और कुप्रव्यवस्था के विरोध में 'मां श्यामा न्याय मंच' (Maa Shyama Nyay Manch) के बैनर तले बुधवार को मंदिर परिसर के बाहरी गेट के समक्ष एक विशाल और धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस विरोध-प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में छात्र नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और मंदिर प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मंदिर के अंदर चल रहे कथित भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए प्रशासन को अपनी 14 सूत्री मांग पत्र सौंपा है।
धरने की पृष्ठभूमि: क्यों सुलग रहा है मां श्यामा मंदिर परिसर?
मां श्यामा मंदिर केवल दरभंगा ही नहीं, बल्कि पूरे देश और विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है। यहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से मंदिर के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को लेकर लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे थे।
अव्यवस्था और श्रद्धालुओं की परेशानी: न्याय मंच से जुड़े छात्र नेताओं का आरोप है कि मंदिर परिसर में आने वाले दूर-दराज के श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई और जूता-चप्पल घर के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं, जबकि भक्तों से मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है।
चंदा और चढ़ावे में पारदर्शिता की कमी: आरोप है कि मंदिर न्यास समिति (Shyama Temple Trust) और प्रबंधन के पास आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे, दान और विकास राशि का कोई पारदर्शी हिसाब-किताब जनता के सामने नहीं रखा जाता है। वित्तीय अनियमितताओं और मनमाने खर्चों के कारण मंदिर की पवित्रता और व्यवस्था दोनों को भारी आघात पहुंच रहा है।
छात्र नेताओं और न्याय मंच की प्रमुख 14 सूत्री मांगें
मंदिर के बाहरी गेट पर दिए गए इस धरने के दौरान मां श्यामा न्याय मंच और छात्र नेताओं ने एक सुर में प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। उनकी प्रमुख 14 सूत्री मांगें निम्नलिखित हैं:
उच्चस्तरीय न्यायिक जांच: मंदिर परिसर में पिछले कई वर्षों से हुए वित्तीय लेन-देन, चढ़ावे की राशि और विकास कार्यों में हुए कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
मंदिर न्यास समिति का पुनर्गठन: मंदिर संचालन समिति में पारदर्शिता लाने के लिए स्थानीय बुद्धिजीवियों, प्रबुद्ध नागरिकों और श्रद्धालुओं को शामिल करते हुए न्यास का पुनर्गठन किया जाए।
दान पेटी और चढ़ावे की डिजिटल मॉनिटरिंग: मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की राशि की गिनती सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हो और उसका पूरा विवरण ऑनलाइन सार्वजनिक किया जाए।
श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं: मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों के लिए शुद्ध पेयजल, अत्याधुनिक शौचालय, विश्राम कक्ष और शेड की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पारदर्शी पारिश्रमिक और रोजगार: मंदिर से जुड़े कर्मचारियों और पुजारियों के मानदेय को पारदर्शी बनाया जाए और स्थानीय युवाओं को उचित रोजगार प्राथमिकता दी जाए।
सुरक्षा व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण: असामाजिक तत्वों और अवैध वसूली करने वालों पर नकेल कसने के लिए परिसर में पुलिस बल की स्थायी तैनाती और सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया जाए।
वाहन पार्किंग और जूता घर की मुफ्त व्यवस्था: श्रद्धालुओं से अवैध रूप से वसूले जाने वाले पार्किंग और जूता-चप्पल स्टैंड के शुल्क को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
(अन्य मांगें मंदिर के सौंदर्यीकरण, गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग और चिकित्सा शिविरों के आयोजन से जुड़ी हुई थीं।
प्रशासन और प्रबंधन को कड़ी चेतावनी
धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि मां श्यामा सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि मिथिलांचल की अस्मिता का प्रतीक हैं। कुछ लोग अपनी निजी स्वार्थ और भ्रष्टाचार के चलते इस पवित्र स्थल की छवि को धूमिल कर रहे हैं।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल: नेताओं ने जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि समय रहते इन भ्रष्ट व्यवस्थाओं पर लगाम नहीं कसी गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया: धरना समाप्त होने के बाद छात्र नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जिला प्रशासन के अधिकारियों से मिला और अपनी 14 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा, जिसपर अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया है।
मां श्यामा न्याय मंच द्वारा मंदिर परिसर के बाहरी गेट पर किया गया यह धरना-प्रदर्शन इस बात का स्पष्ट संदेश है कि अब आम जनता और युवा शैक्षणिक व धार्मिक संस्थाओं में फैले भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। दरभंगा के इस प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल पर पारदर्शिता और सुव्यवस्था बहाल करने के लिए यह आंदोलन एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी और निष्पक्षता के साथ उच्चस्तरीय जांच बैठाकर इन 14 सूत्री मांगों का समाधान करता है।