सिमरी बख्तियारपुर में कृषि इनपुट अनुदान वितरण में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई: अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बाद कृषि समन्वयक संजय कुमार सिंह निलंबित
सहरसा: बिहार के सहरसा जिले के अंतर्गत आने वाले सिमरी बख्तियारपुर (Simri Bakhtiarpur) अनुमंडल क्षेत्र से कृषि विभाग और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा देने वाली एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सरकार द्वारा किसानों को सूखाड़ या प्राकृतिक आपदाओं के नुकसान की भरपाई के लिए दिए जाने वाले कृषि इनपुट अनुदान (Agriculture Input Subsidy) वितरण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और भारी गड़बड़ियों के आरोप साबित होने के बाद कृषि समन्वयक (Agriculture Coordinator) संजय कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। स्थानीय वार्ड सदस्यों, जन प्रतिनिधियों और पीड़ित किसानों द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया था, जिसके बाद एक उच्चस्तरीय जांच टीम का गठन किया गया था। जांच टीम द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में अनुदान वितरण में धांधली और भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मिलने के बाद यह कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
घटना की पृष्ठभूमि: कैसे शुरू हुआ शिकायतों का दौर और अनियमितताओं का मामला?
यह पूरा मामला किसानों के हक और अधिकार से जुड़ा हुआ है, जहां सरकार द्वारा आपदा पीड़ितों के लिए भेजी गई सहायता राशि में कथित तौर पर बिचौलियों और जिम्मेदार कर्मियों द्वारा सेंध लगाने का प्रयास किया गया।
किसानों और वार्ड सदस्यों का आक्रोश: सिमरी बख्तियारपुर क्षेत्र के कई गांवों में जब किसानों को कृषि इनपुट अनुदान की राशि मिलने में भारी भेदभाव, अपात्र लोगों को लाभ देने और पात्र किसानों के नाम सूची से गायब मिलने की शिकायतें आईं, तो स्थानीय किसानों और वार्ड सदस्यों का गुस्सा फूट पड़ा।
लिखित शिकायत और भ्रष्टाचार के आरोप: किसानों और जन प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर जिला प्रशासन और कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों को एक लिखित आवेदन सौंपा। इसमें आरोप लगाया गया कि कृषि समन्वयक संजय कुमार सिंह द्वारा अपने चहेतों, अपात्र व्यक्तियों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अनुदान की राशि का वितरण कराया जा रहा है, जबकि वास्तविक और जरूरतमंद किसान सरकारी मदद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
जांच टीम का गठन और शिकायतों की धरातल पर तफ्तीश
किसानों की लगातार मिल रही शिकायतों और बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए जिला कृषि पदाधिकारी एवं अन्य वरीय प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (Inquiry Team) का गठन किया।
फील्ड विजिट और दस्तावेजों की जांच: जांच टीम ने सिमरी बख्तियारपुर क्षेत्र के संबंधित पंचायतों में जाकर भौतिक सत्यापन किया। टीम ने ऑनलाइन आवेदन, लाभुकों की सूची, बैंक खाता विवरण और कागजातों की बारीकी से जांच-पड़ताल की।
अनियमितताओं का पर्दाफाश: जांच के दौरान टीम ने पाया कि कृषि इनपुट अनुदान वितरण प्रक्रिया में भारी स्तर पर कोताही बरती गई है। कई ऐसे लोगों को अनुदान का लाभ दे दिया गया था जो इसके योग्य ही नहीं थे, वहीं दूसरी ओर असली अन्नदाता सरकारी सहायता से वंचित रह गए। जांच अधिकारियों ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को सौंप दी।
निलंबन की कार्रवाई और प्रशासनिक संदेश
जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने के बाद प्रशासन ने बिना देर किए त्वरित और कड़ा कदम उठाया।
निलंबन का आदेश: जिला प्राधिकारी के निर्देशानुसार अनियमितताओं के मुख्य आरोपी कृषि समन्वयक संजय कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय निर्धारित कर दिया गया है तथा विभागीय कार्यवाही (Departmental Proceedings) चलाने का आदेश भी दिया गया है।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति: जिला प्रशासन के इस कदम से भ्रष्ट कर्मियों और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि किसानों के हक पर डाका डालने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
सिमरी बख्तियारपुर में कृषि इनपुट अनुदान वितरण घोटाले में कृषि समन्वयक संजय कुमार सिंह का निलंबन यह साबित करता है कि यदि ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मिलकर आवाज उठाएं, तो भ्रष्ट व्यवस्था पर नकेल कसी जा सकती है। यह कार्रवाई न केवल पीड़ित किसानों के लिए एक बड़ी राहत है, बल्कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक सख्त और आवश्यक प्रशासनिक कदम भी है।