केनगर प्रखंड में जनता दरबार का आयोजन: भूमि विवाद और आम मामलों के त्वरित निष्पादन पर जोर, दर्जनों मामलों की हुई सुनवाई

पूर्णिया/केनगर: बिहार सरकार के निर्देशानुसार और जिला प्रशासन की पहल पर केनगर प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार में शनिवार को साप्ताहिक 'जनता दरबार' का आयोजन किया गया। इस जनता दरबार का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद, जमीन की पैमाइश, आपसी सीमा विवाद और अन्य प्रशासनिक मामलों का मौके पर ही पारदर्शी और त्वरित समाधान करना था। कार्यक्रम में प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे दर्जनों फरियादियों ने अपनी-अपनी शिकायतें संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखीं, जिसके बाद कई मामलों का ऑन-द-स्पॉट निष्पादन किया गया।

जनता दरबार का मुख्य उद्देश्य और प्रशासनिक उपस्थिति

केनगर प्रखंड मुख्यालय के सभागार में आयोजित इस जनता दरबार में स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारी पूरी मुस्तैदी के साथ मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंचल अधिकारी (CO) और थाना प्रभारी (SHO) द्वारा संयुक्त रूप से की गई।

आपसी समन्वय से समाधान: जनता दरबार का मुख्य उद्देश्य पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से जमीन से जुड़े मामलों की सुनवाई करना है, ताकि छोटे-छोटे विवादों को थानों या अदालतों तक जाने से पहले ही स्थानीय स्तर पर सुलझाया जा सके।

फरियादियों की भारी भीड़: सुबह से ही प्रखंड मुख्यालय परिसर में अपनी भूमि और अन्य समस्याओं को लेकर आवेदन देने वाले ग्रामीणों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। हर कोई अपनी फरियाद संबंधित अधिकारी तक पहुँचाने के लिए उत्सुक नजर आया।

भूमि विवाद के मामलों की बहुलता और ऑन-द-स्पॉट निबटारा

प्राप्त शिकायतों के अनुसार, जनता दरबार में सबसे अधिक मामले जमीन की खरीद-बिक्री, सीमांकन (पैमाइश), कब्जा हटाने और आपसी बंटवारे से जुड़े हुए थे। ग्रामीण इलाकों में पुश्तैनी जमीन के बँटवारे को लेकर अक्सर पड़ोसी या परिजनों के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती है।

तत्काल कागजातों की जांच: अधिकारियों ने दोनों पक्षों के जमीन के कागजात, जमाबंदी रसीद और नक्शे की बारीकी से जांच की। कई मामलों में दोनों पक्षों की सहमति से अंचल अमीन को जमीन की पैमाइश करने का निर्देश दिया गया।

तत्काल निष्पादन: आपसी सहमति वाले कई मामलों का मौके पर ही दोनों पक्षों के हस्ताक्षर कराकर निष्पादन कर दिया गया, जिससे दोनों पक्षों को राहत मिली और अदालती चक्कर से मुक्ति मिली।

जनता दरबार से आम जनता को मिल रही राहत

केनगर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के लोगों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजनों से आम जनता का प्रशासनिक कार्यालयों से सीधा संवाद स्थापित होता है।

समय और धन की बचत: पहले लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए हफ्तों अंचल कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन जनता दरबार लगने से एक ही छत के नीचे समाधान मिलने लगा है।

पारदर्शिता और त्वरित न्याय: अधिकारियों के समक्ष खुलकर अपनी बात रखने का मौका मिलने से पारदर्शिता बनी रहती है और मामलों का समय पर निबटारा होता है।

भविष्य की कार्ययोजना और अधिकारियों की अपील

जनता दरबार के समापन के दौरान अधिकारियों ने क्षेत्र के लोगों से अपील की कि वे अपनी भूमि से जुड़े मामलों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास करें। प्रशासनिक अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जो मामले जटिल प्रकृति के हैं या जिन पर न्यायालय में वाद चल रहा है, उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हल किया जाएगा, लेकिन सामान्य भूमि विवादों के लिए जनता दरबार सबसे बेहतरीन मंच है। आने वाले दिनों में इस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि केनगर प्रखंड का हर नागरिक प्रशासन की इन सेवाओं का पूरा लाभ उठा सके।