मुजफ्फरपुर में मशरूम क्लस्टर के नाम पर 110 जीविका दीदियों से ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई: जांच टीम ने आरोपी एजेंसी को दिए सख्त निर्देश, 15 अक्टूबर तक सभी 10 क्लस्टर चालू करने का अल्टीमेटम
मुजफ्फरपुर (बिहार): बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई 'जीविका' योजना से जुड़ा एक बड़ा और सनसनीखेज मामला सामने आया है। मुजफ्फरपुर में मशरूम क्लस्टर (Mushroom Cluster) स्थापित करने के नाम पर 110 जीविका दीदियों के साथ हुई कथित ठगी और धोखाधड़ी के मामले में जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई जांच के बाद बड़ा अपडेट सामने आया है। जांच टीम ने इस मामले में संलिप्त पाई गई आरोपी एजेंसी पर शिकंजा कसते हुए उसे कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही, एजेंसी को 10 मशरूम क्लस्टर को हर हाल में चालू करने का सख्त आदेश देते हुए काम पूरा करने के लिए तीन चरणों (Three Phases) में मोहलत दी है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि 15 अक्टूबर तक सभी 10 क्लस्टर को पूरी तरह चालू करना अनिवार्य होगा।
पूरा मामला क्या है? कैसे हुआ ठगी का खुलासा?
बिहार सरकार और केंद्र सरकार की साझा कोशिशों से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 'जीविका' (Jeevika) समूह एक मजबूत स्तंभ के रूप में काम कर रहे हैं। मुजफ्फरपुर जिले में भी हजारों महिलाएं इन समूहों से जुड़कर स्वरोजगार कर रही हैं।
मushroom क्लस्टर योजना का झांसा: कुछ समय पहले जिले की लगभग 110 जीविका दीदियों को कृषि आधारित व्यवसाय से जोड़ने और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए 'मशरुम क्लस्टर' खोलने का प्रलोभन दिया गया था। इसके नाम पर एक निजी या संबंधित एजेंसी द्वारा इन महिलाओं से भारी-भरकम राशि निवेश कराई गई या कागजी प्रक्रिया के नाम पर उनका आर्थिक शोषण किया गया।
ठगी का अहसास और शिकायत: जब लंबे समय तक धरातल पर कोई मशरूम क्लस्टर शुरू नहीं हुआ और महिलाओं को किसी प्रकार का लाभ नहीं मिला, तो जीविका दीदियों को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद पीड़ित महिलाओं ने इस पूरे फर्जीवाड़े के खिलाफ आवाज उठाई और जिला प्रशासन के अधिकारियों तक अपनी गुहार पहुंचाई।
प्रशासनिक जांच और जांच टीम की सख्ती
मामले के तूल पकड़ने और 110 जीविका दीदियों के आर्थिक शोषण की बात सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया। प्रशासनिक स्तर पर एक विशेष जांच टीम (Inquiry Team) का गठन किया गया, जिसे इस पूरे घोटाले की परतें उधेड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
जांच में गड़बड़ी की पुष्टि: जांच टीम ने जब दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और मौके की जमीनी हकीकत की पड़ताल की, तो एजेंसी की बड़ी लापरवाही और गड़बड़ियां सामने आईं। महिलाओं से पैसे लेने के बावजूद क्लस्टर का काम अधूरा छोड़ देने और समय पर प्रोजेक्ट पूरा न करने की बात सच पाई गई।
एजेंसी पर कसा शिकंजा: ठगी और धोखाधड़ी का मामला स्पष्ट होने के बाद जांच टीम ने आरोपी एजेंसी के प्रतिनिधियों को तलब किया। शुरुआती कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई के तहत उन्हें सीधे तौर पर जेल भेजने या ब्लैकलिस्ट करने के बजाय, एक मौका सुधार का दिया गया है ताकि गरीब महिलाओं का फंसा हुआ पैसा और उनका रोजगार सुरक्षित हो सके।
तीन चरणों की मोहलत और 15 अक्टूबर की डेडलाइन
जांच टीम ने आरोपी एजेंसी को कड़ी चेतावनी देते हुए काम पूरा करने का एक सख्त शेड्यूल जारी किया है। इसके तहत एजेंसी को निम्नलिखित शर्तों के साथ तीन चरणों में काम करने की मोहलत दी गई है:
चरणबद्ध कार्ययोजना (Three Phases): एजेंसी को मशरूम क्लस्टर के निर्माण, मशीनरी लगाने और उत्पादन शुरू करने की प्रक्रिया को तीन अलग-अलग चरणों में विभाजित करना होगा। हर चरण की एक निश्चित समयावधि तय की गई है, जिसकी निगरानी प्रशासनिक अधिकारी खुद करेंगे।
10 क्लस्टर चालू करने का आदेश: जांच टीम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आरोपी एजेंसी को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कुल 10 मशरूम क्लस्टर को धरातल पर उतारना होगा और उन्हें पूरी तरह क्रियाशील (Operational) बनाना होगा।
15 अक्टूबर की अंतिम तिथि: प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए डेडलाइन तय कर दी है कि 15 अक्टूबर तक हर हाल में सभी 10 क्लस्टर को चालू करना आवश्यक है। यदि इस निर्धारित समयसीमा के भीतर काम पूरा नहीं किया गया, तो एजेंसी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में सीधे प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
जीविका दीदियों को न्याय की आस
इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद मुजफ्फरपुर की उन 110 जीविका दीदियों में एक नई उम्मीद जागी है, जिनकी गाढ़ी कमाई या सपने इस फर्जीवाड़े में फंस गए थे। महिलाओं का कहना है कि प्रशासन की सख्ती से अब कम से कम उनके प्रोजेक्ट के शुरू होने की संभावना बढ़ गई है, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
मुजफ्फरपुर में मशरूम क्लस्टर के नाम पर 110 जीविका दीदियों के साथ हुई ठगी के मामले में प्रशासनिक जांच और आरोपी एजेंसी को दी गई सख्त चेतावनी यह दर्शाती है कि सरकार ग्रामीण महिलाओं के अधिकारों को लेकर पूरी तरह गंभीर है। 15 अक्टूबर तक सभी 10 क्लस्टर को चालू करने का यह अल्टीमेटम न सिर्फ एजेंसी के लिए एक बड़ी परीक्षा है, बल्कि यह पीड़ित महिलाओं के लिए न्याय की दिशा में एक ठोस कदम भी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आरोपी एजेंसी तय समयसीमा के भीतर अपने वादे को पूरा करती है या प्रशासन को कोई और कड़ा कदम उठाना पड़ता है।