आखिर भरत भूषण तिवारी को कितनी गोलियां लगी थीं? पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाई सियासी और कानूनी हलचल
आरा/भोजपुर। भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर भरत भूषण तिवारी को पुलिस की कार्रवाई के दौरान कितनी गोलियां लगी थीं? घटना के कई दिनों बाद तक इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। किसी ने तीन गोलियां लगने की बात कही तो किसी ने चार। लेकिन अब सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं, जिससे उनकी मौत हुई।
यह खुलासा सामने आने के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा में की गई वैध मुठभेड़ बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन और ग्रामीण इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
गोलियों की संख्या पर क्यों उठा विवाद?
17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच हुई मुठभेड़ के बाद गंभीर रूप से घायल भरत को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। शुरुआती दौर में पुलिस की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्हें कितनी गोलियां लगी थीं। इसी वजह से अलग-अलग दावे सामने आने लगे।
अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार भरत के शरीर में पांच गोलियां लगी थीं। इस रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है और कई नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
मां का आरोप- "बेटे को पांच गोलियां मारी गईं"
भरत तिवारी की मां ने न्यायिक जांच आयोग के सामने बयान देते हुए आरोप लगाया कि उनके बेटे को पकड़ने के बाद भी गोली मारी गई। उन्होंने दावा किया कि भरत को पांच गोलियां लगी थीं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि पुलिस इन आरोपों को स्वीकार नहीं करती और अपनी कार्रवाई को कानूनसम्मत बता रही है।
पुलिस का क्या है दावा?
भोजपुर पुलिस का कहना है कि भरत भूषण तिवारी पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी के दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग की और सरकारी वाहन पर भी गोली चलाई। पुलिस का दावा है कि कई बार आत्मसमर्पण करने की चेतावनी देने के बावजूद वह नहीं माना, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग करनी पड़ी।
पुलिस का यह भी कहना है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया और मामले की जांच जारी है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाए सवाल
एनकाउंटर के दौरान भरत तिवारी द्वारा किए गए फेसबुक लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। परिजनों का दावा है कि वीडियो में भरत अंत में अपना हथियार नीचे फेंकता दिखाई देता है। उनका आरोप है कि हथियार छोड़ने के बाद भी उस पर गोलियां चलाई गईं।
हालांकि पुलिस का कहना है कि वीडियो पूरे घटनाक्रम को नहीं दिखाता और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आत्मरक्षा में कार्रवाई की गई। यही विरोधाभास अब जांच का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।
न्यायिक जांच जारी
बढ़ते विवाद के बीच राज्य सरकार ने पूरे मामले की न्यायिक जांच का आदेश दिया है। जांच आयोग परिजनों, प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस अधिकारियों के बयान दर्ज कर रहा है। आयोग के समक्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज, वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
राजनीतिक मुद्दा बना मामला
भरत तिवारी एनकाउंटर अब केवल एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। गांव में महापंचायत आयोजित की गई, जिसमें दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की गई।
कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की गई है। इसके अलावा पूरे घटनाक्रम की जांच विभिन्न स्तरों पर जारी है। सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
परिवार की मांग
भरत तिवारी के परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए। उनका आरोप है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि पुलिस की ओर से किसी प्रकार की गलती हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। परिवार लगातार यह भी मांग कर रहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बैलिस्टिक रिपोर्ट और अन्य सभी जांच सार्वजनिक की जाएं।
अभी भी कई सवाल बाकी
हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पांच गोलियां लगने की बात सामने आने के बाद एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट हुआ है, लेकिन कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। मसलन—
- आखिर पुलिस की ओर से कुल कितनी गोलियां चलाई गईं?
- कौन-सी गोली जानलेवा साबित हुई?
- क्या सभी गोलियां पुलिस की सर्विस राइफल से चलीं?
- वायरल वीडियो और पुलिस के दावों में अंतर क्यों दिखाई देता है?
- फॉरेंसिक और बैलिस्टिक जांच क्या निष्कर्ष देती है?
इन सभी सवालों के जवाब अब न्यायिक जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएंगे।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला बिहार के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पांच गोलियां लगने का दावा सामने आने के बाद इस केस ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष न्यायिक जांच और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा