सहरसा में स्वास्थ्यकर्मियों का जोरदार प्रदर्शन: एएनएम की बायोमेट्रिक हाजिरी के विरोध और लंबित मांगों को लेकर सड़क पर उतरे स्वास्थ्यकर्मी; संघ ने प्रशासन को दी चेतावनी

सहरसा (बिहार): बिहार के सहरसा जिले से स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच चल रहे असंतोष को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जिले के स्वास्थ्य महकमे में उस وقت हड़कंप मच गया जब बड़ी संख्या में एएनएम (ANM) और अन्य स्वास्थ्यकर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुखर हो गए। सहरसा में स्वास्थ्यकर्मियों ने एएनएम की बायोमेट्रिक हाजिरी (Biometric Attendance) के कड़े विरोध और अपनी अन्य लंबित मांगों को लेकर एक विशाल प्रदर्शन किया।

'हिन्दुस्तान' संवाददाता से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे स्वास्थ्य संघ के प्रतिनिधियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। संघ की प्रमुख मांगों में बायोमेट्रिक हाजिरी की अव्यवहारिक व्यवस्था में सुधार, लंबित प्रोन्नति (Promotion) और महिला स्वास्थ्यकर्मियों की उनके गृह जिले या घर के आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों पर पोस्टिंग शामिल है। आइए जानते हैं सहरसा में हुए इस स्वास्थ्यकर्मियों के प्रदर्शन के मुख्य कारण, संघ की मांगें, प्रशासनिक प्रतिक्रिया और इस आंदोलन के दूरगामी प्रभावों का विस्तृत विवरण।

आंदोलन की पृष्ठभूमि: क्यों भड़का स्वास्थ्यकर्मियों का गुस्सा?

बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्यकुशलता और पारदर्शिता लाने के लिए विभिन्न डिजिटल पहलों की शुरुआत की जा रही है, लेकिन कई बार जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किए जाने के कारण कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखने को मिलती है।

बायोमेट्रिक हाजिरी का विरोध क्यों?: स्वास्थ्य विभाग द्वारा एएनएम और अन्य कर्मियों के लिए अनिवार्य की गई बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली को लेकर मैदानी स्तर पर भारी मुश्किलें आ रही हैं। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर या अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों) में नेटवर्क की भयंकर समस्या, बिजली की अनियमित आपूर्ति और इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने के कारण समय पर हाजिरी दर्ज करना असंभव सा हो गया है। इसके अलावा, कई एएनएम को एक से अधिक क्षेत्रों का प्रभार होने के कारण अलग-अलग जगहों पर हाजिरी लगाने में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

महिला स्वास्थ्यकर्मियों की समस्याएं: ग्रामीण इलाकों में तैनात महिला स्वास्थ्यकर्मियों (एएनएम) के सामने सुरक्षा, परिवहन और कार्य समय को लेकर कई तरह की चुनौतियां रहती हैं, जिसके चलते वे लंबे समय से अपनी तैनाती गृह प्रखंड या घर के आसपास के अस्पतालों में किए जाने की मांग कर रही हैं।

 संघ के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन और मुख्य मांगें

सहरसा जिला मुख्यालय पर आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों की संख्या में एएनएम और स्वास्थ्यकर्मी हाथों में तख्तियां लेकर सरकार और विभाग विरोधी नारे लगाते नजर आए।

लंबित प्रोन्नति (Pending Promotion) का मुद्दा: प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से सेवा दे रहे स्वास्थ्यकर्मियों को समय पर प्रोन्नति (प्रमोशन) नहीं मिल रही है, जिससे उनके करियर की प्रगति रुक गई है। कई कर्मचारी बिना किसी वित्तीय लाभ के सेवानिवृत्ति के कगार पर पहुंच रहे हैं।

गृह क्षेत्र के पास पोस्टिंग की मांग: महिला स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और पारिवारिक दायित्वों को ध्यान में रखते हुए संघ ने मांग की है कि महिला कर्मियों की पोस्टिंग उनके पैतृक आवास या घर के नजदीक के स्वास्थ्य केंद्रों पर की जाए, ताकि उन्हें रोजाना लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

दबाव की राजनीति नहीं, न्यायोचित मांग: संघ के वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे कार्य के प्रति कभी पीछे नहीं हटे हैं, कोरोना काल से लेकर हर आपात स्थिति में उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया है, लेकिन प्रशासन द्वारा थोपे जा रहे अव्यवहारिक नियमों को सहन नहीं किया जाएगा।

 प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति

स्वास्थ्यकर्मियों के इस आक्रामक तेवर को देखते हुए जिला स्वास्थ्य प्रशासन और सिविल सर्जन कार्यालय के अधिकारियों ने स्थिति को संभालने के लिए संवाद के प्रयास शुरू किए हैं।

ज्ञापन सौंपना: प्रदर्शन के अंत में स्वास्थ्य संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने सिविल सर्जन और जिलाधिकारी के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई है।

अधिकारियों का आश्वासन: प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि बायोमेट्रिक हाजिरी से जुड़ी तकनीकी कठिनाइयों और महिला कर्मियों की पोस्टिंग के मामलों पर विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता की जाएगी। साथ ही, लंबित प्रोन्नति की फाइलों को जल्द से जल्द निष्पादित करने का भरोसा दिलाया गया है

सहरसा में एएनएम की बायोमेट्रिक हाजिरी के विरोध और अन्य मांगों को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों का यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक आदेशों और जमीनी वास्तविकताओं के बीच तालमेल बिठाना कितना जरूरी है। यदि सरकार और स्वास्थ्य विभाग समय रहते इन महिला कर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों की व्यावहारिक समस्याओं (जैसे नेटवर्क की समस्या और गृह पोस्टिंग) का समाधान नहीं करते हैं, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना जनहित में अति आवश्यक है।