10 साल पुराने तुर्की बेस कैंप हमले में हार्डकोर नक्सली संजय राम का प्रोडक्शन वारंट जारी, रामबाबू और सुधीर के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल

 बिहार में प्रतिबंधित नक्सली संगठनों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए विशेष अदालतों और सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मार्च 2016 में मुजफ्फरपुर के तुर्की स्टेशन के निकट रेलवे ट्रैक बिछा रही कंस्ट्रक्शन कंपनी के बेस कैंप पर हमला करने, करोड़ों के वाहन फूंकने और लेवी (रंगदारी) न देने पर दहशत फैलाने के मामले में रेल पुलिस और विशेष सत्र न्यायालय ने बड़ा एक्शन लिया है।

इस कांड के मुख्य सूत्रधार और कुख्यात हार्डकोर नक्सली संजय राम को अब इस मामले में न्यायिक रिमांड (Judicial Remand) पर लिया जाएगा। प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने रेल पुलिस की अर्जी पर सुनवाई करते हुए संजय राम के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट (Production Warrant) जारी कर दिया है। इसके साथ ही, रेल पुलिस ने इस मामले के दो अन्य मुख्य अभियुक्तों— रामबाबू राम उर्फ राजन उर्फ प्रहार और सुधीर भगत के खिलाफ विशेष कोर्ट में आधिकारिक चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी है।

 मार्च 2016 का वो खौफनाक मंजर: जब लेवी न मिलने पर धू-धू कर जला था बेस कैंप

इस मामले की गंभीरता को समझने के लिए हमें 26 मार्च 2016 की उस काली रात की घटना को जानना होगा। उस समय मुजफ्फरपुर-हाजीपुर रेल खंड के दोहरीकरण (Double-Line Construction) का काम युद्धस्तर पर चल रहा था। एक प्रतिष्ठित कंस्ट्रक्शन कंपनी ने तुर्की स्टेशन के पास अपना विशाल बेस कैंप बना रखा था।

करोड़ों की मांग और धमकी: प्रतिबंधित नक्सली संगठन के जोनल और एरिया कमांडरों ने कंपनी के ठेकेदार से करोड़ों रुपये की लेवी (अवैध टैक्स) की मांग की थी। ठेकेदार ने इसकी गोपनीय सूचना स्थानीय पुलिस को भी दी थी, लेकिन तत्कालीन स्तर पर लापरवाही के कारण उचित सुरक्षा नहीं मिल सकी।

नक्सलियों का तांडव: लेवी की रकम न मिलने से नाराज होकर भारी हथियारों से लैस दर्जनों नक्सलियों ने रात के सन्नाटे में तुर्की बेस कैंप पर धावा बोल दिया। नक्सलियों ने वहां मौजूद दर्जनों हाईवा (भारी डंपर ट्रक), पोकलेन मशीनें, जेसीबी और अन्य निर्माण वाहनों को पेट्रोल बम और बारूद की मदद से आग के हवाले कर दिया।

4 करोड़ का नुकसान: इस सुनियोजित हमले में कंपनी को 4 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का भारी नुकसान हुआ था, जिसके बाद पूरे उत्तर बिहार के विकास कार्यों में दहशत के कारण ब्रेक लग गया था। इस मामले को लेकर 26 मार्च 2016 को मुजफ्फरपुर रेल थाने में एक नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।

जांच अधिकारी सह रेल डीएसपी की अर्जी पर कोर्ट का कड़ा रुख

हार्डकोर नक्सली संजय राम, जो वैशाली जिले के बलिगांव थाना क्षेत्र के हसनपुर रूपनपट्टी गांव का रहने वाला है, लंबे समय से फरार चल रहा था। उसे हाल ही में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने एक अन्य नक्सली वारदात (मीनापुर 2017 केस) के सिलसिले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

जब इस 10 साल पुराने तुर्की रेल बेस कैंप कांड के अनुसंधानकर्ता (IO) सह रेल डीएसपी रोशन गुप्ता ने मामले की कड़ियों को जोड़ा, तो इसमें संजय राम की सीधी संलिप्तता और साजिश के अकाट्य साक्ष्य (Evidence) मिले।

रेल डीएसपी ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कोर्ट में एक विशेष अर्जी दाखिल कर संजय राम को तुर्की वाले मामले में भी रिमांड पर लेने की अनुमति मांगी।

कोर्ट ने अर्जी को स्वीकार करते हुए बेउर/मुजफ्फरपुर जेल प्रशासन को 4 जुलाई को संजय राम को कोर्ट में सशरीर पेश करने का आदेश (प्रोडक्शन वारंट) जारी किया है, जिसके बाद उसे इस केस में न्यायिक रिमांड पर लिया जाएगा।

 रामबाबू राजन और सुधीर भगत के खिलाफ 'UAPA' और विशेष कोर्ट में चार्जशीट

शनिवार को रेल पुलिस ने इस मामले में एक और बड़ी कानूनी सफलता हासिल करते हुए दो मुख्य जेल में बंद अभियुक्तों के खिलाफ अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट (चार्जशीट) विशेष अदालत में सौंप दी।

अभियुक्तों का प्रोफाइल:

रामबाबू राम उर्फ राजन उर्फ 'प्रहार': यह संगठन का एक बेहद खूंखार एरिया कमांडर रहा है, जिस पर मुजफ्फरपुर, वैशाली और पूर्वी चंपारण समेत कई जिलों में हत्या, लेवी और आर्म्स एक्ट के दर्जनों मामले दर्ज हैं।

सुधीर भगत: मोहब्बतपुर का रहने वाला सुधीर भगत नक्सलियों के लिए अर्बन नेटवर्क (शहरी नेटवर्क) सप्लायर और लाइनर का काम करता था, जिसने बेस कैंप की रेकी करने में मदद की थी।

इन दोनों के खिलाफ पुलिस ने यूएपीए एक्ट (UAPA - गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम), आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसी बेहद संगीन और गैर-जमानती धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है, जिससे इन्हें अब लंबे समय तक जेल में ही सड़ना होगा।

 डेटा शीट: तुर्की स्टेशन बेस कैंप नक्सली हमला केस स्टेटस

कांड का विवरणमुख्य घटनाक्रम / तिथिमुख्य आरोपीवर्तमान कानूनी स्थिति
तुर्की स्टेशन बेस कैंप हमला26 मार्च 2016 (लेवी विवाद)संजय राम (वैशाली)प्रोडक्शन वारंट जारी (4 जुलाई को पेशी)
नुकसान का आकलन₹4 करोड़ से अधिक के वाहन स्वाहारामबाबू राम उर्फ प्रहारविशेष कोर्ट में चार्जशीट दाखिल (न्यायिक हिरासत)
अभियुक्तों का दायरा10 जिलों के 44+ नक्सली शामिलसुधीर भगत (मोहब्बतपुर)आरोप पत्र समर्पित, सेशन ट्रायल जारी

 

 10 जिलों के 44 नक्सलियों का सिंडिकेट: विधि विभाग से मिली हरी झंडी

रेल पुलिस की जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि इस हमले को किसी एक लोकल गैंग ने नहीं, बल्कि उत्तर और मध्य बिहार के 10 अलग-अलग जिलों (मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, वैशाली, सीवान, सारण, बेगूसराय, दरभंगा और कटिहार) के नक्सलियों ने मिलकर अंजाम दिया था।

इस मामले में कुल 44 मुख्य नक्सलियों के खिलाफ देशद्रोह और आतंकी गतिविधियों के तहत मुकदमा चलाने के लिए रेल एसपी ने राज्य सरकार के विधि विभाग (Law Department) को अनुशंसा भेजी थी। विधि विभाग से हरी झंडी (Prosecution Sanction) मिलने के बाद अब विशेष कोर्ट में इन सभी 44 नक्सलियों के खिलाफ 'सेशन ट्रायल' (Sessional Trial) की प्रक्रिया तेज हो गई है। बाकी बचे हुए कुछ अन्य सह-आरोपियों के लिए भी दोबारा अनुशंसा भेजी गई है।

रेलवे और हाईवे जैसी बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं को निशाना बनाना नक्सलियों का पुराना ढर्रा रहा है ताकि वे विकास को बाधित कर अपनी समानांतर सत्ता चला सकें। लेकिन मुजफ्फरपुर रेल पुलिस की यह दृढ़ कानूनी पैरवी और कोर्ट द्वारा कड़े रुख अपनाए जाने से साफ है कि अब ऐसे तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। 10 साल पुराने मामले में भी कड़ियों को जोड़कर अपराधियों को रिमांड पर लेना और यूएपीए (UAPA) के तहत चार्जशीट दाखिल करना यह साबित करता है कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं। इस कार्रवाई से जेल के भीतर बंद नक्सलियों और बाहर सक्रिय उनके समर्थकों के मनोबल पर गहरा आघात लगा है।