अतिथि शिक्षकों का आंदोलन जारी, 11 माह के सेवा विस्तार और मानदेय भुगतान की मांग को लेकर सातवें दिन भी डटे रहे प्रदर्शनकारी
भागलपुर: अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) का चल रहा आंदोलन अब उग्र रूप लेने लगा है। भागलपुर सहित राज्य भर के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षक पिछले सात दिनों से लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। अपनी मुख्य मांगों—विशेषकर 11 माह के सेवा विस्तार और लंबित मानदेय के भुगतान—को लेकर शिक्षकों ने जिला मुख्यालय और शिक्षा विभाग के कार्यालयों के समक्ष अपना धरना जारी रखा है।
क्या है शिक्षकों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शनकारी अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से विद्यालयों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, लेकिन उनकी नौकरी की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
11 माह का सेवा विस्तार: शिक्षकों की मांग है कि उन्हें केवल शैक्षणिक सत्र के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे 11 माह का सेवा विस्तार प्रदान किया जाए। उनका तर्क है कि गर्मी की छुट्टियों और अन्य अवकाशों के दौरान भी उन्हें मानदेय से वंचित रखा जाता है, जो उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है।
मानदेय का नियमित भुगतान: लंबे समय से लंबित मानदेय (वेतन) का भुगतान अविलंब करने की मांग की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण उनका मानसिक और पारिवारिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
समान कार्य, समान वेतन का आश्वासन: अतिथि शिक्षकों ने सरकार से यह भी मांग की है कि जब तक उनकी सेवा स्थायी नहीं की जाती, तब तक उन्हें 'समान कार्य, समान वेतन' की तर्ज पर सुविधाएं दी जाएं।
'न पढ़ाई, न हड़ताल': शिक्षा व्यवस्था पर असर
आंदोलन के सातवें दिन तक खिंच जाने के कारण विद्यालयों में पठन-पाठन पर गहरा असर पड़ रहा है। कई स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की बड़ी संख्या होने के कारण वहां पढ़ाई ठप हो गई है। छात्रों और अभिभावकों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं निकला, तो परीक्षाओं के दौरान पाठ्यक्रम पूरा करने में बड़ी चुनौती आएगी।
प्रशासनिक उदासीनता पर आक्रोश
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है, जबकि धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। शिक्षक नेता ने कहा, "हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक सरकार हमें लिखित आश्वासन नहीं देती। हम अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार हमारी अनदेखी कर रही है।"
आगे की रणनीति
शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर विचार नहीं किया, तो वे इसे राज्यव्यापी आंदोलन का रूप देंगे। आने वाले दिनों में अतिथि शिक्षक राजधानी पटना में बड़ा प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि यदि उनकी जायज मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे।
फिलहाल, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत का रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन शिक्षक अब किसी भी मौखिक आश्वासन के बजाय सीधे नीतिगत निर्णय की मांग पर अडिग हैं।