राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर अनूठी पहल; डॉ. विनय कुमार झा ने 'बीमारी को मात देने वाले' 10 मरीजों को किया सम्मानित

भागलपुर: राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (National Doctors' Day) के अवसर पर चिकित्सा जगत में सेवा और समर्पण का एक सुखद दृश्य देखने को मिला। भागलपुर के प्रख्यात वरीय फिजिशियन डॉ. विनय कुमार झा ने समाज में एक सकारात्मक संदेश देते हुए अपने 10 ऐसे मरीजों को सम्मानित किया, जिन्होंने गंभीर बीमारियों से जूझते हुए न केवल इलाज कराया, बल्कि डॉक्टर की सलाह का कड़ाई से पालन कर स्वस्थ जीवन की ओर वापसी की।

मरीजों का सम्मान, डॉक्टर का हौसला

चिकित्सक दिवस से पूर्व आयोजित इस सादगीपूर्ण कार्यक्रम में डॉ. झा ने अपने क्लिनिक में उन मरीजों को आमंत्रित किया, जो लंबे समय से मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप (Hypertension) और हृदय संबंधी जटिलताओं का सामना कर रहे थे। डॉ. झा ने इन मरीजों को उपहार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा, "एक डॉक्टर के लिए सबसे बड़ा उपहार वह मुस्कान है, जो एक मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने पर चेहरे पर आती है। ये 10 मरीज वे हैं जिन्होंने खुद को अनुशासित रखा और अपनी जीवनशैली में बदलाव कर बीमारी को परास्त किया।"

अनुशासन का महत्व

डॉ. विनय कुमार झा ने इस मौके पर चर्चा करते हुए कहा कि अक्सर देखा जाता है कि मरीज दवाएं तो लेते हैं, लेकिन खान-पान और दिनचर्या के प्रति लापरवाही बरतते हैं। सम्मानित किए गए मरीजों ने इसे बदल दिया। उन्होंने योगाभ्यास, संतुलित आहार और समय पर दवाओं के सेवन को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाया। डॉ. झा ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में डॉक्टर की सलाह मात्र 50% काम करती है, बाकी का 50% मरीज का स्वयं का अनुशासन और इच्छाशक्ति होती है।

डॉक्टर-मरीज के बीच अटूट विश्वास

सम्मानित हुए मरीजों ने भावुक होकर बताया कि डॉ. झा का मार्गदर्शन उनके लिए केवल एक इलाज नहीं, बल्कि एक नया जीवन पाने जैसा था। एक मरीज ने कहा, "डॉक्टर साहब की सांत्वना और सही सलाह ने हमें बीमारी से लड़ने का संबल दिया। आज हम जो स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, वह उनके मार्गदर्शन और हमारे विश्वास का परिणाम है।" यह पहल यह दर्शाती है कि डॉक्टर और मरीज के बीच का रिश्ता केवल दवा और पर्चे तक सीमित नहीं, बल्कि यह आपसी विश्वास और मानवीय संवेदना का भी है।

चिकित्सक दिवस का असली संदेश

डॉ. विनय कुमार झा ने चिकित्सकों के सम्मान के इस दिन को उन लोगों को समर्पित किया जो स्वास्थ्य सेवाओं में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने भागलपुर के अन्य चिकित्सक साथियों से भी आग्रह किया कि वे मरीजों को केवल मरीज न समझें, बल्कि उन्हें एक साथी के रूप में देखें जो स्वास्थ्य की लड़ाई में साथ चल रहे हैं।

उन्होंने कहा, "उपहार तो एक छोटा सा प्रतीक है, लेकिन असली सम्मान उस दिन मिलता है जब समाज में लोग स्वस्थ रहते हैं और उन्हें अस्पताल के चक्कर कम काटने पड़ते हैं।"

समाज में सराहना

डॉ. झा की इस अनूठी पहल की पूरे शहर में सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चिकित्सकों का यह मानवीय चेहरा समाज में चिकित्सा पेशे की गरिमा को बढ़ाता है। जहाँ आज के दौर में डॉक्टर और मरीज के बीच तनाव की खबरें आती हैं, वहीं डॉ. विनय कुमार झा का यह प्रयास साबित करता है कि चिकित्सा अभी भी एक सेवा का माध्यम है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. झा ने सभी मरीजों के दीर्घायु होने की कामना की और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प दोहराया।