जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (JLNMCH) का मानसिक रोग विभाग बना उम्मीद की किरण; आधुनिक उपचार से मरीजों को मिल रही नई जिंदगी

भागलपुर: जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (JLNMCH), भागलपुर का मानसिक रोग विभाग (Department of Psychiatry) आजकल न केवल मरीजों की बढ़ती संख्या के लिए, बल्कि यहां प्रदान की जा रही उन्नत और संवेदनशील चिकित्सा सेवाओं के लिए भी चर्चा में है। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में व्याप्त वर्जनाओं को तोड़ते हुए, यह विभाग आज उन सैकड़ों लोगों के लिए सहारा बन गया है जो अवसाद (Depression), एंग्जायटी, स्जोफ्रेनिया और अन्य मानसिक विकारों से जूझ रहे हैं।

विभागीय उपचार की व्यापक व्यवस्था

JLNMCH के मानसिक रोग विभाग में मरीजों को ओपीडी (OPD) से लेकर इनडोर (IPD) सेवाओं तक की विशेष सुविधा उपलब्ध है। यहां के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम का मानना है कि मानसिक रोग केवल दिमाग तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये व्यक्ति के सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं।

विभाग में उपलब्ध उपचार की मुख्य विशेषताएं:

काउंसलिंग और साइकोथेरेपी: दवाओं के साथ-साथ व्यवहार परिवर्तन और मानसिक मजबूती के लिए अनुभवी मनोवैज्ञानिकों द्वारा सत्र आयोजित किए जाते हैं।

आधुनिक दवाएं: अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नवीनतम मनोरोग दवाओं का उपयोग किया जा रहा है, जिनका साइड इफेक्ट कम और प्रभाव अधिक है।

इलेक्ट्रोकनवल्सिव थेरेपी (ECT): गंभीर मानसिक रोगियों के लिए विभाग में ECT जैसी आधुनिक सुविधा भी उपलब्ध है, जो विशेषज्ञों की देखरेख में सुरक्षित तरीके से की जाती है।

बदलते सामाजिक दृष्टिकोण और बढ़ते मरीज

विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मानसिक रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। पहले लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को छिपाते थे, लेकिन अब वे खुलकर सामने आ रहे हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों में युवाओं और कामकाजी पेशेवरों की संख्या अधिक है, जो जीवन के बढ़ते तनाव और प्रतिस्पर्धा के कारण मानसिक समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। विभाग का लक्ष्य मरीजों को केवल 'बीमारी मुक्त' करना नहीं, बल्कि उन्हें 'सामाजिक रूप से पुन: स्थापित' करना भी है।

समर्पित टीम का प्रयास

मानसिक रोग विभाग में सीनियर रेजिडेंट्स, पीजी छात्र और अनुभवी फैकल्टी दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे हैं। मरीजों की गोपनीयता (Confidentiality) का विशेष ध्यान रखा जाता है। विभाग के अध्यक्ष का कहना है, "मानसिक स्वास्थ्य किसी भी व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य का अभिन्न अंग है। हमारी कोशिश है कि अस्पताल परिसर में मरीजों को एक सुरक्षित और तनावमुक्त वातावरण मिले।"

भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां

हालांकि, बढ़ते मरीजों के बोझ को देखते हुए विभाग अब अपनी क्षमता विस्तार की ओर देख रहा है। टेली-साइकेट्री (Tele-psychiatry) के माध्यम से दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों तक भी परामर्श पहुंचाने की पहल पर विचार चल रहा है। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन मरीजों को फॉलो-अप पर बनाए रखना है जो अपनी दवाएं बीच में ही छोड़ देते हैं। इसके लिए एक 'फॉलो-अप सेल' भी बनाया जा रहा है ताकि मरीज का उपचार बीच में न छूटे।

आम जनता के लिए संदेश

डॉक्टरों ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि आपको या आपके परिवार में किसी को भी नींद न आना, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, उदासी या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण महसूस हों, तो इसे सामान्य न समझें। JLNMCH के मानसिक रोग विभाग में समय पर पहुंचकर परामर्श लें। सही समय पर मिला उपचार न केवल मरीज की जान बचाता है, बल्कि उसके परिवार को भी टूटकर बिखरने से रोकता है।