डीआरआई मुजफ्फरपुर टीम ने सवा करोड़ के सोने के साथ दबोचा अंतर-राज्यीय कैरियर एजेंट

 देश के पूर्वी राज्यों के रास्ते होने वाली सोने की अंतरराष्ट्रीय तस्करी (Gold Smuggling) के खिलाफ डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय यूनिट ने एक बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई की है। डीआरआई की टीम ने खगड़िया जिले के मानसी रेलवे जंक्शन पर एक गुप्त और सटीक सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12505) से एक शातिर कैरियर एजेंट को गिरफ्तार किया है।

पकड़े गए तस्कर के पास से 900 ग्राम शुद्ध सोना (सोने की छह बिस्किट/बुलियन) बरामद किया गया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 1.25 से 1.50 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इस तस्कर ने सोना छिपाने के लिए जिस अजीबोगरीब और जोखिम भरे तरीके का इस्तेमाल किया, उसे देखकर डीआरआई के अनुभवी अधिकारी भी दंग रह गए।

 खुफिया इनपुट और 'मिशन मानसी जंक्शन'

यह सफल ऑपरेशन पूरी तरह से डीआरआई मुजफ्फरपुर यूनिट को मिले एक 'स्पेसिफिक इनपुट' पर आधारित था। खुफिया जानकारी मिली थी कि गुवाहाटी (असम) से दिल्ली जाने वाली नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस के बी-1 (B1) एसी कोच में एक शख्स भारी मात्रा में विदेशी सोने की खेप लेकर सफर कर रहा है और उसकी डिलीवरी दिल्ली के एक बड़े आभूषण व्यवसायी को होनी है।

सूचना मिलते ही डीआरआई की विशेष टीम एक्टिव हुई और ट्रेन के मुजफ्फरपुर पहुंचने से पहले ही खगड़िया के मानसी जंक्शन पर जाल बिछा दिया। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी, अधिकारियों ने बी-1 बोगी को घेर लिया और बर्थ नंबर के आधार पर संदिग्ध यात्री को पहचान कर उसे हिरासत में ले लिया।

जब नॉर्मल तलाशी में कुछ नहीं मिला, तो हुआ बॉडी स्कैनर का इस्तेमाल

शुरुआत में जब डीआरआई की टीम ने आरोपी यात्री की और उसके बैग की गहन तलाशी ली, तो अधिकारियों के हाथ कुछ नहीं लगा। न तो उसके सामान में कोई सोना था और न ही उसके कपड़ों में। सटीक और पुख्ता सूचना होने के बावजूद कुछ न मिलने पर अधिकारी हैरान थे।

इसके बाद अधिकारियों ने आरोपी को ट्रेन से नीचे उतारा और मुजफ्फरपुर लाकर कड़ाई से पूछताछ की। संदेह गहराने पर जब टीम ने बॉडी स्कैनर और मेडिकल जांच का सहारा लिया, तो सच सामने आ गया।

शरीर के भीतर छिपाया था सोना: आरोपी ने डेढ़-डेढ़ सौ ग्राम वजन की सोने की छह बिस्किट (कुल 900 ग्राम) को कैप्सूल के रूप में अपने रेक्टम (मलद्वार/शरीर के अंदर) में डाल रखा था। इसके बाद डीआरआई की टीम ने उचित चिकित्सकीय प्रक्रिया (मेडिकल अटेंशन और शौच कराकर) के जरिए उसके शरीर से सोने की सभी छह बिस्किट्स को सुरक्षित बाहर निकाला।

 आरोपी की प्रोफाइल: कौन है संजय कुमार पांडेय?

डीआरआई की गिरफ्त में आए इस कैरियर एजेंट की पहचान संजय कुमार पांडेय (उम्र लगभग 42 वर्ष) के रूप में हुई है। वह मुख्य रूप से राजस्थान के बीकानेर (नोखा) का रहने वाला है।

पूछताछ में सामने आया कि संजय केवल एक 'कैरियर एजेंट' है, जिसका काम मोटी रकम या कमीशन के बदले सोने की खेप को एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित पहुंचाना था। वह लंबे समय से इस सिंडिकेट के लिए काम कर रहा था और पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए ट्रेनों के एसी कोच में एक आम और संभ्रांत यात्री बनकर सफर करता था।

 गुवाहाटी से दिल्ली का कनेक्शन और 'म्यांमार रूट' का खुलासा

संजय कुमार पांडेय ने डीआरआई की पूछताछ में सोने की इस बड़ी खेप के पूरे रूट और सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। उसकी स्वीकारोक्ति से कई बड़े खुलासे हुए हैं:

रूट (Route): सोने की यह खेप मूल रूप से स्वीट्जरलैंड (Switzerland) से मंगाई गई थी। वहां से अवैध रास्तों और म्यांमार (Myanmar) सीमा के जरिए इसे भारत के गुवाहाटी (असम) पहुंचाया गया।

कैरियर का जाल: गुवाहाटी पहुंचने के बाद इस सिंडिकेट के मुख्य सरगना ने सोने को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर कई कैरियर एजेंट्स को दे दिया, जो अलग-अलग राज्यों के लिए निकले थे। संजय को दिल्ली के एक बड़े कारोबारी तक यह 900 ग्राम सोना पहुंचाने का टास्क मिला था।

अंतरराष्ट्रीय हालात का असर: पूछताछ में यह भी सामने आया कि वैश्विक स्तर पर ईरान युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के चलते लंबे समय से जो तस्करी के रूट सुस्त पड़े थे, वे अब भारत-म्यांमार बॉर्डर पर फिर से सक्रिय हो गए हैं।

 चार बड़े सोना तस्कर हुए चिह्नित, सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी

संजय कुमार पांडेय से मिली कड़ियों के आधार पर डीआरआई ने गुवाहाटी और नई दिल्ली के चार बड़े सोना माफियाओं और व्यवसायियों को चिह्नित (Identify) कर लिया है, जो इस अवैध रैकेट के असली फाइनेंसर हैं।

जब्त सोनाअंतरराष्ट्रीय कीमतआरोपी का पतागंतव्य (Destination)
900 ग्राम (6 बिस्किट)~1.50 करोड़ रुपयेनोखा, बीकानेर (राजस्थान)नई दिल्ली का व्यवसायी

शनिवार को आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद डीआरआई ने आरोपी संजय कुमार पांडेय को मुजफ्फरपुर की विशेष सीमा शुल्क अदालत (Customs Court) में पेश किया, जहां से माननीय न्यायाधीश ने उसे न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया है।

इस जब्ती के बाद डीआरआई की अलग-अलग विंग दिल्ली, असम और राजस्थान में फैले इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए छापेमारी कर रही है। ट्रेनों के जरिए सोने की तस्करी का यह कोई पहला मामला नहीं है, लेकिन शरीर के आंतरिक अंगों में इतनी बड़ी मात्रा में सोना छिपाकर ले जाने का यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नया चैलेंज है। डीआरआई अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में रेलवे स्टेशनों और प्रमुख ट्रेनों में निगरानी और ज्यादा सख्त की जाएगी।