"दशकों से कर रहे हैं नए-नए प्रयोग, पर हालात जस के तस", कलस्टर के कारीगरों ने बयां की अपनी दास्तान
भागलपुर/विशेष संवाददाता: हथकरघा (Handloom) और सिल्क उद्योग की ऐतिहासिक नगरी में जब भी रेशमी वस्त्रों की चमक देश-विदेश के बाजारों में बिखरती है, तो इसके पीछे उन कुशल बुनकरों की पीढ़ियों की मेहनत छिपी होती है, जो अपनी उंगलियों के हुनर से धागों में जान फूंक देते हैं। हाल ही में विभिन्न बुनकर क्लस्टर (Clusters) में काम करने वाले स्थानीय बुनकरों ने खुलकर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि वे पिछले कई दशकों से बदलते वक्त के साथ तालमेल बिठाने के लिए लगातार नए-नए डिजाइन, रंग-संयोजन (Color Combinations) और आधुनिक तकनीकों के प्रयोग कर रहे हैं, ताकि पारम्परिक हैंडलूम को आधुनिक फैशन जगत की पसंद के अनुरूप ढाला जा सके। लेकिन इसके बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है।
पीढ़ियों से जारी है नवाचार (Innovation) का सिलसिला
कौशल और कला के धनी इन बुनकरों ने बताया कि हथकरघा उद्योग केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों की विरासत है, जिसे वे संजोए हुए हैं। बदलते समय के साथ बाजार की मांग भी तेजी से बदली है। साड़ियों, सूट और त्सर सिल्क के कपड़ों में पारंपरिक डिजाइनों के अलावा अब आधुनिक और समकालीन (Contemporary) पैटर्न की मांग बढ़ रही है।
बुनकर क्लस्टर के कारीगरों का कहना है कि उन्होंने पिछले दो-तीन दशकों में अपनी कला में कई महत्वपूर्ण प्रयोग किए हैं:
डिजाइन और पैटर्न में बदलाव: पारंपरिक भारी पल्लू और बूटे के अलावा अब हल्के वजन वाले, मिनिमलिस्टिक डिजाइन और एथनिक-मॉडर्न फ्यूजन वाले वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं।
रंगों का नया संयोजन: केमिकल और प्राकृतिक रंगों (Natural Dyes) के मिश्रण से ऐसे आकर्षक शेड्स तैयार किए जा रहे हैं जो युवा पीढ़ी और आधुनिक उपभोक्ताओं को आकर्षित कर सकें।
मटीरियल में विविधता: केवल शुद्ध सिल्क ही नहीं, बल्कि सिल्क-कॉटन ब्लेंड और अन्य टिकाऊ धागों के साथ भी नए प्रयोग किए जा रहे हैं, ताकि कपड़े पहनने में अधिक आरामदायक और किफायती हो सकें।
मेहनत अथाह, लेकिन मुनाफे से कोसों दूर
एक तरफ जहां बुनकर लगातार नए प्रयोग कर अपनी कला को प्रासंगिक बनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी सबसे बड़ी पीड़ा उनकी पारिश्रमिक और बाजार तक सीधी पहुंच (Direct Market Access) को लेकर है। क्लस्टर में काम करने वाले कारीगरों का दर्द साफ झलकता है जब वे बताते हैं कि दिन-रात करघे पर पसीना बहाने के बाद भी उन्हें उनकी मेहनत का वाजिब दाम नहीं मिल पाता।
कच्चे माल की बढ़ती कीमतें: पिछले कुछ वर्षों में रेशम के धागे, जरी और अन्य कच्चे माल (Raw Materials) की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है।
बिचौलियों की भूमिका: बाजार और बुनकरों के बीच मौजूद बिचौलिए (Middlemen) असली मुनाफे का बड़ा हिस्सा अपने पास रख लेते हैं, जबकि असली काम करने वाले बुनकर कम मजदूरी पर काम करने को मजबूर रहते हैं।
आधुनिक तकनीक और पूंजी का अभाव: क्लस्टर स्तर पर आधुनिक मोटिफ डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर, ऑटोमैटिक लूम या उन्नत तकनीक अपनाने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता या सरकारी योजनाओं का लाभ हर कारीगर तक नहीं पहुंच पा रहा है।
सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक दावों पर सवाल
सरकार और विभिन्न विकास बोर्डों द्वारा हथकरघा बुनकरों के लिए कई प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं चलाई जाने के दावे किए जाते हैं—जैसे बुनकर क्रेडिट कार्ड, मुद्रा लोन, और राष्ट्रीय पुरस्कार योजनाएं। लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाले इन बुनकरों का कहना है कि इन योजनाओं की जटिल प्रक्रिया और लालफीताशाही (Red Tapism) के कारण वास्तविक जरूरतमंदों तक समय पर लाभ नहीं पहुंच पाता।
एक वरिष्ठ बुनकर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हम दशकों से इस काम में हैं। हमने नए जमाने के हिसाब से अपनी कला में हर संभव बदलाव किया, लेकिन बैंक लोन मिलने में आने वाली अड़चनें और बाजार में हमारी कला की सही कीमत न मिलना हमारे उत्साह को तोड़ देता है। यदि नई पीढ़ी को इस पेशे से जोड़े रखना है, तो बुनकरों को सीधे बाजार से जोड़ना होगा।"
बचाने होंगे हाथ के हुनर और विरासत
बुनकर क्लस्टर के इन कारीगरों की यह आवाज केवल उनकी व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, बल्कि यह देश की उस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की पुकार है जो दम तोड़ रही है। यदि समय रहते इन हुनरमंदों के प्रयोगों को उचित मंच, आर्थिक सुरक्षा और वैश्विक बाजार में पहचान नहीं मिली, तो हथकरघा की यह प्राचीन विधा धीरे-धीरे सिमट जाएगी।
आज जरूरत इस बात की है कि क्लस्टर स्तर पर बुनकरों को तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ डिजिटल मार्केटिंग और सीधे उपभोक्ताओं तक अपने उत्पाद बेचने के साधन उपलब्ध कराए जाएं। दशकों से नए-नए प्रयोग कर रहे इन बेजुबान कारीगरों की मेहनत तभी रंग लाएगी जब उनकी कला को उसका वास्तविक मान और सम्मान मिलेगा।