बाढ़ के खतरे को लेकर डीएम कुमार गौरव अलर्ट, औराई, कटरा और गायघाट का किया औचक निरीक्षण

मुजफ्फरपुर। मानसून के सक्रिय होते ही उत्तर बिहार में नदियों के जलस्तर में वृद्धि का दौर शुरू हो गया है। संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। गुरुवार को जिलाधिकारी (DM) कुमार गौरव ने जिले के सबसे संवेदनशील बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों—औराई, कटरा एवं गायघाट प्रखंडों का दौरा किया और जमीनी स्तर पर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने तटबंधों की मजबूती से लेकर राहत शिविरों की व्यवस्था तक की गहन समीक्षा की।

तटबंधों पर पैनी नजर, अधिकारियों को सख्त निर्देश

निरीक्षण की शुरुआत डीएम ने बागमती नदी के तटवर्ती इलाकों से की। उन्होंने औराई और कटरा के तटबंधों के उन बिंदुओं को बारीकी से देखा जहाँ जलस्तर बढ़ने पर कटाव का खतरा सबसे अधिक रहता है। डीएम ने जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि तटबंधों की निगरानी 24 घंटे की जाए और जहां भी संभावित कमजोरी दिखे, वहां युद्धस्तर पर मरम्मत का कार्य पूर्ण किया जाए।

डीएम कुमार गौरव ने बैठक के दौरान स्पष्ट लहजे में कहा कि बाढ़ प्रबंधन के कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही अक्षम्य होगी। उन्होंने कहा, "बाढ़ से निपटना हमारी प्राथमिकता है और इसमें संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।"

राहत स्थलों और सुविधाओं का आकलन

डीएम ने क्षेत्र में स्थित विभिन्न राहत स्थलों का भी मुआयना किया। उन्होंने निर्देश दिए कि बाढ़ की स्थिति में प्रभावित लोगों को ठहराने के लिए चिह्नित विद्यालयों और अन्य भवनों में पेयजल, बिजली और स्वच्छता की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, महिला एवं बच्चों के लिए विशेष सुविधाएं और सामुदायिक रसोई (Community Kitchen) के संचालन की योजना को भी दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है।

प्रशासन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार:

नौका परिचालन: बाढ़ के दौरान फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नावों का रूट चार्ट तैयार कर लिया गया है।

पॉलिथीन और सामग्री: राहत के लिए पर्याप्त मात्रा में पॉलिथीन शीट और सूखा राशन सुरक्षित रखा गया है।

कंट्रोल रूम: जिला स्तर पर स्थापित कंट्रोल रूम को 24 घंटे सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया (Response) दी जा सके।

डिग्री कॉलेज एवं नामांकन प्रक्रिया पर समीक्षा

बाढ़ तैयारियों के अलावा, डीएम ने संबंधित क्षेत्रों में शैक्षणिक गतिविधियों की स्थिति को भी देखा। उन्होंने स्थानीय डिग्री कॉलेजों में चल रही नामांकन प्रक्रिया की समीक्षा की। डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ के कारण छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो और नामांकन के दौरान विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। यदि बाढ़ से कॉलेज परिसर प्रभावित होते हैं, तो वैकल्पिक व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

जन प्रतिनिधियों से संवाद और सहयोग की अपील

औराई, कटरा और गायघाट के निरीक्षण के दौरान डीएम ने स्थानीय जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों से भी संवाद किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जलस्तर बढ़ने की स्थिति में घबराएं नहीं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। उन्होंने प्रशासन और जनता के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया ताकि आपदा की घड़ी में हर जरूरतमंद व्यक्ति तक राहत पहुंचाई जा सके।

जिले के वरीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे साप्ताहिक रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपें ताकि उच्च स्तर पर भी स्थिति की मॉनिटरिंग की जा सके। मुजफ्फरपुर प्रशासन का यह दौरा स्पष्ट करता है कि इस वर्ष बाढ़ प्रबंधन को लेकर सरकार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।