विकास के नाम पर 'अड़चन', जमीन से 5 फीट ऊंचे नाले ने छीनी स्थानीय लोगों की राह
शहर के विकास और जल निकासी की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू किए गए एक निर्माण कार्य ने स्थानीय निवासियों के लिए मुसीबत का पहाड़ खड़ा कर दिया है। मामला शहर के एक घनी आबादी वाले क्षेत्र का है, जहाँ निर्माण विभाग द्वारा बनाए जा रहे नाले की ऊंचाई जमीन स्तर से करीब 5 फीट ऊपर कर दी गई है। इस नाले के निर्माण के बाद से ही स्थानीय निवासियों का अपने ही घरों से बाहर निकलना और आवागमन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
समस्या की जड़: निर्माण की गलत योजना
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे जल निकासी की व्यवस्था का स्वागत करते हैं, लेकिन जिस तरह से नाले का निर्माण किया जा रहा है, वह पूरी तरह से अवैज्ञानिक है। नाला सड़क के किनारे घरों के ठीक सामने बनाया जा रहा है, जिसकी ऊंचाई सड़क के स्तर से लगभग 5 फीट ऊंची है।
इस निर्माण ने कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर दी हैं:
आवागमन में बाधा: 5 फीट ऊंची दीवार जैसी संरचना ने घरों के मुख्य द्वार और सड़क के बीच एक दीवार खड़ी कर दी है, जिससे लोगों का घर से बाहर निकलना असंभव हो गया है।
वाहन पार्किंग की समस्या: जिन लोगों के पास दोपहिया या चारपहिया वाहन हैं, वे अब उन्हें अपने घर तक नहीं ला सकते।
वृद्ध और बीमारों के लिए खतरा: सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों के लिए है जहाँ बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति हैं। किसी आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या किसी वाहन का घर तक पहुंचना अब नामुमकिन हो गया है।
स्थानीय निवासियों का दर्द
प्रभावित निवासी रामजी प्रसाद ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा, "हमने कई बार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई कि नाले की ऊंचाई कम की जाए या इसे सड़क के स्तर के अनुसार बनाया जाए, लेकिन हमारी एक नहीं सुनी गई। अब हम अपने ही घर में कैद होने को मजबूर हैं।"
वहीं, गृहिणी सुमन देवी ने बताया कि, "बाजार से घर लौटना एक पहाड़ चढ़ने जैसा हो गया है। रात के अंधेरे में इस 5 फीट ऊंचे नाले से गिरने का डर हमेशा बना रहता है। यह विकास नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में एक बड़ी बाधा है।"
क्या है प्रशासनिक चूक?
निर्माण की इस विसंगति को लेकर जानकारों का मानना है कि यह तकनीकी नियोजन (Planning) की घोर लापरवाही है। सामान्यतः नाले का निर्माण सड़क के किनारे उसके ढलान के अनुरूप किया जाता है ताकि पानी आसानी से निकल सके। लेकिन यहाँ नाला सड़क से ऊंचा उठा दिया गया है।
क्या यह निर्माण किसी गलत 'लेवलिंग' का परिणाम है या फिर ठेकेदार ने अपनी सुविधा के लिए इसे ऊंचा बना दिया है? यह जांच का विषय है। यदि इस नाले को इसी तरह छोड़ दिया गया, तो बरसात के मौसम में यह क्षेत्र जलजमाव की समस्या से भी जूझ सकता है, क्योंकि पानी सड़क पर ही जमा रहेगा और नाले के अंदर नहीं जा पाएगा।
सुरक्षा और पहुंच (Accessibility) के मुद्दे
यह निर्माण 'सुगम भारत अभियान' और स्थानीय निवासियों के 'आवागमन के अधिकार' का सीधा उल्लंघन प्रतीत होता है।
सुरक्षा: बिना किसी बैरिकेडिंग या ढलान वाली सीढ़ी के, 5 फीट की ऊंचाई से दुर्घटना होने की प्रबल संभावना है।
दुकानदारों पर मार: इस इलाके में स्थित छोटी दुकानों का धंधा भी चौपट हो गया है, क्योंकि ग्राहक दुकान तक पहुंचने में असमर्थ हैं।
प्रशासन से मांग
स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
निर्माण कार्य पर तत्काल रोक: जब तक समस्या का समाधान न हो, कार्य को तुरंत रोका जाए।
तकनीकी ऑडिट: एक इंजीनियरों की टीम मौके पर आकर सर्वे करे और निर्माण को सड़क के स्तर पर लाने का विकल्प तलाशे।
वैकल्पिक मार्ग: यदि नाला हटाना संभव नहीं है, तो घरों के सामने से गुजरने के लिए पक्की सीढ़ियाँ या रैंप का निर्माण विभाग द्वारा ही करवाया जाए।
अधिकारियो की जवाबदेही: बिना किसी तकनीकी समीक्षा के इस तरह के निर्माण की मंजूरी देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
विकास कार्य जनसुविधा के लिए होते हैं, न कि जन-कष्ट के लिए। यदि कोई निर्माण नागरिकों के मौलिक अधिकारों और दैनिक जीवन में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसे 'विकास' नहीं कहा जा सकता। स्थानीय लोग अब इस मामले को लेकर उच्च अधिकारियों तक जाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन को समय रहते इस मामले को गंभीरता से लेना होगा, अन्यथा यह एक बड़ा जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।