बीपीएससी में परचम लहराने वाली प्रियंका कुमारी का गृहग्राम में भव्य स्वागत

पीरपैंती (भागलपुर): लखीसराय में पुलिस सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) के पद पर तैनात प्रियंका कुमारी ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में घोषित 70वीं बीपीएससी (BPSC) की परीक्षा में शानदार सफलता दर्ज कर प्रियंका ने न केवल अपना नाम रोशन किया है, बल्कि जिले का मान भी बढ़ाया है। अब वह पुलिस सेवा में 'डिप्टी एसपी' (DSP) के पद पर अपनी सेवाएं देंगी।

दूसरा प्रयास और बड़ी कामयाबी

प्रियंका कुमारी की यह सफलता किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उन्होंने अपनी प्रशासनिक सेवा की तैयारी के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। यह उनका बीपीएससी का दूसरा प्रयास था। पहली बार की छोटी-मोटी चूक से सबक लेते हुए उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया और अपनी पढ़ाई को और अधिक केंद्रित किया। उनकी यह निरंतरता और एकाग्रता ही थी कि उन्होंने न केवल परीक्षा पास की, बल्कि डीएसपी जैसे प्रतिष्ठित पद को प्राप्त करने में भी सफलता हासिल की।

लखीसराय से डीएसपी तक का सफर

प्रियंका वर्तमान में लखीसराय में दारोगा के रूप में कार्यरत थीं। पुलिस की वर्दी में रहते हुए कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालना और साथ ही एक कठिन परीक्षा की तैयारी करना, यह अपने आप में एक मिसाल है। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि व्यक्ति के अंदर आगे बढ़ने का जज्बा हो, तो नौकरी की व्यस्तता भी लक्ष्य की प्राप्ति में बाधा नहीं बन सकती। डीएसपी के रूप में उनकी नियुक्ति पूरे प्रशासनिक अमले के लिए एक गर्व का क्षण है।

अगला लक्ष्य: आईपीएस बनना

सफलता की इस ऊंचाइयों पर पहुंचने के बावजूद प्रियंका के कदम अभी थमने वाले नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि डीएसपी बनना उनके सफर का एक पड़ाव मात्र है। उनका अंतिम लक्ष्य भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल होकर देश की सेवा करना है। अपनी अगली तैयारी को लेकर वे बेहद उत्साहित और आश्वस्त हैं।

गांव में जश्न का माहौल

शनिवार को जैसे ही प्रियंका अपने पैतृक गांव पीरपैंती पहुंचीं, वहां के लोगों का उत्साह देखने लायक था। ग्रामीणों ने अपनी बेटी का स्वागत किसी वीरांगना की तरह किया। ढोल-नगाड़ों की थाप और फूलों की बारिश के बीच प्रियंका का काफिला गांव में प्रवेश किया। बुजुर्गों ने उन्हें आशीर्वाद दिया, तो वहीं युवा पीढ़ी उनके साथ सेल्फी लेने और उनसे प्रेरणा लेने के लिए उत्सुक दिखी।

गांव के लोगों ने कहा कि प्रियंका की उपलब्धि ने पीरपैंती का नाम पूरे बिहार में गौरवान्वित किया है। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। इस मौके पर प्रियंका ने कहा, "ग्रामीणों का यह प्रेम और सम्मान मेरे लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं है। यह मेरे माता-पिता और गुरुजनों के आशीर्वाद का ही फल है।"

युवाओं के लिए मिसाल

प्रियंका की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए एक मशाल है जो संसाधनों की कमी या असफलता के डर से घबरा जाते हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन, सही सोच और अटूट मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता यह भी संदेश देती है कि प्रशासनिक पदों पर रहते हुए भी उच्च स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी संभव है।

पूरे पीरपैंती क्षेत्र में प्रियंका की सफलता की चर्चा है। उनके पिता और परिवार के सदस्य खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। अब सबको इंतजार है उस दिन का, जब प्रियंका अपनी मेहनत से आईपीएस अधिकारी बनकर अपने और अपने गांव का सपना पूरा करेंगी।